पीआरवी से टकराने पर युवक उठाया, 3 हजार लेकर छोड़ा
गाजियाबाद। कभी भ्रष्टाचार तो कभी मुफ्तखोरी के आरोपों से घिरी गाजियाबाद पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार थाना पुलिस नहीं, बल्कि मददगार मानी जाने वाली पीआरवी पुलिस पर आरोप लगा है। आरोप है कि सड़क पार करते समय एक एक युवक पीआरवी से टकरा गया। साइड ग्लास टूटने की बात कहते हुए पुलिसकर्मियों ने उसे पीआरवी में डाल लिया और तीन हजार रुपये लेकर छोड़ा। वहीं, एसपी देहात ने मामले में जांच बैठा दी है। उनका कहना है कि पीड़ित लिखित में शिकायत देगा तो पुलिसकर्मियों की जांच कराकर एक्शन लिया जाएगा।
बहादुरगढ़ निवासी पप्पू अटौर गांव स्थित एक हॉस्टल में खाना बनाने का काम करता है। पप्पू का कहना है कि बृहस्पतिवार सुबह वह बस से हापुड़ चुंगी पहुंचा था। उसके साथ पत्नी और दो बच्चे भी थे। हापुड़ चुंगी से उसने ऑटो पकड़ा और भट्ठा नंबर पांच पर उतर गया। इस दौरान बच्चे भूख लगने की बात कहकर खाने का कुछ सामान लाने को कहने लगे। पप्पू का कहना है कि वह सड़क पार बिक रहे छोले-कुल्चे लेने के लिए चला गया। वह सामान लेकर वापस लौट रहा था कि एक तेज रफ्तार कार आई। उससे बचने के लिए वह पीछे से हटा तो पीआरवी संख्या 2148 से टकरा गया।
मारपीट कर कार में डाला, पैसे वसूलकर छोड़ा
पप्पू का आरोप है कि पीआरवी में टक्कर के बाद उसमें सवार पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ लिया और साइड का शीशा टूटने की बात कहते हुए गाड़ी में डाल लिया। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की और शीशे के तीन हजार रुपये मांगे। पीड़ित का कहना है कि कार ठीक कराने के तीन हजार रुपये देने पड़े। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसे पुराने बस अड्डे के पास ले जाकर छोड़ा।
दोस्तों ने किया रुपयों का इंतजाम
पीड़ित का कहना है कि पुलिसकर्मी उसे ले जाने लगे तो उसने बच्चों से घर पहुंचने को कह दिया। इसके बाद उसने अपने दोस्तों को फोन करके रुपयों की व्यवस्था की। रुपये मिलने तक पुलिसकर्मियों ने उसे नहीं छोड़ा। एसपी देहात नीरज कुमार जादौन का कहना है कि उक्त मामले की जांच कराई जाएगी। इस संबंध में पीड़ित उनके पास आकर शिकायत दे सकता है। जांच में दोषी मिलने पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।