बहुजन समाजवादी मंच की तरफ से किसान आंदोलन के समर्थन मे माटी संक्लप मार्च निकालते हुए।
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25 जिलों से कलश में मिट्टी लेकर यूपी गेट पहुंचे लोग
साहिबाबाद। कृषि कानूनों के खिलाफ रविवार को बहुजन समाजवादी मंच के बैनर तले सैकड़ों लोगों ने 25 जिलों की मिट्टी के साथ माटी संकल्प मार्च निकाला। इस मिट्टी को विभिन्न जिलों से लाकर कौशांबी में एकत्र किया गया। बसम के पदाधिकारियों ने कौशांबी में डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण कर मार्च का शुभारंभ किया। इसमें करीब 150 मीटर लंबा तिरंगा और पंचशील के साथ लोगों ने कृषि कानूनों के खिलाफ नारेबाजी की। यह यात्रा डाबर तिराहे से यूपी गेट के बीच निकाली गई।
गाजियाबाद में बसम से जुड़े सोनू प्रधान ने बताया कि कृषि कानूनों के खिलाफ डाबर तिराहे से यूपी गेट पर सुबह 12 बजे से माटी संकल्प मार्च निकाला गया। इससे पहले संगठन के लोगों ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के 25 जिलों से मिट्टी को इकट्ठा कर कलश में भरा। अलग-अलग जिलों से लोग 40 गाड़ियों के काफिले के साथ मार्च में शामिल हुए। पदाधिकारियों ने कहा कि देश का अन्नदाता पिछले 52 दिनों से कड़ाके की ठंड में आंदोलन में बैठा है, लेकिन सरकार कृषि कानूनों को वापस लेने को तैयार नहीं हैं। पदाधिकारियों का आरोप है कि सरकार एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन का निजीकरण करने के बाद अब किसानों की खेती भी पूंजीपतियों को सौंपना चाहती है। देश का किसान बर्बाद हो जाएगा और इससे आमजन को महंगाई झेलनी पड़ेगी। करीब ढाई घंटे की यात्रा के बाद बसम के लोग मंच पर पहुंचे। वहां गाजीपुर किसान आंदोलन कमेटी के पदाधिकारी मलूक सिंह खिंडा और अन्य लोगों ने माला पहनाकर उनका सम्मान किया। बसम के पदाधिकारी बालकराम बोध और संजीव माथुर का दावा है कि मार्च में 150 मीटर लंबा तिरंगा और 100 मीटर लंबा पंचशील झंडा शामिल किया गया।
उधर, बिहार, उड़ीसा, कर्नाटक और अन्य जगहों के लोगों ने भी आंदोलन स्थल पर पहुंचकर किसानों को आंदोलन में समर्थन दिया। किसान आंदोलन में दोपहर में सुचेता एक्टिंग ग्रुप से कलाकारों ने नाटक का मंचन किया। उधर, उत्तराखंड के बाजपुर से बड़ी संख्या में महिलाएं यूपी गेट पहुंचीं। वहां सभी ने कृषि कानूनों के खिलाफ एक साथ हुंकार भरी। उधर, मंच से आंदोलन में पानी के टैंकर लाने वाले और किसानों के बाल काटने वालों को शॉल ओढ़ाकर व माला पहनाकर सम्मानित किया गया।