इकलौते बेटे की खातिर लीलू ने खत्म की दो भाइयों की औलाद
गाजियाबाद। भाई, दो भतीजे और दो भतीजियों की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए 48 वर्षीय लीलू त्यागी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने यह गुनाह अपने इकलौते बेटे की खातिर किया। वह चाहता था कि संपत्ति का बंटवारा न हो, पूरी उसके बेटे को मिले। भाई ब्रिजेश के दो बेटे थे और सुधीर की दो बेटियां। चारों बच्चों की हत्या कर दी थी। इनसे पहले सुधीर की जान ली। अब ब्रिजेश भी निशाने पर था। इसकी साजिश तैयार कर चुका था। अगर इसमें कामयाब हो जाता तो संपत्ति का कोई और हिस्सेदार नहीं बचता।
लीलू से पूछताछ के हवाले से पुलिस ने बताया कि लीलू वह दो भाइयों की जमीन हड़पना चाहता था। उसने 20 साल पहले पूरी साजिश तैयार की थी। बड़ी भाई की हत्या के बाद उसकी पत्नी को अपने साथ रखना भी इसी साजिश का हिस्सा था, क्योंकि उसकी शादी नहीं हुई थी। भाई की पत्नी से जब उसे बेटा पैदा हो गया तो उसने सोच लिया कि इकलौते बेटे को पूरी संपत्ति दिलाएगा। पूछताछ में लीलू ने पुलिस को बताया कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। बल्कि हर हत्या के बाद वह मन ही मन खुश होता था। उसने बताया कि एक परिजन को मारने के बाद उसे अपनी संपत्ति बढ़ने का अहसास होता था। लीलू के मुंह से यह बात सुनकर पुलिस भी चौंक गई।
साजिश ऐसी कि परिजन भी खा गए गच्चा
- कॉल रिकॉर्डिंग न मिलती तो दफन हो जाता पांच हत्याओं का राज
- 20 साल से एक-एक कर परिजनों के मौत घाट उतारता जा रहा लीलू
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। संपत्ति के लिए लीलू ने ऐसी साजिश रची कि परिजन भी गच्चा खा गए। लीलू एक के बाद एक परिवार के लोगों को मौत के घाट उतारता रहा और ऐसी दलीलें दीं कि परिजनों को थाने तक नहीं जाने दिया। लेकिन पांचवीं हत्या में की गई थोड़ी सी चूक ने उसकी करतूत उजागर कर दी।
8 अगस्त को रेशू के लापता होने के बाद लीलू उसके पिता ब्रिजेश के साथ उसकी खोजबीन का नाटक करता रहा। उसने रेशू पर भी आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए कहीं चले जाने का हवाला देते हुए मामले को पुलिस में न ले जाने की दलील दी। परिजन उसकी बातों में आ गए थे, लेकिन दूसरे व आखिरी बेटे के लापता होने से आहत ब्रिजेश त्यागी ने आखिरकार 15 अगस्त को मुरादनगर थाने में गुमशुदगी दर्ज करा दी। पुलिस ने खूब हाथ-पांव पीटे, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। बुधवार तक पुलिस के पास सिर्फ लीलू और उसके मृतक भतीजे की एक ही स्थान पर लोकेशन के अलावा कोई दूसरा क्लू नहीं था। साक्ष्य न होने के चलते पुलिस भी हत्या का एंगल छोड़ने वाली ही थी कि एक कॉल रिकॉर्डिंग ने लीलू की साजिश बेनकाब कर दी। खुद पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अगर यह दोनों सुबूत न मिलते तो पांच हत्याओं राज हमेशा के लिए दफन हो जाता।
पहले नहीं देखी एसी साजिश : एसएसपी
लीलू द्वारा पांच परिजनों की हत्या कबूलने के बाद खुद पुलिस अधिकारी भी हैरान हैं। एसएसपी पवन कुमार का कहना है कि कत्ल की तमाम घटनाओं के खुलासे उन्होंने देखे हैं, लेकिन बीस साल में योजनाबद्ध तरीके से पांच परिजनों की हत्या और पुलिस में सूचना तक न जाने का मामला पहली बार देखा है। इस तरह की साजिश पेशेवर अपराधी भी नहीं कर पाते। लीलू ने न सिर्फ पांच हत्याएं कीं, बल्कि परिजनों को भी साधकर रखा।
दो बच्चे खोकर मां की हालत बिगड़ी
लीलू ने पहले ब्रिजेश के बेटे नीशू की हत्या की। इसके बाद रेशू की। दोनों बेटे खोकर ब्रिजेश की पत्नी अनीता की दिमागी हालत बिगड़ गई। उसे मानसिक अरोग्यशाला में भर्ती कराना पड़ा। अब ब्रिजेश अकेला रह गया था। वह सदमे में आ गया।
कार में हत्या, ट्यूबवेल पर बोरे में बांधा शव फिर नहर में फेंका
- छह महीने पहले बनी थी रेशू की हत्या की साजिश, लीलू ने फोन करके गांव के बाहर से कार में बैठाया
- हत्या के बाद भी लीलू और रिटायर्ड दरोगा ने हापुड़ के होटलों में की थी कई पार्टियां, पोल खुलती देख बंद कर दिया संपर्क
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। भाई, भतीजियों और छोटे भतीजे की हत्या के बाद लीलू की राह में इकलौता रोड़ा रेशू बचा हुआ था। संपत्ति के लालच में उसे भी मौत के घाट उतारने की योजना बनाई। इसके लिए करीब छह महीने पहले उसने हापुड़ के नंगौला निवासी अपने रिश्ते के बहनोई व रिटायर्ड दरोगा सुरेंद्र त्यागी से संपर्क किया। इसके बाद अन्य आरोपी घटना के षड्यंत्र में शामिल हुए। योजना के मुताबिक रेशू की हत्या की तारीख 8 अगस्त निर्धारित की गई। लीलू ने फोन करके रेशू को गांव के बाहर बुलाया और घूमने चलने की बात कहकर कार में बैठा लिया।
बुलंदशहर में तैनाती के दौरान सुरेंद्र की विक्त्रसंत से हुई थी मुलाकात
सुरेंद्र यूपी पुलिस का रिटायर्ड दरोगा है। बुलंदशहर में तैनाती के दौरान उसकी मुलाकात विक्त्रसंत से हुई। 4 लाख में रेशू की हत्या की सुपारी लेने के बाद सुरेंद्र ने डेढ़ लाख में विक्रांत को सुपारी दे दी। 8 अगस्त को विक्रांत ही अपनी आई-20 कार लेकर बसंतपुर सैंतली आया। कार में विक्त्रसंत के अलावा उसका भांजा मुकेश, सुरेंद्र और उसका नौकर राहुल तथा लीलू भी मौजूद था। लीलू ने फोन करके रेशू को गांव के बाहर बुलाया और साथ बैठा लिया।
चलती कार में हत्या, जंगल में शव डिग्गी में डाला
मुरादनगर थाना प्रभारी सतीश कुमार ने बताया कि योजना के मुताबिक विक्रांत, सुरेंद्र, राहुल और मुकेश ने चलती कार में रस्सी से गला घोंटकर रेशू की हत्या कर दी। कुछ देर तक वह उसे सीट पर मृत बैठाकर बुलंदशहर की तरफ चल पड़े। पकड़े जाने के डर से गाड़ी जंगल में ले जाकर शव डिग्गी में डाल लिया और बुलंदशहर पहुंच गए।
ट्यूबवेल पर शराब पी, शव बोरे में बांधा
विक्रांत सभी लोगों को बुलंदशहर में भांजे की ट्यूबवेल पर ले गया। वहां सभी लोगों ने शराब पी। अंधेरा होने पर उन्होंने रेशू के शव को डिग्गी से निकालकर बोरे में बंद किया। रात होने पर शव को पहासू क्षेत्र में ले जाकर गंगनहर में फेंक दिया। वहां से सभी लोग अपने-अपने रास्ते हो लिए।
लीलू और सुरेंद्र ने कई बार पार्टी की
रेशी की हत्या के बाद लीलू और सुरेंद्र ने हापुड़ के होटलों में कई बार पार्टी की थी। पुलिस के शक की सुईं लीलू की तरफ गई तो सुरेंद्र ने उससे संपर्क करना बंद कर दिया। वहीं, पुलिस ने लीलू की घेराबंदी तेज की तो हत्या में शामिल विक्रांत और उसका भांजा पुराने मामलों में जेल चले गए। संपत्ति केक लालच में लीलू ने उसे भी मार दिया। लीलू ने पुलिस को बताया कि उसका एक बेटा है। परिवार के सभी लोगों को मारकर वह अपने बेटे के लिए संपत्ति जुटाने का प्रयास कर रहा था। उसे पता था कि बृजेश स्वभाव से सीधा है और उसकी पत्नी पागल हो चुकी हैए ऐसे में रेशू को मारकर वह सारी संपत्ति का मालिक बन सकता है।