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विधायक के हत्यारोपी भाई को एक साल में भी नहीं पकड़ सकी पुलिस

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विधायक के हत्यारोपी भाई को एक साल में भी नहीं पकड़ सकी पुलिस
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गाजियाबाद। नरेश त्यागी हत्याकांड के साजिशकर्ता व भाजपा विधायक के भाई गिरीश पाल त्यागी को पुलिस साढ़े 13 महीने बाद भी गिरफ्तार नहीं कर सकी है। पुलिस इस कदर मेहरबान रही कि कुर्की करना तो दूर, गिरीश पाल त्यागी पर इनाम तक घोषित नहीं किया। इस सबके बाद पुलिस पर अब केस में कमजोर पैरवी करने का आरोप भी लग गया है। पीड़ित परिवार के मुताबिक पुलिस की लचर पैरवी के चलते ही हत्या के दूसरे साजिशकर्ता जितेंद्र त्यागी को जमानत मिल गई।
पुलिस ने खुद खुलासा कर पीछे खींच लिए हाथ
पिछले साल 9 सितंबर को लोहिया नहर में मॉर्निंग वॉक के दौरान भाजपा विधायक अजीत पाल त्यागी के मामा नरेश त्यागी की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी। नवंबर 2020 में पुलिस ने खुलासा किया कि विधायक के भाई गिरीश पाल त्यागी ने ही भाड़े के शूटर्स से मामा की हत्या कराई थी। जितेंद्र त्यागी ने शूटर मुहैया कराए थे। पुलिस ने सद्दीक नगर निवासी जितेंद्र त्यागी और मनोज कुमार के अलावा डिफेंस कॉलोनी मोदीनगर निवासी अर्पण चौधरी तथा सोंदा रोड मोदीनगर निवासी विपिन शर्मा को गिरफ्तार किया था। जबकि लोहियानगर निवासी गिरीश पाल त्यागी घटना के बाद से ही फरार चल रहा है। पुलिस ने खुद ही ब्लाइंड मर्डर का खुलासा कर गिरीश पाल त्यागी को आरोपी बनाया और बाद में खुद ही गिरीश पाल की गिरफ्तारी को लेकर हाथ खींच लिए।
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पुलिस ने कार्रवाई की लेटलतीफी
- 20 नवंबर 2020 को पुलिस ने हत्या का खुलासा कर गिरीश पाल त्यागी को आरोपी बनाया। उसे गिरफ्तार करने के लिए तुरंत गैर जमानती वारंट लेने की बजाय एक सप्ताह बाद एनबीडब्ल्यू जारी कराए।
- 27 नवंबर 2020 को एनबीडब्ल्यू जारी होने के बाद पुलिस को कुर्की की कार्रवाई शुरू कर देनी चाहिए थी, लेकिन करीब चार माह बाद कुर्की की अधिसूचना का नोटिस कोर्ट से प्राप्त किया।
- 18 मार्च को धारा 82 के तहत कुर्की का नोटिस लेने के बाद एक महीने के अंदर कुर्की की अर्जी लगा देनी चाहिए थी, लेकिन सात महीने बाद र्जी लगाई।
कुर्की का नोटिस तामील कराने में खेल का आरोप
नरेश त्यागी हत्याकांड में पीड़ित पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनोज नागवंशी ने बताया कि 82 के तहत कुर्की का नोटिस तामील कराने में पुलिस ने खेल किया है। अखबार में इश्तेहार देकर, घर पर नोटिस चस्पा कर या फिर मुनादी कराकर 82 का नोटिस तामील कराया जाता है। 18 मार्च को प्राप्त नोटिस सिहानी गेट पुलिस ने 5 सितंबर को तामील दिखाया है, लेकिन तामील कैसे कराया गया, इसका जवाब नहीं दिया।
पुलिस का पक्षपात बताने को काफी है यह कार्रवाई
- 2 जनवरी को मुरादनगर में श्मशान घाट हादसे में 25 लोगों की मौत हुई। इसमें फरार ठेकेदार अजय त्यागी पर पुलिस ने तीसरे ही दिन 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया था।
