राजस्थान, केरल सहित कई राज्यों से पहुंचे किसान
साहिबाबाद। यूपी गेट पर चल रहे आंदोलन में मंगलवार को भी किसानों का आना जारी रहा। गांव ही नहीं अब विदेश में रह रहे किसान परिवार के लोग आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन दे रहे हैं। राजनीतिक पार्टी के कुछ नेता भी किसानों को अपना समर्थन देने पहुंचे। वहीं, प्रधानमंत्री द्वारा आंदोलनजीवी कहने पर किसानों ने खासी नाराजगी व्यक्त की। किसानों ने कहा कि हम आंदोलनजीवियों के वंशज हैं, इसका हमें गर्व है।
यूपी गेट पर चल रहे किसान आंदोलन को मंगलवार को 76 दिन हो गए। लगातार मंगलवार को भी हरियाणा, राजस्थान, केरल, मध्य प्रदेश से किसान आंदोलन स्थल पर पहुंचे। कोई हाथों में झंडे लेकर आया तो कोई पानी लेकर आंदोलन स्थल पर पहुंचा। किसानों ने मंच से अपनी बात रखी। सबसे पहले किसानों ने सोमवार को प्रधानमंत्री द्वारा किसानों को लेकर कही बातों पर सवाल खड़े किए तो कुछ ने किसानों को आंदोलनजीवी कहने पर गुस्सा व्यक्त किया। किसानों ने मंच से एलान किया कि किसान आजादी के समय से आंदोलन करते आ रहे हैं। हम आंदोलनजीवियों के वंशज हैं। हमने आंदोलन के जरिए आजादी हासिल की है। किसानों ने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि जब किसान आंदोलन कर आजादी की लड़ाई लड़ रहा था तो आपकी विचारधारा के लोग क्या कर रहे थे। इस दौरान किसानों ने आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को याद किया। किसानों ने मंच से साफ कहा कि आंदोलन तब तक चलता रहेगा जब तक सरकार तीनों कानून वापस नहीं लेती और एमएसपी पर गारंटी नहीं देती। वहीं, दोपहर तक किसानों का आंदोलन स्थल पर आना जारी रहा। उत्तराखंड, राजस्थान, केरल, मध्य प्रदेश आदि जगहों से किसान आंदोलन स्थल पर पहुंचे।
न्यूजीलैंड से समर्थन देने पहुंचा परिवार
न्यूजीलैंड में रहने वाले कुलजीत सिंह परिवार के साथ यूपी गेट बॉर्डर पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को अपना समर्थन दिया। उन्होंने सबसे पहले गाजीपुर आंदोलन कमेटी के सदस्यों को माला पहनाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि वह भी किसान परिवार से आते हैं। जब तक आंदोलन चलेगा वह किसानों को अपना पूरा समर्थन देंगे।
गांव की मिट्टी लेकर आंदोलन स्थल पर पहुंचा किसान
गांव से मिट्टी और पानी लेकर लोगों का आना मंगलवार को भी जारी रहा। मंगलवार को बलिया के रहने वाले धीरज सिंह गांव की मिट्टी लेकर आंदोलन स्थल पर पहुंचे। वह राकेश टिकैत को मिट्टी देना चाहते थे लेकिन आंदोलन स्थल पर वह मौजूद नहीं थे। इसकी वजह से धीरज सिंह ने जगतार सिंह बाजवा को मिट्टी सौंपी।