फैक्टरी में अवैध रूप से बनाए जा रहे थे मेडिकल उत्पाद
साहिबाबाद। साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र के भूखंड संख्या 12/71 पर जिस फैक्टरी में आग लगी, उसमें अवैध रूप से मेडिकल उत्पादन बनाए जा रहे थे। वर्ष 2006 में फैक्टरी में इलेक्ट्रिकल उत्पाद बनाने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) से स्वीकृति ली गई थी लेकिन लॉकडाउन के दौरान मोटे मुनाफे के चक्कर में इसमें पीपीई किट और मास्क बनाए जाने लगे। जबकि इसके लिए यूपीसीडा व अन्य विभागों से अनुमति नहीं ली गई थी। दमकल विभाग के मुख्य अधिकारी सुनील कुमार भी मानते हैं कि फैक्टरी में आग से बचने के पर्याप्त साधन मौजूद नहीं थे।
यूपीसीडा की रीजनल अधिकारी स्मिता सिंह ने बताया कि भूखंड संख्या 12/71 का हस्तांतरण भरत आहूजा के पक्ष में एमसीबी स्विच गियर, वायर केबल, एमसीबी बॉक्स और एसेसीरीज व इलेक्ट्रिकल सामान बनाने के लिए 27 दिसंबर 2006 को हुआ था। लेकिन कंपनी प्रबंधन ने बाद में उत्पाद बदलने की अनुमति लिए बिना यहां पीपीई किट, मास्क और अन्य मेडिकल उपकरण बनाने का काम शुरू कर दिया। इसी तरह भूखंड के पट्टा विलेख का निष्पादन 20 नवंबर वर्ष 2007 में, जबकि कब्जा 27 नवंबर को दिया गया था। भूखंड का मानचित्र पांच जून 2008 को स्वीकृत हो चुका था। इस सच को जानने के बाद यूपीसीडा के अधिकारियों का कहना है कि अब दमकल विभाग के साथ अभियान चलाकर नियम तोड़ने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट -4 में डेढ़ हजार से अधिक प्लॉट हैं। जिसमें उद्यमी कई प्रकार के उत्पाद बनाकर देश और विदेश में सप्लाई करते हैं।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस जारी करते रहे
यूपीसीडा की जांच में खुलासा हुआ है कि 11 दिसंबर 2019 को इस औद्योगिक इकाई के सेटबैक में अग्निश्मन संबंधी यंत्र न होने पर नोटिस जारी किया गया था। नोटिस की एक कॉपी अपर जिला अधिकारी, उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग केंद्र एवं प्रोत्साहन केंद्र, गाजियाबाद व मुख्य अग्निश्मन अधिकारी को भी भेजी गई थी, लेकिन अधिकारियों ने नोटिस की कॉपी मिलने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। स्मिता सिंह का कहना है कि वर्ष 2009 में आवंटी को भू-उपयोग के लिए नोटिस दिया गया। इसके बाद वर्ष 2009 और 2017 में आवंटी ने दो बार समय विस्तार के लिए अनुरोध किया था। इस पर यूपीसीडा ने आवंटी के आवेदन पर अनुमोदन देने के लिए फाइल को मुख्यालय भेज दिया। वहां से अनुमोदन मिलने का इंतजार किया जा रहा था।
हादसे के बाद टूटी नींद
फैक्टरी में आग से 14 लोगों के झुलसने (जिसमें एक की मौत) के बाद अधिकारियों की नींद टूटी है। यूपीसीडा की अधिकारी स्मिता सिंह का कहना है कि नियमों के विरुद्ध चल रही औद्योगिक इकाइयों की अभियान चलाकर जांच की जाएगी। उन्हें सभी मानकों को पूरा करने के लिए 15 दिन से लेकर एक माह तक का समय दिया जाएगा। यदि उसके बाद भी उद्यमी व्यवस्थाओं को ठीक नहीं करते हैं तो फिर यूपीसीडा की टीम दमकल विभाग के साथ औद्योगिक इकाइयों को सील करने की कार्रवाई करेगी।