यह किसान की पगड़ी और गरीब की रोटी की लड़ाई है : टिकैत
साहिबाबाद। पुण्यतिथि पर अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद करते हुए भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने यूपी गेट पर कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण था और आगे भी शांति व अहिंसा के साथ चलेगा। 66 दिनों में किसान आंदोलन में कोई भी गड़बड़ी नहीं हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संकेत कर कहा है कि दोबारा बातचीत होगी और उसी से समाधान निकलेगा। यदि बातचीत से सहमति नहीं बनी थी तो उसका मतलब यह नहीं कि कानून जबरदस्ती मान लिया जाए। यह किसानों की पगड़ी और गरीबों की रोटी की लड़ाई है। अगर कोई किसानों की पगड़ी पर हाथ डालेगा तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बीच उन्होंने मंच और आंदोलन स्थल पर जगह-जगह घूमकर किसानों से बातचीत की। वहीं, रोजाना की तरह मंच पर 11 किसानों की सुबह आठ बजे से भूख हड़ताल शुरू हुई, जो कि 24 घंटे के लिए है।
राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन को समर्थन देने के लिए लोग पानी भी साथ ला रहे हैं, यह उनकी भावनाएं हैं। हमने पहले भी झंडे मांगे थे तो हमें दो लाख झंडे मिले थे। पानी से जीवन का रिश्ता है, हमारे शरीर में 70 प्रतिशत पानी है तो आंदोलन में भी पानी की उतनी जरूरत है, जितनी लोगों को भोजन की। लोग पानी लेकर आ रहे हैं। अब वह इस आंदोलन को टूटने नहीं देंगे। 28 जनवरी की रात पुलिस फोर्स की सख्ती के बारे में उन्होंने कहा कि मैंने संविधान का उल्लंघन होते देखा था। यह आंदोलन किसानों की पगड़ी और गरीब की रोटी की लड़ाई है। यदि कोई पगड़ी पर हाथ डालेगा तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राकेश टिकैत ने फिर यह बात दोहराई की कि बातचीत से ही इसका हल निकलेगा, भले सरकार डेढ़ साल बाद ही बात करे।
किराए पर बुलाए गए लोग कर रहे हमले
सिंघु बॉर्डर पर बवाल को लेकर राकेश टिकैत ने कहा कि जो लोग किसानों पर हमले कर रहे हैं, वह स्थानीय नहीं है। बल्कि किराए पर बुलाए गए हैं। इन लोगों की मानसिकता सेट कर दी गई है। इन लोगों को सिखाया गया है कि सिख किसानों ने तिरंगे का अपमान किया है। अब झंडे के खिलाफ वफादारी दिखाकर किराए के लोगों को भड़काया गया है। राकेश टिकैत ने कहा कि अगर किसी को कार्रवाई करने का हक है तो पुलिस जांच कर कार्रवाई करेगी।