चिपियाना आरओबी तैयार होने पर ही दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली
गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर अब टोल वसूली चिपियाना रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) तैयार होने के बाद ही शुरू होगी। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने नेशनल अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) से साफ किया है कि पहले प्रोजेक्ट पूरी तरह से तैयार हो। उसके बाद ही टोल वसूली की जाए। अगर एक्सप्रेसवे के किसी हिस्से में यातायात बाधित होता है तो ऐसी सूरत में टोल वसूला जाना उचित नहीं है। एनएचएआई ने 15 अगस्त तक आरओबी का एक हिस्सा तैयार करने का लक्ष्य रखा है। अथॉरिटी चाहती है कि अब टोल वसूली ज्यादा लंबे समय तक न टाली जाए।
सराय काले खां से लेकर मेरठ के बीच एक्सप्रेसवे तैयार हो चुका है। एक्सप्रेसवे के दूसरे चरण में लालकुआं के पास अलीगढ़ रेल लाइन पर आरओबी अभी तक तैयार नहीं हो हुआ है। एनएचएआई ने आरओबी वालेसात सौ मीटर के हिस्सों को छोड़कर टोल वसूले जाने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन मंत्रालय इस बात पर सहमत नहीं है कि निर्माण के बीच में टोल वसूली शुरू की दी जाए। खासकर जब आरओबी निर्माण के बीच हर रोज सुबह शाम तीन से चार घंटे लाल कुआं के पास जाम लग रहा हो। मंत्रालय ने यह भी तर्क दिया कि एक्सप्रेसवे के नाम पर टोल वसूली होगी और आगे लोग जाम में फंसेंगे तो सवाल उठेंगे। नियम के तहत भी ऐसी स्थिति में टोल वसूली नहीं की जा सकती है। इसलिए एक्सप्रेसवे पर पहले यातायात सुगम हो, उसके बाद ही टोल लगाया जाए। कम से कम यातायात के लिए छह लेन उपलब्ध होने तक टोल वसूली रोकी जाए। मंत्रालय के स्पष्ट रुख के बाद ही अब चिपियाना में एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज की तरफ बन रहे आरओबी को सबसे पहले पूरा करने की तैयारी है। बाकी औद्योगिक क्षेत्र की तरफ बनाया जा रहा आरओबी दिसंबर तक तैयार होगा।
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आरओबी का बड़ा काम, लग रहा है समय
एक्सप्रेसवे के पहले दो चरणों में 14 लेन की सड़क बनाई गई है, जिसमें बीच की तीन लेन एक्सप्रेसवे के लिए रिजर्व रखी गई है। उसके बाद एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ नेशनल हाईवे-9 की दो-दो लेन रखी गई है। फिर एनएच के बराबर में दो-दो लेन की सर्विस रोड है और सर्विस रोड के बराबर में ही पैदल पथ और साइकिल ट्रैक बनाया गया है। अब सराय काले खां से आईएमएस डासना तक 14 लेन की सड़क बनी है। इसके लिए अलीगढ़ रोल लाइन पर (चिपियाना) में दो नए आरओबी बनाए जा रहे हैं। इनमें एक आरओबी एबीईएस कॉलेज की तरफ छह लेन का बन रहा है। जबकि चार लेन का नया आरओबी औद्योगिक क्षेत्र की तरफ बनाया जा रहा है। इन्हीं दो नए आरओबी के बीच दो-दो लेन के पुराना आरओबी हैं, जिन पर अभी वाहन गुजर रहे हैं। अब ट्रैफिक ज्यादा होने से पुरानी आरओबी पर सुबह और शाम के वक्त जाम लगता है। नए आरओबी के बनने में देरी की अहम वजह देरी से काम शुरू होना है। लंबे समय तक रेलवे ने स्वीकृति नहीं दी। उसके बाद रेलवे ने शर्त रखी कि आरओबी का निर्माण किसी पीएसयू (पब्लिक सेक्टर यूनिट) की निगरानी में कराया जाए। इसके लिए एजेंसी खोजने में एनएचएआई को समय लगा। आधा से अधिक एक्सप्रेसवे तैयार होने पर आरओबी बनाने का काम शुरू किया गया था, जिससे अब प्रोजेक्ट को पूरा करने में समय लग रहा है।
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1.50 से दो रुपये प्रति किलोमीटर तक का प्रस्ताव
एनएचएआई ने टोल वसूली के लिए मंत्रालय को 1.50 रुपये से लेकर दो रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से टोल वसूली का प्रस्ताव दिया है। जिन हिस्सों में बड़ी आरओबी और एलिवेटेड रोड बनी हैं। वहीं पर दो रुपये प्रति किलोमीटर तक टोल वसूलने का प्रस्ताव रखा है। जैसे पहले चरण में यमुना नदी पर आरओबी बनाया गया है तो वहां पर दो रुपये प्रति किलोमीटर तक का प्रस्ताव है। दिल्ली से मेरठ के बीच 120 से 135 रुपये के बीच टोल वसूली का प्रस्ताव रखा गया है।
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यह देश का पहला एक्सप्रेसवे होगा, जिस पर चलते वाहनों से टोल कटेगा। मंत्रालय नहीं चाहता है कि किसी भी तरह की समस्या हो। इसलिए मंत्रालय ने साफ किया है कि पहले आरओबी की कम से कम छह लेन यातायात के लिए खुल जाएं, जिस पर यातायात सुगम तरीके से संचालित हो। उसके बाद ही टोल वसूली शुरू की जाएगी। - जनरल वीके सिंह, सड़क एवं परिवहन राजमार्ग राज्यमंत्री