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काली कमाई से खरीदे आलीशान फ्लैट और लग्जरी कारें
साहिबाबाद। फर्जी कॉल सेंटर खोलकर दस हजार सेवानिवृत्त कर्मचारियों से 100 करोड़ से ज्यादा की ठगी कर साइबर अपराधी ऐश ओ आराम की जिंदगी जी रहे थे। जुर्म की काली कमाई से आलीशान फ्लैट और लग्जरी कारें खरीदीं। खुद के ही नहीं, रिश्तेदारों के नाम पर भी संपत्ति बनाई। ठगी के जरिए छप्पर फाड़ पैसा मिल रहा था, इसलिए मौज मस्ती में भी कमी नहीं छोड़ी। हर महीने पंच सितारा होटलों में पार्टी करते थे। पुलिस अब जुर्म की कुंडली बना रही है तो इनके काले कारनामों से पर्दा उठता जा रहा है। पूरा ब्योरा जुटाकर पुलिस इनकी संपत्ति जब्त कराएगी।
शातिर साइबर अपराधियों का यह गिरोह आठ सालों से ठगी कर रहा था। इसके लिए नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर खोला गया था। खुद को ईपीएफओ का कर्मचारी बताकर गिरोह के सदस्य रिटायर्ड कर्मचारियों को समूह बीमा दिलाने का झांसा देते थे और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम खातों में जमा करा लेते थे। गिरफ्तार किए सरगना राहुल और धर्मेंद्र से पूछताछ में पुलिस को इनकी अकूत संपत्ति का पता चला है। साइबर सेल के प्रभारी एवं सीओ इंदिरापुरम अभय कुमार मिश्र ने बताया, घनश्याम मूल रूप से बिहार के मधुबनी का रहने वाला है जबकि धर्मेंद्र मूल रूप से बलिया का है। इनका साथी राहुल रबूपुरा का निवासी है। पुलिस की टीमें इन तीनों और गिरोह के अन्य सदस्यों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों का ब्योरा जुटा रही हैं। पता चला है कि इन्होंने रिश्तेदारों के नाम पर भी संपत्ति बनाई है। उसकी डिटेल भी तैयार की जा रही है। गिरोह पर गैंगस्टर एक्ट लगाया जाएगा। इसी के तहत अपराध से अर्जित इनकी संपत्ति जब्त कराई जाएगी।
खोड़ा और नोएडा में भी खरीदे फ्लैट
नोएडा के सलारपुर में घनश्याम के एक फ्लैट, राहुल के नाम से खोड़ा में एक फ्लैट और दो प्लॉट की रजिस्ट्री के कागज मिले हैं। इनकी कीमत डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक है। राहुल से लग्जरी कार मिली है। गिरोह के सदस्यों ने रिश्तेदारों को भी कार खरीदवाई हैं। दो सप्ताह में इनकी सभी संपत्ति और कारों की डिटेल मिलने की संभावना है। ये लोग ठगी की रकम बैंक खातों में जमा कराते थे। अब तक ऐसे 51 खातों का पता चल चुका है।
काली कमाई को सफेद करने के लिए खोला था ट्रस्ट
सीओ ने बताया, जानकारी मिली है कि घनश्याम ने एक ट्रस्ट भी खोल रखा था। इसके माध्यम से अपराध की काली कमाई को सफेद किया जाता था। ठगी की रकम ट्रस्ट में जमा करा दी जाती थी। वहीं से खर्च की जाती थी। इसका पूरा ब्योरा रखा जाता था। ट्रस्ट के कागजात भी खंगाले जा रहे हैं। इन्हें भी साक्ष्य के रूप में कोर्ट में पेश किया जाएगा। ट्रस्ट के सदस्यों से भी पूछताछ होगी। बैंकों से ट्रस्ट के खातों का ब्योरा मांगा गया है।
721 मोबाइल नंबरों से की 10000 लोगों से ठगी
सरगना पहले ठगों के लिए काम करता था, फिर अपना गिरोह बना लिया
साहिबाबाद। पुलिस को ठगों के 721 मोबाइल नंबर मिले हैं। इनके सिम फर्जी दस्तावेज पर लिए गए। इनकी मदद से ही लोगों को कॉल करके ठगा जाता था। ये सिम गिरोह के सदस्यअंकित ने खरीदे थे। जैसे ही किसी से मोटी रकम खाते में जमा करा लेते थे, वैसे ही उस सिम को तोड़ देते थे जिससे उसे कॉल की गई। पुलिस को शातिरों के पास से बरामद हुए मोबाइल की जानकारी निकालने पर इसका पता चला।
सीओ ने बताया कि इस गिरोह ने गुजरात और महाराष्ट्र में ज्यादा ठगी की है। वहीं के पीड़ित पुलिस के पास फोन कर रहे हैं। उनसे तहरीर देने के लिए कहा गया है। गिरोह के मास्टरमाइंड धर्मेंद्र के बारे में पता चला है कि वह पहले हैदराबाद के ठगों के एक गिरोह के लिए काम करता था। उसने गिरोह को अपना खाता किराए पर दे रखा था। इसके बदले उसे 20 हजार रुपये महीना मिलते थे। 2012 से 2015 तक उसने यह काम किया। गिरोह पकड़ा गया तो उसका नाम ले दिया। उसे भी जेल हुई। जेल से छूटने पर उसने सोचा कि अगर अपराध ही करना है तो बड़ा करे ताकि पैसा ज्यादा मिले। उसने ठगी का अपना गिरोह बना लिया। 2016 में उसकी मुलाकात प्राइवेट कंपनी में काम कर रहे राहुल से हुई। उसे पैसों की जरूरत थे। इसके बाद दोनों ठगी करने लगे। गिरोह बना तो दोनों उसके सरगना हो गए।
किराए पर लिए अधिकांश खाते नोएडा और खोड़ा के
शातिर ठगों के पास से जितने पासबुक और एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं, उसमें से अधिकांश नोएडा और खोड़ा में झुग्गियों में रहने वाले लोगों के नाम पर लिए गए हैं। पुलिस को अब तक 51 खातों की जानकारी प्राप्त हुई है। शनिवार, रविवार और जन्माष्टमी की छुट्टी होने के कारण बैंक बंद थे। इसके चलते पुलिस को खाते में हुए लेनदेन और जिन दस्तावेज पर खाते हैं, इनकी जानकारी अभी प्राप्त नहीं हो सकी है। बैंक खुलते ही पुलिस की एक टीम इनकी जांच के लिए बैंक जाएगी। साइबर सेल गाजियाबाद और इंदिरापुरम पुलिस ने शनिवार को रिटायर्ड सरकारी विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को झांसे में लेकर पीएफ की धनराशि और बीमा की राशि निकलवाने के नाम पर प्रोसेसिंग फीस खाते में डलवाकर ठगी करने वाले कालसेंटर को पकड़ा था। पुलिस ने घनश्याम, राहुल और धर्मेद्र को गिरफ्तार किया था। आरोपी 2012 से अब तक दस हजार लोगों से एक अरब से अधिक रुपये की ठगी कर चुके हैं। जबकि तीन आरोपी अभी तक मामले में फरार हैं। पुलिस जिनकी तलाश कर रही है।