वार्डों में विकास कार्यों पर 110 करोड़ रुपये खर्च करेगा निगम
गािजयाबाद। मौजूदा वित्तीय वर्ष राजनीतिक दलों के लिए अहम है। मार्च 2022 तक यूपी में विधानसभा चुनाव हो जाएंगे। यानी इस साल में होने वाले विकास कार्यों का सीधा असर वोटरों पर पड़ेगा। इसी वजह से नगर निगम ने इस साल में वार्डों के विकास कार्यों पर 110 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया है। 100 निर्वाचित और 10 मनोनीत पार्षदों का कोटा एक-एक करोड़ रुपये तय किया गया है। इस रकम से पार्षद अपने वार्ड में सड़क, नाली, नाला, पार्क की बाउंड्रीवॉल आदि का निर्माण करा सकेंगे। बीते साल नगर निगम ने पार्षदों को महज 20 लाख का कोटा दिया था।
नगर निगम हर वित्तीय वर्ष की शुरूआत में बजट पास करते वक्त ही वार्ड का कोटा तय कर देता। निर्धारित की गई इस कोटे की रकम के बराबर पार्षद अपने वार्डों में सालभर में विकास कार्य करा सकते हैं। बीते साल कोरोना संक्रमण की शुरूआत और कई महीने तक चले लॉकडाउन की वजह से निगम की वसूली प्रभावित हुई थी। नगर निगम का साल 2020 का बजट भी जनवरी 2021 में पास हो पाया था। इसकी वजह से पार्षदों को वार्ड कोटे के रूप में महज 20-20 लाख रुपये मिल पाए थे। इस पर चुनावी साल में पार्षदों ने दो-दो करोड़ रुपये वार्ड कोटा निर्धारित किए जाने की मांग की थी। जिस पर महापौर ने पहले 50 लाख रुपये निर्धारित किए, लेकिन थोड़ी देर बाद इसे बढ़ाकर हर वार्ड में एक-एक करोड़ के काम कराए जाने पर सहमति दे दी। यह रकम दो चरणों में खर्च की जाएगी। शुरूआती चरण में पार्षद 50-50 लाख के प्रस्ताव देंगे। इसके काम पूरे होने के बाद दोबारा 50-50 लाख के विकास कार्य करा सकेंगे।
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इंदिरापुरम को हस्तांतरित करने के लिए हंगामा, क्षेत्रीय पार्षदों का गुस्सा फूटा
- बोले, अपने क्षेत्र में विकास भी कराने का अधिकार नहीं तो चुनाव क्यों कराया
गाजियाबाद।
इंदिरापुरम कॉलोनी नगर निगम को हस्तांतरित किए जाने की मांग को लेकर नगर निगम की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। इंदिरापुरम क्षेत्र के पार्षद संजय सिंह ने मुद्दा उठाया और अफसरों पर कॉलोनी हैंडओवर न लेने का ठीकरा फोड़ा। उन्होंने कहा कि इंदिरापुरम क्षेत्र के छह पार्षद अपने वार्डों में विकास कार्य भी नहीं करा पा रहे हैं। निगम अधिकारी जीडीए की कॉलोनी बताकर यहां विकास कार्य कराने से इंकार कर देते हैं। पार्षदों ने कहा कि अब वह अधिकारियों से ‘भीख’ नहीं मांगेंगे, कॉलोनी हैंडओवर न ली तो कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
इंदिरापुरम क्षेत्र के पार्षद अभिनव जैन, सुनीता नागपाल ने कहा कि जब अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराने का भी हमें अधिकार नहीं दिया जा रहा है तो इस क्षेत्र को नगर निगम सीमा में शामिल ही क्यों किया गया। यहां पार्षद का चुनाव नहीं कराया जाना चाहिए था। इस मुद्दे पर करीब 20 मिनट हंगामा चला। अंत में नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने पार्षदों को शांत कराकर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि नगर निगम इंदिरापुरम कॉलोनी को टेकओवर करना चाहता है, लेकिन नियमों के मुताबिक। उन्होंने बताया कि नगर निगम और जीडीए के सिविल इंजीनियर इंदिरापुरम का ज्वाइंट सर्वे पूरा कर चुके हैं। जीडीए ने 197 करोड़ के सिविल कार्य बकाया दिखाए हैं, जबकि नगर निगम के हिसाब से 332 करोड़ के कार्य बकाया है। 137 करोड़ रुपये के इस अंतर पर जीडीए अधिकारियों से वार्ता की जा रही है। इसके अलावा अभी जलकल विभाग की ओर से सर्वे करके रिपोर्ट दी जानी बाकी है। उन्होंने कहा कि इन सभी मुद्दों पर सहमति बनने के बाद ही कॉलोनी को टेकओवर किया जा सकता है।
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इस साल 1197 करोड़ की आमदनी और 946 करोड़ खर्च करेगा निगम
नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए बजट पास किया है। इस वित्तीय वर्ष में नगर निगम ने 1197.32 करोड़ की आमदनी और 946.59 करोड़ रुपये खर्च करेगा। सबसे ज्यादा 197 करोड़ का बजट निर्माण विभाग को दिया गया है। इसके अलावा साफ-सफाई, पानी की आपूर्ति पर बड़ा बजट खर्च करने का निर्णय लिया गया है।
यहां खर्च होगा पैसा
विभाग ---- मिला बजट
निर्माण ---- 197 करोड़
जलकल ----- 83.55 करोड़
प्रकाश विभाग ---- 23.90 करोड़
स्वास्थ्य विभाग ---- 133.50 करोड़
उद्यान विभाग ------ 31.50 करोड़
शिक्षा, खेल कूद ------ 4.97 करोड़
संपत्ति व प्रवर्तन ------ 2.30 करोड़
विधि विभाग ------ 2 करोड़
नजारत ------ 118.95 करोड़
अनुदान से निर्माण कार्य -- 328.92 करोड़