नोएडा की एंबुलेंस एजेंसी ने मरीज के परिजनों को लौटाए तीन लाख रुपये
गाजियाबाद। कोरोना महामारी को अवसर के तौर पर भुनाने वाली नोएडा सेक्टर-128 की साईं एंबुलेंस एजेंसी ने मरीज के परिजनों को तीन लाख रुपये लौटा दिए हैं। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप पर एजेंसी ने बीते हफ्ते एक लाख रुपये लौटाए थे, लेकिन जांच कर रही कमेटी ने उस पर असहमति जताई थी, जिसके बाद बुधवार को दो लाख रुपये और लौटा दिए हैं। उधर, प्रशासन ने राजनगर एक्सटेंशन निवासी शिकायतकर्ता स्मिति पांडेय से पूछा है कि क्या एजेंसी की तरफ से बताई गई धनराशि लौटा दी गई है। 24 अप्रैल को एंबुलेंस एजेंसी ने स्मिति के पति को नोएडा से वाराणसी तक छोड़ने के लिए पांच लाख रुपये चार्ज के तौर पर लिए थे।
बीते सप्ताह स्मिति ने डीएम राकेश कुमार सिंह ने मिलकर शिकायत की थी कि उनके पति अप्रैल में कोरोना संक्रमित हुई। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें नोएडा के जेपी अस्पताल लेकर पहुंचे तो वहां पर बेड नहीं मिला। उन्होंने अपने परिजनों की मदद से बीएचयू में बेड का इंतजाम कर लिया, लेकिन मरीज की हालत ज्यादा खराब थी। इसके लिए एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम वाली एंबुलेंस की जरूरत थी। ऑनलाइन साईं एंबुलेंस एजेंसी से बुकिंग की गई, जिसमें पांच लाख रुपये मांगे। शिकायतकर्ता ने लिखा कि उस वक्त मरीज की जान बचाने के लिए उन्होंने एजेंसी को मुंह मांगी रकम दी। शिकायत को डीएम ने प्रशासन की तरफ से ओवर बिलों की जांच कर रही अपर नगर मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली कमेटी को भेज दिया। अब कमेटी ने साईं एंबुलेंस एजेंसी को मेल कर जवाब मांगा तो उसने बीते हफ्ते एक लाख रुपये लौटा दिए, लेकिन कमेटी ने कहा कि वो अपना पक्ष आकर रखें। इसके बाद एजेंसी से दो लाख रुपया और लौटा दिए। अब तक कुल तीन लाख रुपये एजेंसी की तरफ से लौटाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने भी तीन लाख रुपये लौटाए जाने की पुष्टि कर की है।
जांच में फंसे अस्पतालों पर भी शिकंजा
ओवर बिलिंग की जांच कर रही कमेटी के पास अब तक 40 से अधिक शिकायतें पहुंची है, जिनकी जांच चल रही है। सभी संबंधित अस्पतालों को संबंधित क्षेत्र के थाना प्रभारी के माध्यम से नोटिस तामील कराया जा रहा है। अब तक 15 अस्पतालों का दूसरा नोटिस भेजा जा चुका है। बाकी करीब 10 अस्पतालों को पहला नोटिस भेजा गया है। कुछ अस्पतालों ने रकम लौटाने के बाद शिकायतकर्ता के साथ हुआ समझौतानामा भी कमेटी को दिया है, लेकिन कमेटी का कहना है कि जांच सभी की होगी। क्योंकि कोरोना संक्रमण के वक्त निर्धारित दरों से अधिक वसूलना नियम कानूनों का उल्लंघन है। प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया के बाद 15 जुलाई तक कमेटी किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचेगी।
जांच हो रही
जांच के बीच में नोएडा की साईं एंबुलेंस एजेंसी ने शिकायतकर्ता स्मिति पांडेय को तीन लाख रुपये लौटा दिए हैं। वहीं, बाकी अस्पतालों ने भी अभी तक करीब 10 लाख रुपये की धनराशि लौटा दी है, लेकिन 40 से अधिक शिकायतों पर अभी जांच जारी है। कुछ अस्पतालों को दूसरा नोटिस भी तामील कराया जा चुका है। - विनय कुमार, अपर नगर मजिस्ट्रेट