सात साल के संघर्ष के बाद ईसाई समुदाय को मिला कब्रिस्तान
गाजियाबाद। सात साल के संघर्ष के बाद आखिर ईसाई समुदाय को कब्रिस्तान मिल गया। 2014 से चली आ रही मांग के बाद नगर निगम ने ईसाई समुदाय की संस्था गाजियाबाद क्रिश्चियन लीडर्स फेलोशिप को अर्थला में 3790 वर्ग मीटर जमीन सौंप दी है। समुदाय के लोगों ने अपने खर्च पर इस जमीन पर तारबंदी का काम शुरू करा दिया है। अब ईसाई समुदाय को शव दफनाने के लिए दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा।
गाजियाबाद में ईसाई समुदाय की करीब एक लाख की आबादी रहती है। पूर्व में समुदाय का कैला भट्ठा क्षेत्र में कब्रिस्तान था, लेकिन अब यहां शवों को दफनाने के लिए जगह नहीं बची है। गाजियाबाद क्रिश्चियन लीडर्स फेलोशिप के जनरल सेक्रेटरी पादरी मानेस्वर दास ने वर्ष 2014 में नगर निगम से कब्रिस्तान के लिए जमीन दिए जाने की मांग की थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में ही नगर निगम ने बोर्ड बैठक में जमीन दिए जाने का प्रस्ताव भी पास कर दिया था। इसके बाद चार साल तक जमीन नहीं दी गई। 2018 में निगम ने कनावनी गांव के पास 8160 वर्ग मीटर जमीन चयनित कर समाज को दी। इस जमीन पर कब्रिस्तान का बोर्ड भी लगा दिया गया था, लेकिन इसके बाद स्थानीय लोगों ने इस जमीन पर अपने मालिकाना हक का दावा कर न्यायालय में वाद दायर कर दिया। मामला न्यायालय में विचाराधीन होने की वजह से इस जमीन को छोड़ दिया गया। अब लंबी लड़ाई के बाद नगर निगम ने अर्थला के खसरा नंबर-1394 में जमीन दी है। तारबंदी कराने के बाद इसमें जल्द ही शव दफनाना शुरू कर दिया जाएगा।
कई साल से दिल्ली में किया जा रहा अंतिम संस्कार : मानेस्वर दास
पादरी मानेस्वर दास ने बताया कि गाजियाबाद में ईसाई समुदाय के कब्रिस्तान भर जाने की वजह से शवों दफनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना संक्रमण काल में अंतिम संस्कार के लिए शवों को दिल्ली ले जाना पड़ा। गाजियाबाद से दिल्ली आने-जाने में परेशानियां झेलनी पड़ीं। गाजियाबाद में कब्रिस्तान बन जाने से यह दिक्कतें खत्म हो जाएंगी।