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कौशांबी की 22 सोसायटियों को डीजल जनरेटरों को सीएनजी में बदलना होगा

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कौशांबी की 22 सोसायटियों को डीजल जनरेटरों को सीएनजी में बदलना होगा
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साहिबाबाद। कौशांबी इलाके में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए पीसीबी की तरफ से 22 सोसायटी की आरडब्ल्यूए को सोसायटी में लगे डीजल के जेनरेटरों को सीएनजी में तब्दील करने को लेकर पत्र लिखा गया है। पीसीबी की तरफ से सभी सोसायटियों से 15 दिनों में कार्य योजना भी प्रस्तुत करने को कहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में कौशांबी अपार्टमेंट रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (करवा) की तरफ से इलाके में प्रदूषण को लेकर केस दायर है। सर्वोच्च न्यायालय की तरफ से इलाके में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए कदम उठाने के आदेश दिए गए हैं। इसको देखते हुए पीसीबी की तरफ कौशांबी की 22 सोसायटी की आरडब्ल्यूए को पत्र जारी किया गया है। जिसमें सोसायटी में लगे डीजल के जेनरेटरों को सीएनजी में बदलने के लिए सभी आरडब्ल्यूए से कहा गया है। जिससे प्रदूषण को कम किया जा सके। पीसीबी की तरफ से इस संदर्भ में कार्य योजना भी 15 दिनों में आरडब्ल्यूए की तरफ से मांगी गई है। उन्होंने बताया कि लगातार सोसायटी के जेनरेटरों के संचालन से ध्वनि एवं वायु प्रदूषण की शिकायतें पीसीबी को मिलती रहती हैं। वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम के अनुसार डीजी सेट पर निकटतम छत तल की ऊंचाई से करीब दो फुट ऊंचा होना चाहिए। सोसायटी में लगे जेनरेटर की चिमनी की ऊंचाई इतनी नहीं है। उनका कहना है कि ग्रैप अवधि में डीजी सेट का संचालन जरूरी सेवाओं को छोड़कर अन्य में नहीं किया जा सकता है। अधिकांश सोसायटी डीजी सेट संचालन जरूरी सेवाओं के अतिरिक्त सोसायटी में विद्युत आपूर्ति के लिए भी किया जाता है जो कि उचित नहीं है। ऐसे में में ग्रैप अवधि में डीजी सेट पर प्रतिबंध की अवधि में निवासियों की आवश्यकताओं को देखते हुए डीजी सेट को सीएनजी में परिवर्तित करना उचित होगा। जिससे वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े।
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आरडब्ल्यूए की तरफ से जल्द दिया जाएगा जवाब
कारवा अध्यक्ष विनय मित्तल ने बताया कि पीसीबी की तरफ से पत्र मिला है। सभी सोसायटी के आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों से बात की जाएगी। उन्होंने बताया कि चिमनी को सोसायटी से दो फुट ऊंचा करने पर करीब दस लाख रुपये का खर्च आता है। वहीं मार्केट में 250 केवीए जेनरेटर की कीमत करीब 35 लाख रुपये है। इतना पैसा आरडब्ल्यूए के पास नहीं होता है। सरकार जेनरेटर की खरीद पर सब्सिडी मुहैया कराए। ऐसा नहीं है तो सरकार की तरफ से जेनरेटर लगाए जाए। जिसका पेमेंट किश्तों में आरडब्ल्यूए से लिया जाए। वह लोग जल्द ही अधिकारियों से मिलकर अपना जवाब देंगे।
क्या है कौशांबी में प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण
कौशांबी इलाके में प्रदूषण बढ़ने के कई मुख्य कारण हैं। कौशांबी इलाका दिल्ली यूपी बॉर्डर पर बसा हुआ है। इलाके के सामने गाजियाबाद की तरफ से औद्योगिक क्षेत्र साइट चार है। जबकि दिल्ली की तरफ पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया है। यहां पर बनी फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं इलाके के प्रदूषण को बढ़ता है। इसके अलावा इलाके के सामने दिल्ली की तरफ अंतर्राज्यीय बस अड्डा है। वहीं महाराजपुर पर कौशांबी बस अड्डा है। यहां से रोजाना हजारों बसें निकलती हैं। बसों के धुएं और हॉर्न की वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। बॉर्डर पर होने की वजह से चौबीस घंटे वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। वाहनों से निकलने वाले धुएं और वाहनों के चलने से उड़ने वाली धूल इलाके के प्रदूषण को बढ़ाती है।
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रेड जोन में रहता है प्रदूषण का स्तर
कौशांबी में पीसीबी की तरफ से मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित नहीं किया गया है। कौशांबी के सामने आनंद विहार इलाके में मॉनिटरिंग स्टेशन सीपीसीबी की तरफ से लगाया गया है। यहां पर ज्यादातर प्रदूषण का स्तर करीब 300 से 500 के बीच रहता है। यह मानकों से तीन से पांच गुना अधिक है और रेड जोन में आता है। जो कि सेहत के लिए खतरनाक होता है।
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