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रेड जोन में आने के बाद बढ़ गए एलर्जी और सांस के मरीज

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रेड जोन में आने के बाद बढ़ गए एलर्जी और सांस के मरीज
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गाजियाबाद। रेड जोन में शामिल गाजियाबाद में स्वस्थ लोगों का भी दम फूलने लगा है। प्रदूषण के कारण गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में अनिद्रा, गले में दर्द, खराश, रक्त वाहिनी सिकुड़ने से हार्ट अटैक, किडनी और सांस की परेशानी हो रही है। लगातार प्रदूषण के कारण अब मरीजों को दवाई की दोगुनी डोज देनी पड़ रही है। पिछले पांच दिन में सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी में 49695 मरीज पहुंचे हैं। इनमें 4263 मरीजों को सांस लेने में परेशानी हो रही थी।
182 सांस रोगी अस्पतालों में भर्ती
जिले में संचालित चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, एमएमजी और संयुक्त अस्पताल के अलावा प्राइवेट में छह चेस्ट फिजिशयन और 158 फिजिशियन के पास इलाज के लिए आने वाले सांस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पांच दिन में जिले में 49695 मरीज इलाज कराने पहुंचे। इसमें से 4263 सांस के मरीज थे। इन मरीजों में 1362 मरीजों ने सीने का एक्स-रे कराया, जिसमें 746 के फेफड़े में इंफेक्शन पाया गया। 182 मरीजों को भर्ती कराया गया। इस समय अलग-अलग अस्पतालों में 59 मरीज भर्ती हैं, इनमें से 12 को ऑक्सीजन लगाने की जरूरत पड़ी। डासना जेल के बंदी सहित पांच मरीजों को आक्सीजन दी जा रही है।
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बच्चों को रात में अधिक दिक्कत
अस्पताल में प्रतिदिन 200 से 250 बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें 70 फीसदी बच्चों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। उन्हें नेबुलाइजर लगाने के साथ ही दवाई भी दी जा रही है। बच्चे दिन में खेलते रहते हैं, इससे मां-बाप को पूरी जानकारी नहीं मिल पाती, लेकिन सोने के बाद सांस लेने में परेशानी होती है।
डॉ. शालिनी तिवारी, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ
सबसे अधिक परेशानी दमा रोगी को
इस समय सबसे अधिक उन मरीजों को परेशानी हो रही है जो पहले से अस्थमा, सांस और हृदय के मरीज हैं, उन्हें खांसी अधिक आ रही है। इन मरीजों को अब दवाई की डोज दोगुनी करनी पड़ रही है। इसके बावजूद दिक्कत दूर नहीं हो रही है।
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डॉ. संतराम, वरिष्ठ फिजिशियन एमएमजी अस्पताल
मरीजों में सांस फूलने की दिक्कत
मेरी ओपीडी में आने वाले 70 फीसदी मरीजों में सांस फूलने की परेशानी हो रही है। प्रदूषण बढ़ने से बेचैनी, उल्टी, आंखों में जलन, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, ब्लड प्रेशर, किडनी में दर्द और अनिद्रा की परेशानी हो रही है। ऐसे मौसम में नियमित योग और खानपान में सावधानी बरतनी जरूरी है।
डॉ. आरके गर्ग, आईएमए अध्यक्ष एवं वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन
जिले की चार सीएचसी, संयुक्त और एमएमजी अस्पताल के अलावा छह प्राइवेट चेस्ट फिजिशियन और 158 फिजिशियन की ओपीडी पर एक सप्ताह की ओपीडी और प्रदूषण का स्तर।
तिथि - सरकारी प्राइवेट सांस के मरीज चेस्ट एक्स-रे प्रदूषण का स्तर
10 2812 8165 743 332 428
11 2667 7200 973 232 461
12 2407 6907 956 245 486
13 2484 7198 979 256 441
15 2317 7931 612 317 331
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