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अब ऑर्गेनिक मसालों से महकेगी मिड डे मली की थाली

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अब ऑर्गेनिक मसालों से महकेगी मिड डे मील की थाली
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गाजियाबाद। महिलाओं को मसालों से स्थाई कमाई हो और उनका रोजगार बढ़े इसके लिए अब शिक्षा विभाग और एनआरएलएम के बीच करार हुआ है। जिले के सभी प्राथमिक विद्यालय और जूनियर हाईस्कूलों में मिड डे मील योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों के आर्गेनिक उत्पादों का इस्तेमाल किया जाएगा। 24 दिसंबर को इस योजना को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग में बैठक भी की जाएगी। सभी खंड विकास अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई है।
जिले में लगभग 1500 स्वयं सहायता समूह गठित हैं। इनमें से 30 फीसदी समूह की महिलाएं मसालों और तेल, पापड़, चिप्स आदि का व्यवसाय करती हैं। पहले चरण में चार स्वयं सहायता समूह को चुना गया है जिसमें लगभग 50 से अधिक महिलाएं शामिल हैं। पायलट प्रोजेक्ट के रुप में अभी चार ब्लॉक के सहायता समूहों और स्कूलों के बीच योजना शुरू की जा रही है। इसके तहत पहले चरण में मिड डे मील के लिए बनने वाले भोजन के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए आर्गेनिक मसाले और सरसों का तेल लिया जाएगा। सफल होने के बाद अन्य सभी स्कूलों और समूहों के उत्पादों को शामिल किया जाएगा।
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इनसेट -
महिला सहभागिता जैविक सिरोरा सलेमपुर, लोनी
मां परिवार सैदपुर हुसैनपुर डीलना , भोजपुर
माता महिला समूह खिमावती , मुरादनगर
सवेरा भिक्कनपुर, रजापुर
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मेरे समूह में 15 महिलाएं हैं जिसमें से बड़े पैमाने पर दो महिलाएं आर्गेनिक मसालों का काम करती हैं। इसके अलावा आर्गेनिक तेल की भी पैकिंग होती है। इस नई योजना से महिलाओं की फिक्स इनकम हो जाएगी। इसके अलावा जो गांव की महिलाएं छोटे स्तर पर मसालों का काम कर रही हैं उनसे खरीद भी करेंगे तो उनका भी फायदा होगा।
एकता यादव - महिला सहभागिता जैविक समूह
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इससे महिलाओं की कमाई बढ़ेगी और अन्य महिलाएं भी इस कार्य को करने के लिए प्रेरित होंगी। इस समूह में 12 महिलाएं हैं। समूह की कोषाध्यक्ष मसालों का कार्य करती हैं।
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मीना, माता महिला समूह
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कोट्स
इससे बच्चों को शुद्ध भोजन भी मिलेगा और महिलाओं की आजीविका में वृद्धि भी होगी। इसके अलावा 100 ग्राम के पैकिंग के बजाए पांच किलो, 10 किलो की पैकिंग करेंगी जिससे उनके पैकेजिंग के खर्चे भी बचेंगे और प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल भी होगा। इस योजना के सफल होने के बाद आगे और महिलाओं को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा।
अस्मिता लाल, सीडीओ
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