संयुक्त अस्पताल में तीन महीने में नहीं हुआ एक भी ऑपरेशन
गाजियाबाद। संयुक्त अस्पताल में तीन महीने में एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ है। मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया जा रहा। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। उन्हें प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए मजबूर होना पड़ता है। हालांकि अस्पताल में ओपीडी शुरू हुई है।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए संयुक्त अस्पताल, एमएमजी अस्पताल और महिला अस्पताल में ऑपरेशन बंद हो गए थे। एमएमजी और महिला अस्पताल में ऑपरेशन और डिलिवरी हो रही थी। अब एमएमजी और महिला अस्पताल में ऑपरेशन शुरू हो चुके हैं, लेकिन संयुक्त अस्पताल में दो महीने में एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ है। यहां प्रतिदिन इलाज के लिए 500 से 700 मरीज इलाज के लिए आते हैं। ओपीडी में फिजिशियन, नाक-कान व गला, ऑर्थोपेडिक्स, डेंटल, आंख और महिला ओपीडी चल रही है। जिन मरीजों को भर्ती या ऑपरेशन कराने की जरूरत पड़ती है, उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। कुछ मजबूर होकर प्राइवेट अस्पताल पहुंचते हैं।
संयुक्त अस्पताल में सीएचसी से भी कम स्टाफ
संयुक्त अस्पताल में स्वीकृत पद 38 हैं, लेकिन अस्पताल में सिर्फ छह डाक्टर नियुक्त हैं। अस्पताल में सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, डर्मोटोलॉजिस्ट, चेस्ट फिजिशियन, आर्थो सर्जन तीन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और ईएमओ के छह पद रिक्त हैं। चिकित्साधिकारी का कहना है कि एमएमजी अस्पताल में चार सर्जन नियुक्त हैं, अगर एक सर्जन भी अस्पताल में नियुक्त हो जाएं तो आपरेशन शुरू हो जाए। वहीं महिला विभाग में भी छह के सापेक्ष सिर्फ दो डॉक्टर मौजूदा समय में काम कर रही हैं। एक डॉक्टर का पैर टूटने से वह मेडिकल अवकाश पर हैं, एक अन्य डॉक्टर को अटैच कर दिया गया है। दो पद रिक्त हैं। रात में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है।
अस्पताल के स्टाफ को नहीं मिला इलाज
संयुक्त अस्पताल में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी स्टाफ आकाश तीन दिन पहले कलक्ट्रेट के सामने सड़क दुर्घटना में घायल हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस घायल को इलाज के लिए संयुक्त अस्पताल ले गई। वहां मौजूद चीफ फार्मासिस्ट ने यह कहकर वापस कर दिया कि यहां पर इलाज व मरहम पट्टी की कोई व्यवस्था नहीं है, एमएमजी अस्पताल ले जाइए। पुलिस वालों ने घायल को एमएमजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां पर एक्स-रे जांच में पता चला कि बाएं पैर और कूल्हे में फ्रैक्चर हो गया है। अभी आकाश का एमएमजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
कोविड काल में महिला अस्पताल में प्रसव कराए गए थे, लेकिन उस समय महिलाएं अस्पताल आने से बचती थीं। जुलाई में अब तक 263 प्रसव हो चुके हैं। इनमें से 110 सिजेरियन हुए हैं।
डॉ. संगीता गोयल, सीएमएस महिला अस्पताल
अभी शासन स्तर से इमरजेंसी और भर्ती पर रोक लगी है, इसलिए मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे हैं। सिर्फ कोविड मरीज और प्रसव के बाद प्रसूता को भर्ती करने के आदेश हैं। जो भी शासनादेश आएगा उसका पालन किया जाएगा।
डॉ. संजय तेवतिया, सीएमसस संयुक्त अस्पताल
कोविड काल में लोग ऑपरेशन कराने से बचते थे। अस्पताल में चार सर्जन के अलावा दो आर्थोपेडिक सर्जन हैं। जुलाई में पंद्रह दिन में ही 150 से अधिक आपरेशन हो चुके हैं।
डॉ. अनुराग भार्गव, सीएमएस एमएमजी अस्पताल