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पांच करोड़ फूंककर मिला अंधेरा, मेरठ रोड पर स्ट्रीट लाइटें खराब

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पांच करोड़ फूंककर मिला अंधेरा, दिल्ली-मेरठ रोड की स्ट्रीट लाइटें खराब
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गाजियाबाद। नगर निगम ने दिल्ली-मेरठ हाईवे पर पांच करोड़ रुपये खर्च कर स्ट्रीट लाइटें लगवाईं, लेकिन यह लाइटें एक साल भी न जल पाईं। नंदग्राम से लेकर दुहाई तक की अधिकांश लाइटें खराब हो गई हैं। बेहद व्यस्त रहने वाले इस मार्ग पर फिर से अंधेरा छा गया है। सरकारी फंड को खर्च करने के बाद भी अंधेरे में डूबे इस मार्ग से होने वाली परेशानियों पर पार्षदों ने भी विरोध जताया है। उन्होंने नगर निगम अधिकारियों की ओर से कांट्रेक्टर फर्म पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है।
दिल्ली-मेरठ हाईवे पर लगी पुरानी लाइटों को करीब दो साल पहले रैपिड रेल प्रोजेक्ट की वजह से हटा दिया गया था। इसके बाद सड़क चौड़ीकरण हुआ तो इसके दोनों तरफ स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए एनसीआरटीसी ने नगर निगम को 5 करोड़ का फंड दिया। नगर निगम ने मेरठ तिराहे से लेकर दुहाई तक लाइटें लगाने का ठेका छोड़ा। यह ठेका 9 फर्मों को टुकड़ों में दिया गया। काम की शुरूआत में ही लाइटों की गुणवत्ता पर पार्षदों ने सवाल खड़े किए थे, लेकिन विरोध को अनदेखा कर अधिकारियों ने लाइटें लगवा दीं। यह लाइटें एक साल भी न चल पाईं और अब अधिकांश लाइटें खराब हो चुकी हैं। इसकी वजह से दिल्ली-मेरठ मार्ग के करीब चार किलोमीटर के हिस्से में अंधेरा छा गया है।
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जनप्रतिनिधियों ने कराया फर्मों को भुगतान
दिल्ली-मेरठ मार्ग पर लगाई गईं स्ट्रीट लाइटें शुरूआती दौर से ही विवादों में आ गई थीं। इसके बाद नगर निगम के प्रकाश विभाग ने ठेकेदारों
का भुगतान रोक दिया था। ठेकेदारों की शिकायत पर कई जनप्रतिनिधियों ने इन ठेकेदारों के भुगतान किए जाने की सिफारिश निगम अधिकारियों
से की थी। इसके बाद ठेकेदारों को भुगतान भी कर दिया गया था।
लाइटों की गुणवत्ता घटिया : क्षेत्रीय पार्षद
मेरठ रोड, सिहानी क्षेत्र के पार्षद दीपक त्यागी का आरोप है कि दिल्ली-मेरठ मार्ग पर लगाई गईं स्ट्रीट लाइटों की गुणवत्ता खराब है। इसकी
शिकायत वह शुरूआत से कर रहे हैं। अब लाइटें खराब होने की वजह से इस मार्ग पर अंधेरा छा गया है। वार्ड के लोग इसकी शिकायत मुझसे कर रहे हैं।
नगर निगम अधिकारियों को इन स्ट्रीट लाइटों की गुणवत्ता की लैब में जांच करानी चाहिए और खराब लाइटों की आपूर्ति देने वाले ठेकेदारों की
फर्मों को ब्लैक लिस्ट करना चाहिए।
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परिचर्चा
मेरठ रोड पर बीते तीन साल से अंधेरा है। पहले पुरानी लाइटों को हटा दिए जाने की वजह से डेढ़ साल अंधेरा रहा और अब नई लाइटों के खराब हो जाने की वजह से अंधेरा पसरा हुआ है। सरकारी फंड का दुरुपयोग करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए। - सोहेब, स्थानीय निवासी
मुख्य मार्ग पर अंधेरा होने की वजह से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। दुपहिया वाहन चालकों को लाइटें न होने की वजह से गड्ढे नहीं दिखाई देते हैं। इसकी वजह से इस मार्ग पर आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। - धनंजय, स्थानीय निवासी
नगर निगम को अगर दिल्ली-मेरठ मार्ग पर अंधेरा ही रखना था तो फिर पांच करोड़ रुपये खर्च करने की क्या जरूरत थी। सरकारी पैसे को ठिकाने लगाने के लिए निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। - देवेश कुमार, स्थानीय निवासी
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अधिकारी बोले
मेरठ रोड पर स्ट्रीट लाइटें खराब होने पर ठेकेदारों का भुगतान रोक दिया गया था, फिर पार्षदों ने ही काम की गुणवत्ता सही बताकर भुगतान कराया। अब लाइटें खराब होने की जानकारी मिली है। इसकी जांच कराई जाएगी। खराब लाइटों को जल्द ही रिपेयर कराया जाएगा। - शिवपूजन यादव, अपर नगरायुक्त व प्रकाश विभाग के वरिष्ठ प्रभारी
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