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हिंडन में हुआ अस्थि विसर्जन, बेटे की डिग्रियां देख बिलख रहे बद्री

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हिंडन में हुआ अस्थि विसर्जन, बेटे की डिग्रियां देख बिलख रहे बद्री
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गाजियाबाद। राकेश मार्ग पर बुधवार सुबह हुए हादसे में पांच लोगों की मौत के बाद कॉलोनी में मातम है। शवों का अंतिम संस्कार बुधवार देर शाम हिंडन श्मशान घाट पर किया गया। बृहस्पतिवार को एक बार फिर कॉलोनी में उस वक्त लोग फफक पड़े, जब पीड़ित परिजन इकट्ठा होकर अस्थि विसर्जन के लिए निकले। इस दौरान भी पीड़ित परिवारों में चीख-पुकार शुरू हो गई। बच्चियों को बचाने के चक्कर में हादसे का शिकार हुए लक्ष्मी नारायण के पिता बद्री नारायण बेटे की डिग्रियां देख-देखकर बिलखते रहे।
अभी तो सहारा बना था बेटा, अभी चला गया
लक्ष्मी नारायण के पिता का कहना है कि वह गाड़ी चलाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं। बड़े बेटे बद्री को बीबीए कराया, छोटा बेटा बीसीए कर रहा है और बेटी इंटर में पढ़ रही है। अपना पेट काटकर बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की कोशिश की। अब तक लक्ष्मी बेरोजगार था। कुछ ही महीनों से वह कंपनी में नौकरी करने लगा था। अब आकर महसूस हुआ था कि घर की आजीविका में बेटा सहारा बन गया है। लेकिन वह सहारा भी चला गया। उनका कहना है कि लक्ष्मी की पत्नी, डेढ़ साल की बेटी व 26 दिन के बेटे को देखकर रहा नहीं जाता।
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काश! बच्चों को गांव से लेकर न आता
हादसे में रायबरेली निवासी विनोद की 10 वर्षीय बेटी की भी मौत हुई है। विनोद का कहना है कि वह करीब 8 साल से गाजियाबाद में रह रहा है, लेकिन उसकी पत्नी व तीन बच्चे गांव में ही रहते थे। करीब तीन महीने पहले ही वह बच्चों को गाजियाबाद लेकर आया था। उनका कहना है कि काश वह बच्चों को लेकर नहीं आता तो बेटी जिंदा होती।
सुरभि के साथ रहती थी, उसी के साथ रुखसत हुई सिमरन
सिमरन और सुरभि के माता-पिता एक ही गांव के रहने वाले हैं। वहीं, सुरभि की मां जानकी उर्फ सीता सिमरन के पिता विनोद को गांव के नाते से देवर मानती थी। दोनों परिवार मिल-जुलकर रहते थे। इसके चलते सिमरन सुरभि को चाचा की लड़की मानकर उससे बेहद लगाव रखती थी। वह अधिकांश समय उसी के पास रहती थी। वह उसे लेकर ही दुकान से चीज खरीदने जा रही थी। एक साथ रहने वाली सुरभि और सिमरन एक साथ दुनिया से रुखसत हुईं।
यह हुआ था हादसा
राकेश मार्ग पर गली नंबर तीन के सामने बुधवार सुबह साढ़े 9 बजे रायबरेली निवासी विनोद की 11 वर्षीय बेटी सिमरन पड़ोसी राजकुमार की 4 वर्षीय बेटी सुरभि को गोद में लेकर पास की दुकान से चीज खरीदने गई थी। बारिश के बीच दुकान के बाहर टिन शेड का पाइप पकड़ते ही दोनों करंट चपेट में आ गईं। पास में ही घर के बाहर खड़ा बिहार निवासी लक्ष्मी नारायण (24) बचाने के लिए दौड़ा तो वह भी हादसे का शिकार हो गया। इसके बाद सुरभि की मां जानकी उर्फ सीता (35) तथा बिहार निवासी सब्जी विक्रेता अखिलेश प्रसाद की 10 वर्षीय बेटी खुशी भी हादसे का शिकार हो गई।
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काल बना तार 9 घंटे बाद हटा
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने बिजली कटवाकर करंट की चपेट में आए लोगों को अस्पताल पहुंचाया था, लेकिन सभी को मृत घोषित कर दिया गया। इसी बीच दादरी निवासी दुकानदार सुशील कुमार दुकान बंद करके मौके से फरार हो गया था। बिजली कटी होने के कारण पूरी कॉलोनी में विद्युत उपकरण ठप हो गए। विद्युत निगम के अधिकारियों ने बिजली काटकर औपचारिकता निभा दी, लेकिन काल बने तार को हटाने में जल्दबाजी नहीं दिखाई। कॉलोनी के लोगों ने बिजली चालू करने का दबाव बनाया, तब जाकर उन्हें दुकान के टिन शेड से गुजर रहे केबल को हटाने की याद आई। बुधवार शाम करीब साढ़े 6 बजे केबल हटाए गए।
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