इमरजेंसी फुल, ओपीडी बंद, बेंच पर मरीज
गाजियाबाद। दो अक्तूबर को सार्वजनिक अवकाश होने से सरकारी अस्पताल भी बंद रहे। इससे अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को घंटो परेशान होना पड़ा। एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में वायरल, दुर्घटना में घायल व गंभीर मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। इमरजेंसी वार्ड में बेड खाली नहीं होने पर डॉक्टरों ने भर्ती नहीं किया। बेड नहीं मिलने पर मरीजों को घंटों फर्श पर लेटना पड़ा।
गंभीर रूप से बीमार बेटे को जब मौके पर इलाज नहीं मिला तो मां फफक कर रो पड़ी।
केस-1
12. 30 बजे
पीलिया से ग्रसित बेटे को भर्ती कराने के लिए गिड़गिड़ाई मां
साहिबाबाद निवासी रमा देवी पीलिया से ग्रस्त बीमार बेटे भूपेंद्र (35) को लेकर अस्पताल पहुंची थी। पिछले कई महीने से वह बीमार चल रहा है। पांच दिन पहले खून की जांच कराई तो हीमोग्लोबिन 4.8 ग्राम होने के साथ ही पीलिया भी बढ़ा हुआ आया। जांच रिपोर्ट दिखाया तो स्टाफ ने बताया कि मरीज को खून चढ़ाने की जरूरत है। वह रोनी लगी कि खून की व्यवस्था कहां से करूं। स्टॉफ ने बिना खून के भर्ती करने से इनकार कर दिया।
1.15 बजे
केस - 2
एक ही बेड पर दो बच्चे भर्ती
इमरजेंसी में बेड की कमी होने से एक ही बेड पर दो बच्चे नक्स तीन साल व अरणव पांच साल भर्ती थे। दोनों बच्चों को उल्टी-दस्त की शिकायत है। डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि दोनों बच्चे गंभीर डायरिया से पीड़ित हैं। दोनों को स्वस्थ होने में पांच से सात दिन लगेगा, जबकि उल्टी- दस्त में आराम हो चुका है।
केस-3
1.30 बजे
बुखार की दवा मिली पर बेड नहीं मिला, गोद में लेकर बैठी रही मां
नंद्रग्राम निवासी शबाना खातून बुखार से तप रहे बेटे सरफराज (14) को लेकर जिला एमएमजी अस्पताल पहुंचीं। शुक्रवार रात से उसे तेज बुखार चढ़ रहा है। अस्पताल की इमरजेंसी में बेड नहीं मिलने पर वह बेचैन हो गई। बेड नहीं मिलने पर वह सुबह नौ बजे से दोपहर 1.30 बजे तक अपनी गोद में लेकर इमरजेसी में सीमेंट की बेंच पर बैठी रही। बार- बार बेड दिलाने की बात मिन्नत करती रही।
केस - 4
लावारिस बुजुर्ग स्ट्रेचर पर 45 मिनट तक पड़ा रहा
दोपहर एक बजे एक बुजुर्ग को तुराबनगर से कुछ लोग ऑटो से लेकर एमएमजी आए और इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर पर लिटा दिया। बुजुर्ग के दोनों पैर में घाव होने से पॉलिथिन से पंजे को बांध रखा था। पहले स्टॉफ बुजुर्ग को भर्ती कराने का कुछ लोगों ने प्रयास किया, लेकिन इमरजेंसी में भीड़ अधिक होने और इमजरेंसी में बेड न होने से स्ट्रेचर को खींचकर किनारे कर दिया और बुजुर्ग उसी पर पड़े रहे।
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