नगर कोतवाली क्षेत्र में गोली लगने से घायल सैनिट्री कारोबारी कारोबारी मनीष यादव ने सोमवार शाम उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस के मुताबिक अभी तक की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2014 में हुए कपिल यादव हत्याकांड की रंजिश में कारोबारी की हत्या की गई है। कारोबारी के भाई की तहरीर पर पुलिस ने 13 लोगों नामजद किया गया है। इनमें सपा नेता सहित सात लोगों पर हत्या कराने का शक जाहिर किया गया है। वहीं, कपिल हत्याकांड में अदालत ने सोमवार को चार आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिए गए।
कविनगर थानाक्षेत्र के शाहपुर बम्हैटा निवासी आशीष यादव के मुताबिक नगर कोतवाली क्षेत्र में जीटी रोड पर उनका सैनिट्री का कारोबार है। रविवार शाम करीब सात बजे छोटेभाई मनीष यादव ने दुकान बंद कर दी। इसके बाद वह, मनीष और मामा विकास यादव मर्सिडीज कार में बैठने की वाले थे। इसी दौरान एक कार तेजी से आकर रुकी। उसमें से गांव का ही यशदेव यादव उतरा और गर्दन से पिस्टल सटाकर मनीष को गोली मार दी। शोर मचाने पर आरोपी भाटिया मोड़ की ओर फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल मनीष को यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार शाम उसने दम तोड़ दिया। एसपी सिटी का कहना है कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वर्ष 2014 में हुए कपिल हत्याकांड की रंजिश में कारोबारी को गोली मारी गई। परिजनों की तहरीर पर 13 लोगों के खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज किया गया था। कारोबारी की मौत होने के चलते मुकदमे को हत्या की धाराओं में तरमीम किया जाएगा। हत्याकांड में जो-जो शामिल होंगे, जांच कर उन्हें जेल भेजा जाएगा।
13 लोगों के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा
आशीष यादव के मुताबिक गोली मारने वाले यशदेव यादव के साथ कार में चालक सहित पांच लोग थे। इसके अलावा आशीष का कहना है कि उनकी रंजिश गांव के ही कालू यादव, विनोद यादव (सपा नेता), मान सिंह, विजय सिंह, सुनील, महाराम व ग्राम चंद्रावली थाना सिकंदराबाद (बुलंदशहर) निवासी महेंद्र से चल रही है। आशीष यादव के मुताबिक उक्त आरोपियों ने उनके पिता रामबीर यादव की हत्या कर दी थी। लिहाजा शक है कि वारदात में उक्त लोग शामिल हैं।
ऐसे चलता आ रहा खून-खराबा
पुलिस के मुताबिक 2004 में सपा नेता विनोद यादव के भाई संजय पहलवान की हत्या में मनीष के पिता रामबीर यादव का नाम आया था। कुछ दिन बाद रामबीर की हत्या कर दी गई, जिसमें विनोद के परिजनों पर आरोप लगाया गया था। बाद में दोनों पक्षों में सुलह हो गई, लेकिन 2014 में विनोद के चचेरे भाई कपिल यादव पर रामबीर के रिश्तेदारों की जमीन कब्जाने का आरोप लगा। मई 2014 में कपिल की भी हत्या हो गई। इस मामले में मनीष, उसके भाई आशीष सहित छह लोगों का नाम आया था।
मनीष व आशीष को क्लीनचिट मिलने से थी नाराजगी
पुलिस के मुताबिक कपिल हत्याकांड की जांच के दौरान कोई सुबूत न मिलने का हवाला देकर आशीष व मनीष का नाम निकाल दिया गया था। इस बात से दूसरा पक्ष नाराज था। पुलिस का कहना है कि इसी रंजिश में मनीष यादव की हत्या की गई है।
‘अप्रैल 2018 में मारपीट, फैसले से एक दिन पहले मारी गोली’
मृतक कारोबारी मनीष के भाई आशीष यादव का कहना है कि कपिल यादव के परिजनों ने अप्रैल 2018 में एक कार्यक्रम के दौरान मारपीट की थी। इसके बाद इसके बाद उन्होंने अनहोनी की आशंका के मद्देनजर थाने लेकर एसएसपी कार्यालय तक में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। आशीष का कहना है कि कपिल हत्याकांड में पिछले माह क्लीन चिट मिलने के बावजूद कपिल का परिवार उन्हें सजा देने की बात करते थे। मनीष का पीछा कर धमकी भी दी गई और आखिरकार कपिल हत्याकांड में फैसला आने से एक दिन पहले मनीष को गोली मार दी गई।