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शौचालय बने नहीं सफाई पर खर्च कर दिए 50 लाख

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शौचालय बने नहीं सफाई पर खर्च कर दिए 50 लाख
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गाजियाबाद। सामुदायिक शौचालय के निर्माण से लेकर उनकी साफ-सफाई तक के भुगतान में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। शासन को भेजी गई रिपोर्ट में 161 शौचालयों का निर्माण पूरा दिखा दिया है। जबकि कई शौचालय अभी अधूरे हैं। ऐसा ही कुछ हाल सफाई का है। सफाई के लिए 50 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान हो चुका है। फिर भी शौचालयों में गंदगी है। अमर उजाला ने कई शौचालयों की स्थिति जानी तो व्यवस्था की पोल खुली।
पंचायती राज विभाग द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष में 161 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक स्वास्थ्य भवन बनवाए गए थे। पंचायत चुनाव की घोषणा से पहले इन सभी सामुदायिक शौचालयों और पंचायत भवनों का निर्माण पूरा कराना था। कोरोना की वजह से देरी बताकर शौचालयों को फरवरी के अंत तक पूरा होना बताकर शासन को मार्च में रिपोर्ट भेज दी। अप्रैल से इन शौचालयों को संचालित करने और रखरखाव के लिए स्वयं सहायता समूहों को तैनात भी कर दिया गया। एडवांस में छह माह का नौ हजार रुपये प्रति शौचालय रुपये का भुगतान भी कर दिया गया।
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यहां काम अधूरा
मुरादनगर के बसंतपुर सैंथली में शौचालय निर्माण अधूरा है। अमीपुर बडयाला में टंकी या नल नहीं लगा। असालतनगर में अधूरा है, औरंगाबाद दतेरी-अधूरा, अमीपुर बड्याला सहित कई गांवों में अभी निर्माण में कुछ न कुछ अधूरा है।
इनसेट-
बसंतपुर सैंथली
बसंतपुर सैंथली गांव में फोर सीटर सामुदायिक शौचालय की रिपोर्ट दी गई है। चारदीवारी करने के बाद ग्रिल लगाकर नाम पट्टी और बाहर से रंग-रोगन करके फोटो सहित रिपोर्ट भेज दी गई। जबकि मौके पर अंदर न तो फर्श बना है और न ही सीट लगी है। नल या टंकी भी नहीं है।
जलालपुर-रघुनाथपुर गांव
इस मॉडल शौचालय का उद्घाटन राज्यमंत्री और सांसद वीके सिंह ने किया था। इस पर नाम पट्टी लगी है और बाहर से ताला लगा है। इस शौचालय के निर्माण में धांधली होने की शिकायत ग्रामीण नेत्रपाल ने की थी। शिकायत में शौचालय का लिंटर ढहने और छत टपकने की बात कही थी। जिसके बाद बाहर से रंग-रोगन कराकर टंकी लगवा दी गई। सबमर्सिबल न लगने की भी शिकायत की है। इन दोनों की जांच पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और खंड विकास अधिकारी को सौंपी गई है। खंड विकास अधिकारी ने डीएम को सौंपी रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि हैंडपंप लगा है, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण सबमर्सिबल निकाल दिया गया है।
अधिकतर गांवों में स्थान के हिसाब से चार सीटर और छह सीटर शौचालय बनाए गए हैं। छह लाख से लेकर आठ लाख तक की लागत से हिसाब से औसतन 162 गांवों में लगभग 12 करोड़ 88 लाख शौचालय निर्माण में खर्च किए है।
इनसेट-
इनसेट:
सामुदायिक शौचालयों के संचालन के लिए स्वयं सहायता समूहों को तैनात किया गया है। शासन के निर्देशानुसार सामुदायिक शौचालयों के संचालन के लिए प्रति माह नौ हजार रुपये का भुगतान किया जाएगा। इसमें छह हजार वेतन होगा और तीन हजार शौचालय की साफ-सफाई के लिए सामग्री की खरीदारी के लिए दिया जाएगा। इसके लिए अभी तक 50 लाख का भुगतान किया जा चुका है। इसमें सभी स्वयं सहायता समूह को छह महीने का एडवांस भुगतान किया गया है।
कोट
निर्माण पूरे होने की रिपोर्ट हमने शासन को भेज दी है और इनको संचालित कराने के लिए स्वयं सहायता समूहों को भुगतान भी कर दिया गया है। कहीं भी निर्माण अधूरा नहीं है।
अनिल त्रिपाठी, जिला पंचायती राज अधिकारी
कोट्स
मैंने निर्माण की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की थी। जिसकी जांच पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता कर रहे हैं। सबमर्सिबल की शिकायत की थी। रातों रात हैंडपंप लगवा दिया गया। अभी भी शौचालय में समबर्सिबल नहीं लगा है।
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त्रिलोक , निवासी जलालपुर -रघुनाथपुर
शौचालय जब बना था। इसके कुछ दिन बाद ही इसकी दीवारें ढह गई थीं। स्थानीय लोगों ने जब शिकायत की तो दोबारा से रंगरोगन कराया गया और आनन-फानन में हैंडपंप भी लगवाया गया। संचालन अभी शुरू नहीं हुआ है।
कुलदीप, जलालपुर-रघुनाथपुर निवासी
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