- नवंबर 2020 में पिलखुवा निवासी राशिद की मसूरी में हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने हत्या में फरार आरोपी जगवीर निवासी कविनगर पर दो महीने बाद ही 5 हजार का इनाम घोषित कर दिया।
- जून 2021 में कविनगर पुलिस ने लालकुआं में दो घरों में चोरी के फरार आरोपी व 20 हजार के इनामी मेरठ निवासी आकाश को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दो महीने में ही आकाश को इनामी बना दिया।
- सितंबर 2019 में लिंक रोड थाने की तत्कालीन एसएचओ लक्ष्मी चौहान समेत सात पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार का केस दर्ज हुआ था। फरार होने के कारण डेढ़ महीने बाद ही पुलिस ने सभी पर 25-25 हजार का इनाम घोषित कर दिया था।
फिर हाईकोर्ट पहुंचा गिरीश, मांगी दो माह की मोहलत
- निचली अदालत में सरेंडर करने या जमानत लेने के लिए गिरफ्तारी पर रोक लगाने की लगाई अर्जी
- पता लगने पर बुधवार को पीड़ित पक्ष ने भी हाईकोर्ट में खड़ा किया वकील, मोहलत का करेंगे विरोध
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। 13 महीने से भी अधिक समय से पुलिस से आंख-मिचौली कर रहा गिरीश पाल त्यागी एक बार फिर हाईकोर्ट जा पहुंचा। उसने निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने या जमानत लेने के लिए दो माह तक गिरफ्तारी पर रोक लगाने की गुहार लगाई है। मंगलवार रात गिरीश द्वारा हाईकोर्ट पहुंचने का पता लगने पर बुधवार को पीड़ित पक्ष ने भी अपना वकील खड़ा कर दिया। नरेश त्यागी के बेटे अभिषेक त्यागी का कहना है कि वह गिरीश पाल त्यागी को किसी भी तरह की मोहलत मिलने का विरोध करेंगे।
नरेश त्यागी हत्याकांड में पुलिस द्वारा आरोपी बनाने के बाद गिरीश पाल त्यागी हाईकोर्ट गया था। वहां कोर्ट ने राहत न देते हुए उसे 60 दिन के सक्षम न्यायालय के समक्ष 60 दिन में सरेंडर करने के आदेश दिए थे। समय बीतने के बाद गिरीश पाल त्यागी फिर से कोर्ट पहुंचा और सरेंडर करने के लिए मोहलत मांगी। इस पर कोर्ट ने अवधि तीन सप्ताह और बढ़ा दी थी। इसके बावजूद गिरीश पाल त्यागी ने सरेंडर नहीं किया। नरेश त्यागी के बेटे अभिषेक त्यागी ने मंगलवार को प्रेस वार्ता कर पुलिस पर सवालिया निशान लगाए थे। इसी कड़ी में मंगलवार रात नरेश त्यागी के परिजनों को पता चला कि गिरीश पाल त्यागी ने हाईकोर्ट में फिर से पिटीशल दायर की है।
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मेरा कोई रोल नहीं, बीमारी के चलते नहीं कर सका सरेंडर
हाईकोर्ट में डाली पिटीशन में गिरीश पाल त्यागी की तरफ से कहा गया है कि वह डिस्क स्लिप की बीमारी के चलते उसे डॉक्टरों ने पूरी तरह बेड रेस्ट के लिए बोला हुआ है। वहीं, कोराना काल में कोर्ट बंद होने के कारण वह सरेंडर नहीं कर सका। हत्या में उसका कोई रोल नहीं है। गिरीश त्यागी ने गुहार लगाई है कि निचली अदालत में सरेंडर करने या जमानत लेने के लिए उनकी गिरफ्तारी पर दो माह तक रोक लगाई जाए।
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