कूड़ा निपटान का नहीं किया इंतजाम
सोसायटियों पर 16 से होगी कार्रवाई
गाजियाबाद। शहर में कूड़े का निस्तारण गंभीर समस्या बन चुका है। गीले और सूखे कूड़े के निस्तारण में लापरवाही करने पर छोटी-बड़ी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियाें, होटल, व्यावसायिक दुकानों और रेस्टोरेंट नगर निगम के निशाने पर हैं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली-2016 और जीडीए बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन कर कूड़ा निस्तारण प्लांट नहीं लगानी वाली सोसायटियों पर सोमवार 16 अगस्त से कार्रवाई की जाएगी। नगरायुक्त के निर्देश पर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने जांच और कार्रवाई के लिए दो प्रवर्तन टीमों का गठन किया है। प्रवर्तन अनुभाग की एक टीम ट्रांस हिंडन एरिया और दूसरी टीम पुराने शहर में निगरानी करेगी।
100 किलो से अधिक कूड़ा निकलने पर प्लांट लगाना अनिवार्य
नगर निगम के क्षेत्र में रोजाना 1100 से 1200 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। नियमानुसार 100 किलो से अधिक कूड़ा निकलने पर सोसायटी में कूड़ा प्रोसेसिंग प्लांट लगाना अनिवार्य है। साथ ही सूखा व गीला कूड़ा अलग करने और गीले कूड़े की प्रोसेसिंग कर कंपोस्ट खाद तैयार करने के निर्देश हैं। इसके बावजूद अधिकांश सोसायटियों, होटल व व्यावसायिक दुकानों की ओर से लापरवाही की जा रही है। अब निगम की प्रवर्तन टीम नियमित निगरानी रखने के साथ सबसे पहले कूड़ा प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए नोटिस जारी करेगी। फिर भी कार्रवाई नहीं करने पर सोसायटियों पर 10 हजार से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगा सकती हैं।
निगम की दो टीमें करेंगी निगरानी, लगाएंगी जुर्माना
नगर निगम के अनुसार महानगर में अब तक केवल 15 सोसायटियों ने कूड़ा निस्तारण के लिए प्रोसेसिंग प्लांट लगाया है। ऐसे में 510 सोसायटियों में कोई कूड़ा प्रोसेसिंग प्लांट नहीं है। न ही सोसायटियों में गीले व सूखे कूड़े को अलग किया जा रहा है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली-2016 के तहत पूर्व में भी सोसायटियों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए दो प्रवर्तन टीमों का गठन किया गया है।
कार्रवाई के साथ चलेगा जागरूकता अभियान
निगम अधिकारियों के मुताबिक, महानगर में निकलने वाले करीब 1200 मीट्रिक टन में 70 फीसदी गीला कूड़ा होता है। प्रोसेसिंग प्लांट नहीं लगे होने, जागरूकता के अभाव और लापरवाही के कारण सूखा व गीला कूड़ा एक ही जगह एकत्रित होने के कारण ज्यादा समस्या है। ऐसे में निगम की ओर से लोगों को अभियान चलाकर जागरूक भी किया जाएगा। निगम अधिकारियों की माने तो अगर सोसायटी और घरों के लेवल से ही गीले कूड़े का निस्तारण हो जाता है तो समस्या खत्म हो जाएगी।
100 सोसायटी कर रही पूर्णता प्रमाणपत्र के नियमों की अनदेखी
निगम के साथ सोसायटियां जीडीए के पूर्णता प्रमाणपत्र (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) में शामिल नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। करीब 100 सोसायटियों ने कूड़ा निस्तारण के लिए प्रोसेसिंग यूनिट की व्यवस्था नहीं की है। जीडीए ने पूर्व में बगैर कूड़ा प्रोसेसिंग प्लांट लगाए बिना पूर्णता प्रमाणपत्र जारी नहीं करने के आदेश जारी किए थे, जो कि अब तक लागू हैं।
सोसायटियों को फिर से जारी होंगे नोटिस
सोसायटियों, होटल, व्यावसायिक दुकानों, रेस्टोरेंट में कूड़ा निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था लागू करने के लिए दो टीमें बनाई हैं। टीमें कूड़ा प्रोसेसिंग प्लांट नहीं लगाने वाली सोसायटियों व अन्य को फिर से नोटिस जारी करेंगी। फिर निश्चित समयसीमा में प्रोसेसिंग प्लांट नहीं लगाने वाले व लापरवाही बरतने पर पांच लाख तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
- डॉ. मिथिलेश, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम