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एसएसपी साहब... आप बुलाएंगे तो आ जाऊंगा, एसपी ग्रामीण पर भरोसा नहीं

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एसएसपी साहब! आप बुलाएंगे तो आ जाऊंगा, एसपी ग्रामीण पर भरोसा नहीं
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गाजियाबाद। मुठभेड़ में सात पशु तस्करों के पैर में एक ही जगह गोली मारने के मामले के बाद अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित हुए इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी ने एसएसपी को व्हॉट्सएप पर मेसेज भेजा है। मेसेज में उन्होंने कहा है कि एसएसपी जब भी बुलाएंगे, वह आ जाएंगे। उनका हर आदेश मानने को तैयार हैं, लेकिन एसपी ग्रामीण पर उन्हें भरोसा नहीं है। वहीं, मीडिया से बातचीत में इंस्पेक्टर ने लोनी विधायक द्वारा एसएसपी पर लगाए आरोपों को राजनीतिक बताया। उन्होंने गोतस्करों को एसएसपी का संरक्षण होने से साफ इंकार करते हुए कहा कि मुठभेड़ के दिन छठ पर्व था। इस दिन गोकशी करके दंगा भड़काने की साजिश थी। यह जांच का विषय है।
इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी का कहना है कि उन्होंने अपनी जान पर खेलकर सात गोतस्करों को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया। एसएसपी ने उनसे पूछा था कि मुठभेड़ की जानकारी एसपी ग्रामीण को दी थी या नहीं। इस पर उन्होंने कहा कि मुठभेड़ के बाद बताया था, लेकिन मुठभेड़ के दौरान वायरलेस सेट पर लगातार सूचना प्रसारित की जा रही थी। इंस्पेक्टर का कहना है कि जब दूसरी तरफ से गोलियां चल रही हों, उस दौरान वह किसी अधिकारी को सूचना कैसे दे सकते थे। अगर मुठभेड़ पर शक था तो एसपी ग्रामीण या किसी अन्य अधिकारी को मौके पर आना चाहिए था।
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मनोबल टूटने पर कार्यमुक्त होना अपराध नहीं
इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी का कहना है कि जीडी में उन्होंने तस्करा जरूर डाला था, लेकिन उन्होंने उसे लीक नहीं किया। अगर उनके मोबाइल से तस्करा किसी को भेजने की बात पुष्ट हो जाए तो हर सजा भुगतने को तैयार हैं। उनका कहना है कि कोई कर्मचारी किसी भी कारण से गैरहाजिर हो सकता है। वह मनोबल गिरने के कारण गैरहाजिर हुए हैं और यह कोई अपराध नहीं है। वह इस दौरान सैलरी भी नहीं मांग रहे हैं। मानसिक स्थिति ठीक न होने के चलते वह घर पर हैं।
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पुलिस के व्हॉट्सएप ग्रुप में दरोगा ने मुठभेड़ को बताया फर्जी
- जिस चौकी क्षेत्र में मुठभेड़ हुई, उसी पर तैनात रहे दरोगा ने डाला ग्रुप पर मेसेज
गाजियाबाद। जिस चौकी क्षेत्र में लोनी बॉर्डर पुलिस ने मुठभेड़ की, उसी चौकी पर पूर्व में तैनात रहे दरोगा लोकेंद्र कुमार ने मुठभेड़ को फर्जी बता दिया। उन्होंने चौकी के व्हॉट्सएप ग्रुप पर मुठभेड़ फर्जी होने का मेसेज भी डाला। इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी का कहना है कि उन्होंने दरोगा के मेसेज पर आपत्ति जताते हुए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया था।
इंस्पेक्टर का कहना है कि चौकी पर तैनाती के दौरान दरोगा लोकेंद्र कुमार ने गोतस्करों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। हिंदू युवा वाहिनी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने लोकेंद्र कुमार के खिलाफ नारेबाजी भी की थी। उनके आश्वासन पर मामला शांत हुआ। इंस्पेक्टर का कहना है कि लोकेंद्र कुमार ने उन्हें व्हॉट्सएप पर मेसेज भेजकर उत्पीड़न का आरोप लगाया था। कहा था कि उनसे कोई भी पुलिसकर्मी खुश नहीं है। इस पर उन्होंने दरोगा की रिपोर्ट भेजी थी, जिसके आधार पर उसका तबादला भोजपुर थाने हो गया था। जिसके चलते दरोगा उनसे रंजिश रखता है। भोजपुर जाने के बाद भी दरोगा चौकी के व्हॉट्सएप ग्रुप में जुड़ा हुआ था। मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए उसने ग्रुप पर मेसेज डाला। इंस्पेक्टर का कहना है कि तस्करा लीक होने मामले में दरोगा लोकेंद्र कुमार की जांच भी होनी चाहिए।
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इंस्पेक्टर लगातार मेरे संपर्क में हैं, नहीं दे सकते ऐसा बयान
