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एनजीटी ने जल शक्ति मंत्रालय और डीजेबी से मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट

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एनजीटी ने जल शक्ति मंत्रालय और डीजेबी से मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट
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गाजियाबाद। घरों, सर्विस स्टेशनों समेत कामर्शियल प्रतिष्ठानों में हो रही पानी की बर्बादी पर एनजीटी ने सख्ती की है। भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी की ओर से दाखिल की गई जनहित याचिका पर एनजीटी ने जल शक्ति मंत्रालय और दिल्ली जल बोर्ड से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट एक माह में पेश करनी होगी। अब मामले की सुनवाई 23 अगस्त को होगी।
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भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी का कहना है कि हर घर की छत पर लगी पानी की टंकी से रोजाना सैकड़ों लीटर पानी ओवरफ्लो हो जाता है। सर्विस स्टेशनों पर गाड़ियों को धोने के लिए पेयजल का इस्तेमाल किया जा रहा है। उद्योगों में सीवरेज के ट्रीटेड वाटर की बजाय भूजल प्रयोग किया जा रहा है। यही वजह है कि गाजियाबाद और 21 अन्य शहरों में ग्राउंड वाटर की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने नीति आयोग के कंपोजिट वाटर रिसोर्सेज मैनेजमेंट इंडेक्स के आंकड़ों के आधार पर एनजीटी में जनहित याचिका दाखिल की थी। उन्होंने याचिका में कहा है कि पानी की बर्बादी को रोकने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। देश में 16.30 करोड़ लोग पानी से वंचित हैं और लगभग 60 करोड़ जल संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने याचिका में कहा कि वर्ष 2025 तक देश में पानी की मांग 40 बिलियन घन मीटर से करीब पांच गुना बढ़ जाएगी। उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्रालय से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3 और 5 के तहत दिशा निर्देश मांगते हुए जल बर्बादी को अपराध घोषित करने की मांग की है। एनजीटी ने इस मामले में सुनवाई करते हुए अब जल शक्ति मंत्रालय और दिल्ली जल बोर्ड से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। एनजीटी ने याचिकाकर्ता को जल शक्ति मंत्रालय और दिल्ली जल बोर्ड को सभी दस्तावेज मुहैया कराने के आदेश दिए हैं।
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