कोरोना से बचाव जरूरी, इस बार नहीं लाएंगे कांवड़
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण की वजह से कांवड़ यात्रा पर उत्तराखंड सरकार ने रोक लगा दी है। पिछले साल भी इस कारण से ही कांवड़ यात्रा रोक दी गई थी। कोरोना से बचाव के लिए इस बार भी बहुत लोगों ने कांवड़ न लाने का मन बनाया है। कई साल से कांवड़ ला रहे शिव भक्त इस बार भी कांवड़ नहीं लाएंगे। ग्रुप में कांवड़ लाने वालों ने भी यह प्रण लिया है। उनका कहना है कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकना ज्यादा जरूरी है।
ढाई लाख जाते हैं
जिले में लगभग ढाई लाख कांवड़ियां कांवड़ लेने के लिए हरिद्वार, गंगोत्री और यमुनोत्री जाते हैं। इसमें पैदल और डाक कांवड़ शामिल हैं। इनके अलावा जिले से लगभग 10 लाख के करीब कांवड़ियां गुजरते हैं जो दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान कांवड़ लेकर जाते हैं। दूधेश्वरनाथ मंदिर में 2019 में करीब पांच लाख से अधिक कांवड़ियों ने जलाभिषेक किया था।
कोट्स
मैं एक हेल्थ केयर वर्कर हूं। हमारी समाज के प्रति जिम्मेदारी है, इसलिए मैं इस बार भी कांवड़ लाने नहीं जाऊंगा। हम लोग 15-20 के ग्रुप में 15 साल से कांवड़ ला रहे हैं। बाइक से गंगोत्री और केदारनाथ तक जाते हैं, लेकिन कोरोना की वजह से पिछले वर्ष भी नहीं गए और इस साल भी नहीं जाएंगे। कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है।
मनीष आनंद
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पिछले 10 साल से कांवड़ ला रहा हूं। पैदल तो एक दो बार गया हूं, लेकिन बाइक से कई बार कांवड़ लाने के लिए हरिद्वार गया हूं। महामारी का खतरा है, इसलिए नहीं जाने की योजना बनाई है। बाकी बाबा दूधेश्वरनाथ का जलाभिषेक गंगाजल से यहीं पर कर लेंगे।
लवली कथूरिया
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मैं पिछले सात वर्ष से कांवड़ ला रहा हूं। इस साल भी नहीं जाऊंगा। क्योंकि कितना भी एहतियात कर लें, भीड़ बढ़ेगी और उसमें लापरवाही हो सकती है। मैं भोले बाबा की पूजा अपने घर के मंदिर में ही करूंगा।
मनोज कुमार -
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मैं पिछले 15 वर्षों से कांवड़ ला रहा हूं। एक बार भी मेरा क्रम नहीं टूटा था, लेकिन पिछले वर्ष कोरोना की वजह से यह क्रम टूटा गया। इस बार हालांकि सरकार अनुमति दे रही है, लेकिन कोरोना की भयावहता को देखते हुए मैं इस बार भी कांवड़ लाने नहीं जाऊंगा। यही मंदिर में कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए जलाभिषेक करूंगा।
बिजेंद्र सिंह ,
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मैं छह साल से हरिद्वार से कांवड़ ला रहा हूं। हमारे दोस्तों की एक टीम होती है जो कांवड़ लाने जाती है। इस बार जब सरकार से अनुमति मिली तो खुशी तो हुई लेकिन कुंभ मेले के दौरान भीड़ और बाद के हालात को देखते हुए हम सभी ने यह निर्णय लिया है कि अनुमति मिलने के बावजूद हम अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे और इस बार भी कांवड़ लाने नहीं जाएंगे।
अंशुल
कोर्ट
भीड़ का हिस्सा बनने से बचें
कोरोना की तीसरी लहर की चेतावनी लगातार दी जा रही है और लगातार एहतियात बरतने की भी सलाह दी जा रही है। ऐेसे में हमारी लोगों से अपील है कि वह न तो अधिक भीड़ बढ़ाने वाले कोई कार्य न करें। कांवड़ यात्रा के दौरान नदी में स्नान और न चाहते हुए भी भीड़ का हिस्सा बनना पड़ेगा। इसलिए हमारी अपील है कि चिकित्सकों की परेशानी देखते हुए हमारा सहयोग करें।
डॉ. आशीष अग्रवाल, आईएमए अध्यक्ष