एसएसपी पर लगाए आरोपों को राजनीतिक बताने के इंस्पेक्टर के बयान पर विधायक का कहना है कि इंस्पेक्टर ऐसा बयान नहीं दे सकते। वह लगातार उनके संपर्क में हैं। इंस्पेक्टर ने उनसे मदद मांगी थी। निलंबन के बाद इंस्पेक्टर ने उन्हें अपनी व्यथा सुनाई थी। इंस्पेक्टर क्या कह रहे हैं और क्या नहीं, इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है। वह गोतस्करों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। यह लड़ाई जारी रहेगी।
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एसएसपी ने खुद को बचाने के लिए निलंबित किया इंस्पेक्टर : विधायक
- एसएसपी व एसपी देहात पर इंस्पेक्टर को बुलाकर गोकशी में भाजपा से जुड़े लोगों के नाम लेने का दबाव डालने का लगाया आरोप
गाजियाबाद। अनुशासनहीनता के आरोप में इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी के निलंबन के बाद लोनी से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने फिर से पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोला है। एसएसपी को भेजे पत्र में विधायक ने उन्हें इंस्पेक्टर के निलंबन पर बधाई दी है। लिखा है कि उन्होंने खुद को बचाने के लिए इंस्पेक्टर को निलंबित किया है। विधायक के पत्र के मुताबिक इंस्पेक्टर ने उन्हें बच्चों की कसम खाकर रोते हुए बताया था कि एसएसपी व एसपी ग्रामीण ने उन्हें बुलाया था। दोनों अफसरों ने गोकशी में भाजपा व हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों के नाम लेने का दबाव डाला था। इंकार करने पर एसपी ग्रामीण ने इंस्पेक्टर को नौकरी खाने की धमकी दी थी।
एसएसपी से पूछे पांच सवाल
- गोतस्करों के सरगना सलीम पहलवान का नाम केस में शामिल न करने का दबाव इंस्पेक्टर पर क्यों बनाया गया। बात न मानने पर पहले तबादला और फिर निलंबन क्यों किया गया?
- तस्करा लीक होने और जिले में बढ़की गोकशी के लिए खुद को जिम्मेदार मानकर अपने खिलाफ कार्रवाई के लिए तस्करा दर्ज कराएंगे। यदि नहीं तो आपको गोतस्करों का संरक्षक क्यों न माना जाए?
- क्या इंस्पेक्टर के लिए न्याय की बात करने और गोतस्करों पर कार्रवाई की मांग करने के लिए वह उनसे व्यक्तिगत रंजिश रखते हैं। या किसी बड़े गोतस्कर का उन पर दबाव है। आपके कृत्य से यूपी पुलिस की साख नहीं गिरी है क्या?
- आपके व एसपी ग्रामीण के द्वारा हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों का नाम जोड़ने का दबाव किसके कहने पर डाला गया।
- आपको व एसपी ग्रामीण को मुठभेड़ की सूचना न देने पर इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई हुई। मौत के मुंह में खड़े इंस्पेक्टर द्वारा मुठभेड़ की जानकारी न देने पर आप दोनों अधिकारियों को टीवी पर आने का मौका नहीं मिला। इसका मतलब दोनों अधिकारियों ने अब तक फर्जी मुठभेड़ की हैं?
- सराहनीय कार्य करने वाले इंस्पेक्टर का सम्मान देख आपने ईर्ष्याभाव से इंस्पेक्टर पर कार्रवाई कर दी। क्या गोतस्करों के दबाव में यह कार्रवाई नहीं की गई है?
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मुठभेड़ करने वाले पुलिसकर्मियों पर एफआईआर की मांग
लोनी। मानवाधिकार संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष एस शबाना ने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजा है। उनका कहना है कि सात लोगों के पैर में एक ही जगह गोली मारकर उनका जीवन बर्बाद कर दिया गया। एक नाबालिग को बालिग दर्शाकर उसे भी गोली मार दी गई। पूरे प्रकरण के बाद एसएसपी ने इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी को निलंबित किया है। मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों पर हत्या की कोशिश का केस दर्ज होना चाहिए। ताकि भविष्य में कोई पुलिसकर्मी किसी का जीवन बर्बाद न कर सके।
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अनुशासनहीनता पर राहत नहीं
कोट......
पुलिस की नौकरी अनुशासन की नौकरी है। इसमें कोई शर्त या कंडीशन नहीं है कि इंस्पेक्टर सिर्फ मेरे बुलाने पर आएंगे और अपने तात्कालिक अधिकारी या एसपी ग्रामीण के बुलावे पर नहीं जाएंगे। इस तरह की अनुशासनहीनता कोई भी करेगा, सरकार उस पर कार्रवाई करेगी। चाहे मैं ही क्यों न होऊं। अनुशासनहीनता पर इंस्पेक्टर को कोई राहत दी जाए, मैं इस पक्ष में पर नहीं हूं। दरोगा द्वारा मुठभेड़ को फर्जी बताना और इंस्पेक्टर द्वारा दरोगा लगाए गए आरोप जांच का विषय है। विधायक का पत्र अभी नहीं मिला है। वह जनप्रतिनिधि हैं। उनके हर सवाल का जवाब दिया जाएगा।
- पवन कुमार, एसएसपी
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