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घरों में लगाए जाएंगे स्मार्ट वाटर मीटर, पानी का ऑडिट होगा

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घरों में लगाए जाएंगे स्मार्ट वाटर मीटर, पानी का ऑडिट होगा
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गाजियाबाद। एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में तेजी से बढ़ रही आबादी को पानी मुहैया कराने के लिए जल संसाधन भी तेजी से बढ़ाने पड़ेंगे। इसके लिए एनसीआर के रीजनल प्लान-2041 में पानी की आपूर्ति और संरक्षण के लिए खास चिंता जाहिर की गई है। सर्विस लेवल बेंचमार्क के आधार पर हर व्यक्ति को पर्याप्त पानी की आपूर्ति की जाएगी तो वहीं बर्बादी रोकने के लिए घरों में स्मार्ट वाटर मीटर लगाए जाएंगे। पानी की मांग पूरी हुई या नहीं, इसका पता लगाने के लिए समय-समय पर वाटर ऑडिट भी किया जाएगा।
एनसीआर में पानी के घटते स्रोत की वजह से आबादी के लिए पर्याप्त पानी मुहैया कराना नगर निकायों के लिए बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के रीजनल प्लान-2041 में जल प्रबंधन पर खास तवज्जो दी गई है। इसमें पूरे एनसीआर क्षेत्र के जिले और कस्बों के लिए ‘जल संतुलन तालिका’ (वाटर बैलेंस टेबल) बनाई जाने की सिफारिश की गई है, ताकि पता चल सके कि क्षेत्रों में पानी की सप्लाई और जल संसाधन कितने जुटाए गए हैं। पूरे एनसीआर क्षेत्र में स्काडा (पर्यवेक्षी नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण) पर आधारित 100 फीसदी वाटर मीटरिंग और वाटर ऑडिट लागू करने की योजना को भी रीजनल प्लान में शामिल किया गया है। वाटर मीटरिंग से पानी की बर्बादी रुकेगी और ऑडिट से पता चल पाएगा कि घरेलू, कृषि, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में पानी की पर्याप्त आपूर्ति हो पा रही है या नहीं। पानी की मांग और आपूर्ति का अंतर का ब्योरा भी इससे मिल जाएगा। रीजनल प्लान-2041 को मंजूरी मिलते ही इस योजना पर काम शुरू हो जाएगा।
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मीटरिंग से गैर राजस्व जल का डेटा होगा तैयार
पानी के कनेक्शन पर मीटरिंग कराने का मकसद न केवल पानी की बर्बादी को रोकना, बल्कि आपूर्ति की एवज में राजस्व वसूली कर जल संसाधनों पर खर्च होने वाली रकम की रिकवरी करना भी है। मीटर लगने के बाद गैर राजस्व पानी का डेटा भी तैयार हो सकेगा और इसकी मात्रा कम की जा सकेगी। इन क्षेत्रों को भी चिह्नित आसानी से किया जा सकेगा, जिनमें गैर राजस्व पानी की ज्यादा आपूर्ति हो रही है।
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2026 तक पूरे एनसीआर में लागू होगी योजना
वाटर मीटरिंग कर पानी की मात्रा के हिसाब से बिलिंग कर राजस्व वसूली करने की यह योजना 2026 तक एनसीआर के सभी क्षेत्रों में लागू करनी होगी। दिल्ली में वाटर मीटिरिंग हो चुकी है, लेकिन गाजियाबाद, नोएडा जैसे क्षेत्र अभी इससे दूर हैं। रीजनल प्लान-2041 में मैकेनिकल मीटर की बजाय डिजिटल मीटर लगाए जाने की सिफारिश की गई है, ताकि किसी भी छेड़छाड़, लीकेज के दौरान ऑटो अलर्ट सिस्टम एक्टिव हो सके। जिला स्तर पर वाटर स्मार्ट पोर्टल भी विकसित किया जाएगा।
बनेगा डिजिटल प्लेटफार्म
जल संतुलन योजना एनसीआर के सभी राज्यों के शहरों को दो साल में तैयार करके लागू करनी होगी। वहीं पानी आपूर्ति और जल निकासी के मुद्दों को हल करने के लिए एकल डिजिटल प्लेटफार्म विकसित किया जाएगा। इसमें अंतर्राज्यीय मुद्दे भी शामिल रहेंगे। सभी समस्याओं का समाधान इस प्लेटफार्म के जरिए किया जा सकेगा।
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जल संरक्षण के लिए बनाए जाएंगे तालाब
जल आपूर्ति के साथ-साथ रीजनल प्लान में जल संरक्षण पर भी ज्यादा जोर दिया गया है। ‘ग्राम पंचायत तालाबों’ के निर्माण जैसे कदम उठाए जाएंगे। वहीं क्षेत्रीय योजना में भी जल संरक्षण के लिए भूमि चिह्नित की जाएंगी, ताकि वर्षा के जल का संचयन हो सके।
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