लड़ाई नहीं, हमें दवाई और पढ़ाई चाहिए
गाजियाबाद। लंबे समय तक गाजियाबाद की पांचों विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका में रहने वाली मुस्लिम राजनीति ध्रुवीकरण के दौर में हाशिए पर हैं। 80 और 20 फीसदी की लड़ाई का नारा देकर राजनीतिक दल एक बार फिर ध्रुवीकरण कर सत्ता तक पहुंचने का रोड मैप तैयार कर रहे हैं। वहीं मुस्लिम मतदाता अभी शांत हैं। उन्होंने पत्ते नहीं खोले हैं।
गाजियाबाद और लोनी विधानसभा क्षेत्र में ‘अमर उजाला’ ने मुस्लिम मतदाताओं की नब्ज टटोली तो उनका दर्द और इरादे सामने आए। मुस्लिम मतदाताओं का कहना है कि ‘लड़ाई नहीं, हमें दवाई और बच्चों के लिए पढ़ाई चाहिए’।
कैला भट्ठा में होटल चलाने वाले आमिर कहते हैं कि बीते 8 साल में राजनीति के हुए ध्रुवीकरण से फायदा किसी का भी नहीं हुआ है। मुस्लिम सत्ता नहीं चाहते, बल्कि सत्ता से बच्चों और परिवारों के लिए सिर्फ दवाई यानी अस्पताल और पढ़ाई यानी स्कूलों का निर्माण चाहिए। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ऐसा चेहरा होना चाहिए जो मतदाताओं में जाति के आधार पर भेदभाव न करें। 55 वर्षीय रियाज बताते हैं कि महंगाई और बेरोजगारी चुनाव का बड़ा मुद्दा होना चाहिए। हिंदू-मुसलमान की राजनीति से देश की तरक्की नहीं हो सकती है। उनका कहना है कि दोनों ही समुदाय के नेता एक-दूसरे को अपशब्द बोलते हैं, लेकिन मतदाताओं को समझना होगा कि इसमें भलाई सिर्फ नेताओं की है, जनता की नहीं। युवा मतदाता रमीज राजा कहते हैं कि राजनीति में आई कड़वाहट काबिल युवाओं का भविष्य भी दांव पर लगा रही है। देश को आगे बढ़ाने के लिए धर्म का नहीं, तरक्की और विकास का सहारा लिया जाना चाहिए। इस जाति-धर्म की राजनीति में युवाओं के रोजगार के लिए कोई दल बात ही नहीं कर रहा है।
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लोनी में किसान आंदोलन दिखा सकता है असर
लोनी विधानसभा क्षेत्र में हजारों की संख्या में ऐसे लोग हैं जो पश्चिमी यूपी के अन्य जिलों से आकर रह रहे हैं और गांव, खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं। ऐसे में यहां मुस्लिम बस्तियों में महंगाई और रोजगार के साथ-साथ किसानों का मुद्दा भी हावी दिखाई दे रहा है। अशोक विहार निवासी फुरकान सैफी कहते हैं कि पांच साल में कॉलोनी में जलभराव की समस्या भी हल नहीं हो पाई। पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बावजूद लोनी की उपेक्षा की गई है। अय्यूब खान का कहना है कि चुनाव के समय में तो मतदाताओं में भेदभाव किया जा सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठकर जनता में भेदभाव करना ठीक नहीं है। सरकार भेदभाव किए बिना लोनी में लड़कियों के लिए उच्च शिक्षण संस्थान का निर्माण कराए। बुजुर्ग मतदाता चौधरी दल्ला बताते हैं कि गरीबों को रोजगार नहीं मिल रहा, सड़क, जल निकासी की सुविधा नहीं मिल रही तो फिर सरकार चुनने का क्या फायदा। सियासत विकास की होनी चाहिए, जात-पात की नहीं। मोहम्मद आरिफ का भी कहना है कि सत्ता कई बार बदली, लेकिन लोनी के दिन नहीं बदले। ऐसी सरकार बननी चाहिए जो भेदभाव किए बिना विकास कराए।