12 करोड़ की घास से रोकेंगे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की मिट्टी का कटान
गाजियाबाद। बारिश के दौरान दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की मिट्टी का कटान अब नहीं होगा। इसे रोकने के लिए एक्सप्रेसवे (चौथे चरण) का निर्माण करने वाली निर्माण एजेंसी सड़क के दोनों ओर मिट्टी पर वेटिवर (खस) घास और कट स्टोन लगाएगी। मिट्टी और सड़क धंसने से रोकने के लिए यह फर्म करीब 12 करोड़ रुपये खर्च करेगी। फर्म ने डासना से मेरठ के बीच यह विशेष घास लगाने का काम शुरू कर दिया है।
बरसात के सीजन में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा मिट्टी कटान डासना से मेरठ के बीच 32 किलोमीटर के हिस्से पर हुआ था। ‘अमर उजाला’ ने पड़ताल कर इस समाचार को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। महज 14 किलोमीटर के हिस्से में 35 जगह से सड़क धंसी मिली थी। इसके बाद एनएचएआई ने कंस्ट्रक्शन फर्म पर सख्ती की। अब मिट्टी कटान को रोकने की कवायद शुरू की गई है। कंस्ट्रक्शन फर्म की ओर से अब डासना से मेरठ तक 32 किलोमीटर एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर मिट्टी का कंप्रेशन (मशीनों के जरिए दबाने) का काम किया जा रहा है। अधिकांश हिस्से पर कंप्रेशन के बाद एक्सप्रेसवे के साइडों में मिट्टी के ढलान पर एक खास तरह की जाली (नेट) बिछाई जा रही है। इस जाली के बीच में घास लगानी शुरू कर दी गई है। करीब एक माह में यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
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घास की खासियत
वनस्पति विज्ञान की प्रोफेसर डॉ. रचना गौड़ मुरारी का कहना है कि वेटिवर घास की जड़े मिट्टी में 3 मीटर तक गहरी चली जाती हैं। इससे इनकी मिट्टी पर पकड़ ज्यादा हो जाती है और बारिश का पानी ज्यादा आने पर भी मिट्टी का कटान नहीं होता है। आम घास के मुकाबले इसमें पानी सोखने की क्षमता करीब सात गुना ज्यादा होती है। इस घास के लगे होने पर पानी का तेज बहाव भी मिट्टी को न तो कमजोर कर पाता है और न ही काट पाता है। यह घास मिट्टी को भुरभुरा होने से बचाती है। आमतौर पर इस घास को ऐसी जगहों पर लगाया जाता है जहां ज्यादा पानी आने की संभावना रहती है।
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घास और कट स्टोन लगाएंगे
ज्यादा बारिश होने की वजह से एक्सप्रेसवे के किनारों से मिट्टी का कटान होने के मामले सामने आए थे। इन्हें रिपेयर करा लिया गया है। अब दोबारा मिट्टी का कटान न हो इसके लिए एक्सप्रेसवे के दोनों ओर खास तरह की घास लगाई जा रही है। पानी से मिट्टी को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए कट स्टोन भी लगाए गए हैं। ड्रेन की संख्या बढ़ा दी गई है। - अरविंद कुमार, परियोजना निदेशक, एनएचएआई