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सीवर की सफाई करने को रोबोट नहीं आए, शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम भी न खुला

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amar ujala - फोटो : amar ujala
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सीवर की सफाई करने को रोबोट नहीं आए, शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम भी न खुला
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गाजियाबाद। नगर निगम ने सीवर लाइनों का मेंटेनेंस और एसटीपी संचालन का जिम्मा चेन्नई की कंपनी वीए टेक वाबाग को सौंपा तो दावा किया गया कि सफाई रोबोट करेंगे। जनता की शिकायतों के लिए 24 घंटे खुलने वाला कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। करीब डेढ़ साल बीत गया, शहर में न तो सीवर लाइनों की सफाई करने रोबोट आए और न ही कंट्रोल रूम की स्थापना हुई। सीवर लाइनों की मेंटेनेंस की व्यवस्था और भी बदहाल हो गई। हालात यह है कि हर बार की तरह इस बार कंपनी ने बरसात से पहले सीवर लाइनों की डी-सिल्टिंग भी नहीं कराई है।
शासन ने 2019 में ही वन सिटी, वन ऑपरेटर प्रोजेक्ट के तहत गाजियाबाद, आगरा, मेरठ, पिलखुवा समेत कई शहरों की सीवर मेंटेनेंस की जिम्मेदारी चेन्नई की कंपनी वीए टेक वाबाग को दे दी थी। इन शहरों की सीवर मेंटेनेंस और एसटीपी संचालन का ठेका 105 करोड़ रुपये सालाना का दिया गया है। वर्ष 2020 में गाजियाबाद नगर निगम ने इस कंपनी को सीवर लाइन और एसटीपी हैंडओवर कर दिए थे। कंपनी के पदाधिकारियों और नगर निगम के अधिकारियों का दावा था कि यह कंपनी नगर निगम परिसर में ही कंट्रोल रूम स्थापित करेगी। इस पर आने वाली शिकायतों का 24 घंटे में निस्तारण कराया जाएगा। बड़ी सीवर लाइनों की सफाई रोबोट के जरिए होगी। डेढ़ साल से ज्यादा समय बीत गया, रोबोट के जरिए तो दूर, सामान्य मशीनों के जरिए भी सीवर लाइनों की सफाई नहीं कराई जा रही है।
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कॉलोनियों में सीवर मैनहोल से सड़कों पर बह रहा पानी
सीवर लाइनों की नियमित सफाई न होने की वजह से कैला भट्ठा, इस्लाम नगर, नंदग्राम, सुदामापुरी, विजयनगर समेत अधिकांश कॉलोनियों में सीवर मैनहोल से पानी सड़कों पर बह रहा है। इसकी शिकायत स्थानीय लोग और क्षेत्रीय पार्षद नगर निगम अधिकारियों से कर रहे हैं, लेकिन सीवर व्यवस्था प्राइवेट कंपनी के हाथों में होने की वजह से सुनवाई नहीं हो रही। इससे पार्षदों में आक्रोश है।
बोर्ड बैठक में भी गूंजा मुद्दा
बीती 13 जुलाई को हुई नगर निगम की बोर्ड बैठक में भी सीवर लाइनों की सफाई नहीं होने का मुद्दा गूंजा था। भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी का कहना था कि जब तक नगर निगम के हाथों में सीवर व्यवस्था रही, तब तक स्थिति ठीक थी। बरसात के सीजन से पहले नगर निगम सीवर लाइनों की डी-सिल्टिंग कराता था, ताकि बारिश का पानी आसानी से निकल सके। दो साल से प्राइवेट कंपनी लाइनों की सफाई नहीं करा रही है। शिकायत करने के बाद भी कई-कई दिन तक सीवर लाइनों की सफाई नहीं कराई जा रही है।
शिकायत भी नहीं सुनीं जा रहीं
जब से सीवर मेंटेनेंस प्राइवेट कंपनी के हाथों में गई है, तब से और बुरा हाल हो गया है। अब शिकायत पर भी सुनवाई नहीं हो रही है। बीते सप्ताह मैंने अपने वार्ड में सीवर ओवरफ्लो होने की शिकायत की थी, इस पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई।
- जाकिर सैफी, निगम पार्षद, कैला भट्ठा क्षेत्र
विजयनगर में हालात ज्यादा खराब
विजयनगर क्षेत्र में सीवर सिस्टम सबसे खराब है। पास में ही डूंडाहेड़ा में एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) होने की वजह से यहां पीछे की कई कॉलोनियों का पानी आकर ठहर जाता है। प्राइवेट कंपनी एसटीपी का निरंतर संचालन नहीं कर रही है। सिर्फ कागजों में संचालन किया जा रहा है। जिसकी वजह से विजयनगर क्षेत्र में सीवर मैनहोल ओवरफ्लो हो जाते हैं। शिकायत करने पर कंपनी के पदाधिकारी पार्षदों को भुगत लेने की धमकी दे रहे हैं।
- नरेश जाटव, बसपा पार्षद, सुदामापुरी क्षेत्र
समस्याओं का कराया जा रहा निस्तारण
कंपनी को कंट्रोल रूम स्थापित करने के लिए कहा गया है। उनकी ओर से फिलहाल एक टोल फ्री नंबर जारी किया गया है। नगर निगम में आने वाली सीवर की शिकायतों से अवगत कराकर कंपनी के जरिये समस्याओं का निराकरण कराया जा रहा है।
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- योगेंद्र यादव, अधिशासी अभियंता, जलकल
कंट्रोल रूम के लिए नहीं मिली जगह
कंपनी की ओर से टोल फ्री नंबर जारी कर दिया गया है। कंट्रोल रूम की स्थापना के लिए नगर निगम परिसर में स्थान नहीं मिल पाया है। सीवर लाइनों की सफाई के लिए आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। ज्यादा पानी में रोबोट के कैमरे काम नहीं कर पाते हैं। इसलिए रोबोट नहीं लाए गए हैं।
- हरिओम शर्मा, प्रबंधक, वीए टेक वाबाग
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