अस्पताल में भर्ती ब्लैक फंगस के मरीज की एक आंख निकाली गई
साहिबाबाद। जिले में ब्लैक फंगस का फंदा दिनों-दिन कसता जा रहा है। बृहस्पतिवार को एक मरीज की मौत के बाद शुक्रवार को वैशाली सेक्टर एक स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती मरीज में संक्रमण बढ़ने पर उसकी एक आंख निकालनी पड़ी। उसकी दूसरी आंख में भी संक्रमण फैल चुका है और उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। इसके अलावा टीएचए के दो अस्पतालों में भर्ती 16 अन्य मरीजों की तबीयत भी गंभीर बताई जा रही है। वहीं, ब्लैक फंगस के इलाज में काम आने वाली एम्फोटेरिसिन-बी दवा का भी संकट है। दवा न मिल पाने के कारण मरीजों के इलाज में बाधा आ रही है।
दिल्ली निवासी कृष्ण मोहन द्विवेदी को आंखों में संक्रमण होने पर वैशाली सेक्टर एक स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती किया गया था। वह पोस्ट कोविड मरीज थे। जांच में उनमें ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई। संक्रमण उनकी आंखों में बुरी तरह से फैल चुका था। जान बचाने के लिए बृहस्पतिवार रात को डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उनकी एक आंख को निकाल दिया। उनकी दूसरी आंख में भी फंगस फैला है। उसका ऑपरेशन शनिवार को होना है। वहीं, परिजनों ने बताया कि दिल्ली, गाजियाबाद समेत कई जगहों पर इंजेक्शन के लिए संपर्क किया लेकिन कहीं भी इंजेक्शन नहीं मिल सका। जिसके बाद परिजनों ने ट्विटर और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन और सरकार से इंजेक्शन की मांग की है।
टीएचए के दो अस्पतालों में आ चुके हैं 16 मरीज
प्राइवेट अस्पतालों में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। टीएचए के मैक्स अस्पताल में अब तक दस मरीज आ चुके हैं। यशोदा अस्पताल में भी छह मरीजों का इलाज चल रहा है।
आंख में फंगस पहुंचा तो निकालनी पड़ती है आंख
कौशांबी के यशोदा अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि पोस्ट कोविड मरीज नाक बंद होने, सिर में दर्द या भारीपन की समस्या होने पर डॉक्टर को दिखाएं। नाक की एनडोस्कॉपी कर जांच की जाती है। इसके बाद सैंपल जांच के लिए भेजा जाता है। ब्लैक फंगस संक्रमण को रोकने के लिए एम्फोटेरिसिन-बी दवा दी जाती है। नाक में ही फंगस रहता है तो सर्जरी कर उस पार्ट को निकाला जाता है। दरअसल यह फंगस हड्डी को गलाता है। अगर आंख पर फंगस पहुंच जाता है तो आंख निकालनी पड़ती है।
ब्लैक फंगस के लक्षण
नाक बंद होना, नाक में पपड़ी बनना, नाक से पानी आना, दांतों और माथे में दर्द होना, चेहरे पर सूजन आना। आंखों में धुंधलापन, डबल विजन होना, आंखों में लालपन आदि।
एक महीने तक दिया जाता है इंजेक्शन
डॉक्टरों का कहना है कि ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज को एम्फोटरेसिन-बी इंजेक्शन दिया जाता है। ये इंजेक्शन मरीज को उसके वजन के हिसाब से दिया जाता है। यदि मरीज का वजन 50 किलो है तो उसे 50 एमजी का इंजेक्शन दिया जाएगा। मरीज को एक महीने तक हर दिन तीन इंजेक्शन दिया जाता है। बाजार में एम्फोटरेसिन-बी इंजेक्शन करीब छह हजार रुपये में मिलता है लेकिन गाजियाबाद में फिलहाल ये इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है।