महिला और पुरुष में मिला ब्लैक फंगस, निकालने पड़े जबडे़
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर कम होने के साथ ही साइड इफेक्ट भी आने लगे हैं। अब तक हुई 11 मौत के बाद अब एक महिला और एक पुरुष में ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) की पुष्टि हुई है। स्थिति यह है कि दोनों में संक्रमण गंभीर होने के कारण जबड़ा निकालना पड़ा। हालांकि, ऑपरेशन के बाद दोनों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है, लेकिन जांच के लिए प्रतिदिन अस्पताल आना पड़ रहा है। नोडल अधिकारी डॉ. सुनील त्यागी ने बताया कि दोनों मरीजों की सेहत में सुधार है।
घर के सभी छह संक्रमित, महिला को फंगल इंफेक्शन
आरडीसी स्थित हर्ष ईएनटी अस्पताल के डायरेक्टर वरिष्ठ नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. बीपी त्यागी ने बताया कि कविनगर निवासी 50 वर्षीय महिला के घर में सभी छह लोग कोरोना संक्रमित हुए थे। लोग घर में ही इलाज लेने के बाद स्वस्थ हो गए थे। कुछ दिन बाद मधुमेह से ग्रसित महिला के दाई तरफ नाक में दर्द होने के साथ ही माथे पर दर्द होने लगा। एक फिजिशियन से इलाज कराया तो उन्होंने किसी ईएनटी से इलाज कराने की सलाह दी। जांच करने पर पता चला कि संक्रमण बढ़ गया है। इसके बाद महिला का दाईं तरफ जबड़ा आूपरेशन से काटकर निकालना पड़ा। अब महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
50 वर्षीय इंजीनियर का निकालना पड़ा दोनों जबड़ा
डॉ. बीपी त्यागी ने बताया कि कौशांबी निवासी एक व्यक्ति नोएडा के एक मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वह एक महीने पहले कोरोना संक्रमित हुए थे। संक्रमण मुक्त होने के बाद उनके नाक में दो दिन दर्द हुआ, उसके बाद आंख में भी दर्द होने लगा। पांच दिन के बाद सिर में दर्द होने लगा। इस दौरान एक डॉक्टर से इलाज करा रहे थे। आराम न मिलने पर डॉक्टर ने रेफर किया था। जांच के बाद ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई। उस समय मधुमेह भी अनियंत्रित था। दो दिन इलाज के बाद मधुमेह कम हुआ तब ऑपरेशन किया गया। संक्रमण अधिक होने के कारण उनका दोनों जबड़ा निकालना पड़ा। उन्हें भी बृहस्पतिवार को अस्पताल से छुट्टी मिल गई, लेकिन अभी 21 दिन इंजेक्शन लगेगा।
दूसरी लहर में भी ब्लैक फंगस से पांच मरीजों की हुई थी मौत
दूसरी लहर में जिले में 145 मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई थी। इनमें पांच मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उस समय एंफेटेरोसिन इंजेक्शन को लेकर भी काफी मारामारी हुई थी। परिजनों को इंजेक्शन के लिए मेरठ, दिल्ली तक भागना पड़ा था। हालांकि, इस समय स्वास्थ्य विभाग के पास 35 इंजेक्शन एंफेटेरोसिन के उपलब्ध हैं। डॉ. सुनील त्यागी ने बताया कि इस समय किसी भी दवाई या इंजेक्शन की कमी नहीं है।