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धर्म रक्षा के लिए दुर्गा और महाकाली बनें हिंदू नारियां - त्रिकाल भवंता

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धर्म रक्षा के लिए दुर्गा और महाकाली बनें हिंदू नारियां - त्रिकाल भवंता
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गाजियाबाद। शिव शक्ति धाम डासना मंदिर में 20 और 21 जुलाई को दो दिवसीय हिंदू नारी संसद का आयोजन किया जा रहा है। नारी संसद में भाग लेने आईं महिला शंकराचार्य साध्वी त्रिकाल भवंता सरस्वती और महामंडलेश्वर साध्वी निलिमानंद सहित डासना देवी मंदिर की महंत यति मां चेतनानंद सरस्वती ने शुक्रवार को एक प्रेसवार्ता की।
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जगद्गुरु साध्वी त्रिकाल भवंता ने कहा कि हिंदू नारी संसद एक ऐतिहासिक पहल है। इतिहास गवाह है कि जब-जब देश धर्म और संस्कृति पर आघात हुआ है, सबसे अधिक पीड़ा नारियों को ही सहनी पड़ी है। इसलिए हिंदू नारियां जाग जाएं और धर्म रक्षा के लिए दुर्गा और महाकाली बनें। महामंडलेश्वर साध्वी नीलिमानंद ने कहा कि हिंदू समाज की वर्तमान दुर्गति का सबसे बड़ा कारण परिवार नाम की संस्था का कमजोर होना है। जबकि हजारों साल पहले मजबूत परिवार ही हिंदू समाज की रीढ़ रहा है। मुस्लिम समाज के परिवारों की मजबूती और उनकी एकता से सबको सबक लेना चाहिए। इस मौके पर मां चेतनानंद सरस्वती ने कहा कि युद्ध के लिए पुरुषों की हवस, लोभ और उनकी महत्वाकांक्षा जिम्मेदार होती है, लेकिन उसकी कीमत उनकी मां, बहन, बेटियों और एक पत्नी के रूप में नारी को चुकानी पड़ती है। इसलिए समाज की गलत बात और बुराई का विरोध करना नारी का कर्तव्य है। प्रेसवार्ता में उन्होंने सभी से हिंदू नारी संसद को समर्थन देने की अपील की। हिंदू नारी संसद की मुख्य संयोजिका शशि चौहान ने सभी महिलाओं और प्रबुद्ध नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में शिरकत करने की अपील की।
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