पुलिस ने रास्ता किया बंद, लोगों ने घर पर लिखा यह मकान बिकाऊ है
गाजियाबाद। पुलिस लाइन में होकर जा रहे प्रताप नगर कॉलोनी के रास्ते को पुलिस ने बंद कर दिया है, इससे नाराज लोगों ने अपने घर की दीवारों पर यह मकान बिकाऊ है लिख दिया है। लोगों का कहना है कि वह पुलिस की तानाशाही से परेशान हो चुके हैं। अंग्रेजों के समय से चले आ रहे रास्ते को पुलिस ने दबंगई से बंद कर दिया। इससे सात हजार लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। मुख्य मार्ग पर आने केलिए जहां प्रताप नगर के लोगों को 500 मीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी, अब तीन किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। लोगों ने जिलाधिकारी से लेकर एसएसपी से रास्ता खोलने की गुहार लगाई है।
प्रताप नगर कॉलोनी निवासियों का कहना है कि कॉलोनी का रास्ता पुलिस लाइन बनने से पहले से निकल रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण पुलिस ने वर्ष 2020 में रास्ते को बंद कर दिया था। जैसे ही कोरोना की स्थिति सामान्य हुई रास्ते को खोल दिया गया। इस बार पुलिस ने रास्ता नहीं खोला। कई बार अधिकारियों से मिलकर समस्या बताई गई, उन्होंने आश्वासन दिया। समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि रास्ता खोलने को लेकर कॉलोनी के लोग धरना देकर बैठ गए। धरना स्थल पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने लोगों के साथ अभद्रता की। पुलिस की धमकी के बाद धरना समाप्त कर दिया गया। लोगों का कहना है कि मुख्य रास्ते तक आने के लिए कॉलोनी के लोगों को पुलिस लाइन में होकर 500 मीटर का रास्ता तय करना पड़ता था। अब यह रास्ता अवंतिका में होते हुए तीन किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। मजबूरी में यहां से मकान बेचकर जाना पड़ेगा।
- चार गांव को जोड़ता है पुलिस लाइन का रास्ता
कॉलोनी के लोगों का कहना है कि पुलिस लाइन में होकर जा रहा रास्ता चार गांव को जोड़ता है। पुलिस लाइन के अंदर रजवाहे के बराबर से रास्ता जा रहा है। यह बयाना, काजीपुरा, नायफल और बम्हैटा गांव को जाता है। इस रास्ते के बंद होने से लोग वहां के लिए सीधे नहीं जा पाते हैं।
बोले लोग
पहले कर दिया था समाधान
सोचा कोरोना संक्रमण के कारण रास्ता बंद है। पहले की तरह खोल दिया जाएगा। काफी दिनों तक रास्ता नहीं खोला गया। डीएम एसएसपी से भी मिले। वहां भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। धरना दिया तो लोगों के साथ अभद्रता की गई। कॉलोनी के लोग पुलिस से डरे हुए हैं। मकान बेचने के लिए भी दीवारों पर लिख दिया है।
सतीश चंद शर्मा, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष
इस बार पैदल का भी नहीं छोड़ा रास्ता
पिछली बार पुलिस ने कोरोना संक्रमण कम होने पर रास्ता खोल दिया था। बाइक से भी लोग आने जाने लगे थे, लेकिन इस बार लोगों को पैदल जाने के लिए भी रास्ता नहीं खोला गया है। जबकि नियम के अनुसार पूर्ण तरीके से वह रास्ता बंद नहीं कर सकते हैं।
जय सिंह भदौरिया
पहले भी हुआ समझौता
रास्ता पहले भी बंद कर दिया गया था। पुलिस के पुराने अधिकारियों से भी विवाद हुआ, लेकिन कागज दिखाने के बाद समझौता हो गया और रास्ता खोल दिया गया। इस बार कोई भी अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है। जबकि लोगों को लगातार समस्या हो रही है।
सुधीर चौधरी
कोर्ट का लेंगे सहारा
हमारे पास रास्ते के कागज हैं। पुलिस के अधिकारियों के सुनवाई न करने पर हमने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। वहां से हमें राहत मिलेगी। यदि पुलिस हमारी सुनवाई यहीं कर लेती तो हमें इलाहाबाद तक नहीं दौड़ना पड़ता।
धर्मेंद्र कुमार
वर्जन...