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साढ़े 17 करोड़ की टैक्स चोरी में इंदिरापुरम से कंपनी के दो निदेशक गिरफ्तार

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साढ़े 17 करोड़ की टैक्स चोरी में इंदिरापुरम से कंपनी के दो निदेशक गिरफ्तार
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गाजियाबाद। बैंकों से लोन दिलाने में सहयोग करने वाले शमस्टार ग्लोबल बिजनेस सॉल्यूशन कंपनी के दो निदेशक को केंद्रीय जीएसटी विभाग की टीम ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। 17.58 करोड़ की टैक्स चोरी के मामले में निदेशक अनिल कुमार दूबे और प्रवीण कुमार राय को कंपनी के इंदिरापुरम स्थित ओमेक्स प्लाजा के दफ्तर से गिरफ्तार किया गया। मौके से टीम को 21 फर्मों के दस्तावेज मिले हैं, जिनके साथ कंपनी कारोबार कर रही थीं। अधिकांश फर्में अस्तित्व में नहीं मिली। एटीएस एडवांटेज सोसायटी इंदिरापुरम निवासी दोनों निदेशकों को गिरफ्तार कर मेरठ में विशेष सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। उन्हें रविवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। एक निदेश फरार है।
करीब एक महीने पहले गाजियाबाद जीएसटी विभाग की टीम को इनपुट मिला था कि ओमेक्स प्लाजा इंदिरापुरम में संचालित कंपनी टैक्स चोरी में लिप्त है। कंपनी का पंजीकरण वित्तीय सलाह मुहैया कराने का है, लेकिन कंपनी आयरन, लोहा, सीमेंट व इलेक्ट्रॉनिक गुड्स सप्लाई करने वाली फर्मों से खरीद दिखाकर फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम हासिल कर रही है। जानकारी के आधार पर विभाग की तरफ से जांच शुरू की गई। जीएसटी पोर्टल पर आईटीसी क्लेम से जुड़े दस्तावेज देखे गए तो पता चला कि कंपनी स्टील, लोहा व इलेक्ट्रॉनिक गुड्स सप्लाई से जुड़े फर्मों के बिल लगाकर 115.25 करोड़ रुपये का टर्नओवर दिखाया, जिसके आधार पर साढ़े 17 करोड़ रुपया का आईटीसी क्लेम हुआ। पोर्टल पर अपलोड बिलों के आधार पर 21 फर्मों का चयन किया गया। उसके बाद शनिवार को कंपनी के दफ्तर समेत 16 जगहों पर टीमों को भेजकर छापे की कार्रवाई शुरू की गई। मौके पर पहुंचीं टीमों को कोई भी फर्म अस्तित्व में नहीं मिली।
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कंपनी निदेशक के स्वीकार करने पर हुई गिरफ्तारी
24 घंटे से अधिक चली कार्रवाई के बाद ए कंपनी के निदेशक अनिल कुमार दूबे में स्वीकार किया कि उनकी कंपनी फर्जी बिल के आधार पर आईटीसी क्लेम करने में लिप्त है। शमस्टार कंपनी ने ज्वेलरी, ऑटोमैटिक डाटा प्रोसेसिंग मशीन, सिनेमाटोग्राफी कैमरा, मॉनिटर, प्रोजेक्ट समेत लोहा व स्टील से जुड़े सामान की खरीद दिखाई है। कंपनी वित्तीय रूप से मार्केट रिसर्च, लीगल एकाउंटिंग, टैक्स ऑडिट, कर, बिजनेस और मैनेजमेंट से जुड़ी सलाह देने का काम करती है। जिसका इन प्रोजेक्ट की खरीद से कोई संबंध नहीं हो सकता।
लोन ही लोन के झूठे दावे
कंपनी की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपना पेज बनाया गया था। फेसबुक पर कंपनी की तरफ से संचालित पेज पर लोन ही लोन के दावे किए जा रहे थे। 2018 में बनी कंपनी की सितंबर 2019 में पहली सालगिरह भी बड़े धूमधाम से मनाई गई।
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नोएडा, दिल्ली की अन्य फर्में भी निशाने पर
जीएसटी कमिश्नर आलोक झा का कहना है कि अभी शुरूआती जांच हुई है। टैक्स चोरी का आंकड़ा अभी और भी बढ़ सकता है। क्योंकि नोएडा और दिल्ली की अन्य फर्मों की भी जांच हो रही है। इनमें अधिकांश दिल्ली की हैं, जो इनकी कंपनी को बिल बनाकर दे रही थीं।
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