पांच दिन बाद सरकारी अस्पतालों में नहीं होगा दिल का इलाज
गाजियाबाद। पांच दिन बाद जिले के सरकारी अस्पतालों में दिल का इलाज बंद हो जाएगा, क्योंकि एमएमजी अस्पताल में कार्यरत एकमात्र हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कात्याल 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। अभी तक शासन ने दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की है, इसलिए हृदय संबंधित बीमारी के लिए मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ेगा, जबकि मेडिकोलीगल व बंदी मेरठ या दिल्ली रेफर होंगे।
10 बाद भी बर्न वार्ड चालू नहीं
बर्न वार्ड बनने के 10 साल बाद भी सक्रिय नहीं हो पाया, क्योंकि वार्ड तो बना दिया गया था, लेकिन एक भी स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो पाई। अब बर्न वार्ड के सामने एक हजार एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट लगाया जा रहा है। पांच साल पहले बनाया गया आईसीयू वार्ड भी अब तक नहीं शुरू हो पाया, क्योंकि अभी तक कार्यरत हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कात्याल सुबह आठ से दो बजे तक ओपीडी में मरीजों का इलाज करते थे, लेकिन दो बजे के बाद मरीजों की देखभाल करने वाला कोई नहीं था। इसलिए मरीज भर्ती ही नहीं किए जाते थे। बच्चों के लिए नर्सरी बनाई गई थी, लेकिन स्टॉफ की कमी के कारण यह भी बंद पड़ी है। सामान्य तौर पर बच्चों को भर्ती किया जाता है, लेकिन नर्सरी में भर्ती होने वाले बच्चों को रेफर कर दिया जाता है।
36 स्वास्थ्य केंद्र बदहाल
जिले में 76 उपकेंद्रों को अपग्रेड किया जाना था, लेकिन अब तक केवल 42 उपकेंद्र ही सक्रिय हो सके हैं। तीन चरणों में 76 स्वास्थ्य उपकेंद्रों को अपग्रेड किया जाना था। पिछले 3 साल के दौरान इनमें से 42 उपकेंद्र ही अपग्रेड हो सके हैं। 34 उपकेंद्र स्टाफ और संसाधनों की कमी के लते अपग्रेड नहीं हो सके हैं। सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि मिशन निदेशक को पत्र लिखकर मांग की गई कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर सीएचओ (कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर) की नियुक्ति की जाए। सीएचओ की कमी के चलते 34 केंद्र शुरू नहीं हो पा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक को पत्र लिखकर सीएचसी उपलब्ध कराने और हृदय रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के लिए भी शासन से मांग की गई है।
शासन को लिखा पत्र
31 अगस्त तक डॉ. सुनील कात्याल मरीजों का इलाज कर रहे हैं। शासन और सीएमओ को पत्र लिखकर हृदय रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति करने की मांग की गई है।
डॉ. अनुराग भार्गव, सीएमएस, एमएमजी अस्पताल