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जंबो पैके के लिए तीमारदार सुबह से शाम तक दौड़ रहे

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जंबो पैक के लिए तीमारदार सुबह से शाम तक दौड़ रहे
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गाजियाबाद। डेंगू के मरीजों के लिए जंबो पैक लेने को तीमारदार सुबह से शाम तक दौड़ लगा रहे हैं। सात से आठ घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। ब्लड बैंकों में जंबो पैक की कमी है। डेंगू की चपेट में आने वाले हर पांचवें मरीज को रक्तस्राव की परेशानी हो रही है।
20 दिन में मिले 292 मरीज
डिस्ट्रिक्ट पब्लिक हेल्थ लैब (डीपीएचएल) में इस साल अब तक 2242 संदिग्धों की जांच की गई है। उनमें से 683 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें 292 मरीज सिर्फ अक्तूबर के 20 दिनों में मिले हैं। इस समय 70 मरीज सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हैं। बुधवार को 19 मरीज मिले हैं। अब तक 392 स्वस्थ हो चुके हैं।
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सात से आठ घंटे इंतजार
जंबो पैक की प्लेट्लेट्स मिलने में सात से आठ घंटे लग रहे हैं। अगर डॉक्टर किसी डेंगू संक्रमित को प्लेट्लेट्स चढ़ाने के लिए लिखते हैं तो मरीज के ब्लड ग्रुप से मिलने वाले रक्तदाता की तलाश शुरू होती है। रक्तदाता मिलने के बाद ब्लड बैंक में पहुंचने के बाद सात से 8 घंटे लग जाते हैं।
ब्लड ग्रुप मिलने पर माइनर ग्रुप का मिलान जरूरी
लाइफ लाइन ब्लड बैंक के पैथोलॉजिस्ट डॉ. हीरालाल शर्मा का कहना है कि ब्लड ग्रुप का मिलान होने के बावजूद डोनर और मरीज का माइनर ग्रुप यानी रक्त में मौजूद तत्व एम, एन, एस, केल, डफी, डियागो, एंटीजन सहित अन्य चीजों का मिलान किया जाता है। सबसे अधिक जरूरी होता है मेजर ग्रुप एबी, ओ और आरएच फैक्टर का मिलान जरूरी होता है, क्योंकि इनमें रिएक्शन जल्दी होता है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में डेढ़ से दो घंटे लग जाते हैं। इसके बाद एफ्रेसिस (प्लेटलेट्स) निकालने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है।
दूसरे दिन मिला था जंबो पैक
मेरे पिता जी को डेंगू हुआ था। वह डायबिटीज के मरीज हैं। उन्हें ब्लीडिंग होने लगी। प्रताप विहार की एक अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टर ने बताया कि जंबो पैक चढ़ाना पड़ेगा। पहले एबी निगेटिव ब्लड ग्रुप मिलने में परेशानी हुई। दूसरे दिन दो डोनर मिले तो एक को बता दिया नस नहीं मिल रही है। दूसरे के खून से जंबो पैक बनाकर दिया, लेकिन व्यवस्था करने से प्लेट्लेट्स मिलने में दो दिन लग गए।
- राकेश कुमार, विजयनगर
इंतजार में पूरा दिन बीता
मेरे दोस्त को डेंगू हुआ। उसके मसूड़े से खून आने लगा तो डॉक्टर ने कहा कि जंबो पैक चढ़ाना पड़ेगा। ए पॉजिटिव वाला डोनर लेकर ब्लड बैंक से ले आओ। खून देने को कई लोग तैयार थे, लेकिन प्लेट्लेट़्स देने से इंकार कर देते थे। एक परिचित ने प्लेट्लेट्स दी, लेकिन ब्लड बैंक में सुबह आठ बजे गया था। इंतजार और जांच कराने में पूरा दिन बीत गया। रात में नौ बजे प्लेट्लेट्स चढ़ाई गई।
विजय बहादुर, शताब्दीपुरम
वायरस के कारण खून की नलिकाएं फटने से होती है परेशानी
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अरविंद डोगरा का कहना है कि डेंगू की चपेट में आने पर प्लेट्लेट्स कम होना सामान्य बात है। अगर 20 हजार पर पहुंच जाए तब भी प्लेट्लेटस चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती है। सिर्फ तरल पदार्थ और जल्दी पचने वाली चीजें देनी चाहिए। अगर आंतरिक रक्तस्राव (पेट में) होने पर खतरनाक होता है। इसके अलावा मसूड़े और नाक से भी रक्तस्राव हो रहा हो और प्लेट्लेट्स 25 हजार तक हो तब भी प्लेट्लेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
संतुलित डॉयट और फल से हो जाती है प्लेट्लेटस की पूर्ति
एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि डेंगू की चपेट में आने पर अधिक दवाई की जरूरत नहीं होती है, न किसी अतिरिक्त खुराक की। डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि संतुलित डायट और मौसमी फल लेना पर्याप्त है।
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पपीते के पत्ते, बकरी के दूध का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं
राजकीय आयुर्वेद अस्पताल के डॉ. कुलदीप का कहना है कि पपीते की पत्ती, गिलोय और बकरी के दूध से प्लेट़्लेट्स बढ़ने का कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है। लोग एक दूसरे से सुनकर प्रयोग करने लगते हैं, कुछ लोगों की पाचन क्षमता बेहतर होती है, तो कुछ मरीजों को नुकसान करता है। इसलिए बीमार होने पर अनावश्यक प्रयोग नहीं करना चाहिए।
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अब तक कुल संक्रमित- 683
पुरुष- 384
महिलाएं - 299
अस्पताल में भर्ती -70
सरकारी अस्पताल - 25
प्राइवेट - 45
स्वस्थ हो चुके - 392
अक्तूबर में मिल चुके - 292
उम्र- संक्रमित मरीज
0-10 = 89
11-20=127
21-30=168
31-40=130
41-50=81
51-60=50
60+ =44
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