स्टॉक में 3500 रेमडेसिविर, सात दिन में बिका सिर्फ एक
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमित मरीजों का ‘जीवनरक्षक’ कहे जा रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग खत्म हो गई है। जिला स्वास्थ्य विभाग के पास 3500 इंजेक्शन का स्टॉक है, लेकिन खरीदने वाला कोई नहीं। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के पीक पर पहुंचने के दौरान जहां रोजाना 350 से 375 इंजेक्शन रोजाना बिक रहे थे, वहीं बीते सात दिन में स्वास्थ्य विभाग के पास इंजेक्शन लेने सिर्फ एक तीमारदार पहुंचा है।
रेमडेसिविर इंजेक्शन 20 दिन पहले खोजने से नहीं मिल रहा था। कोरोना संक्रमण के चरम पर पहुंचने के दौरान लोगों ने एक इंजेक्शन ब्लैक में 40 हजार रुपये तक में खरीदा है। शहर में कई ऐसे गिरोह पकड़े गए जो एक इंजेक्शन के 30 से 40 हजार रुपये ले रहे थे। मई की शुरुआत में बाजार में इंजेक्शन मौजूद न होने से संक्रमित हुए गाजियाबाद के मरीजों के लिए तीमारदारों को मुजफ्फरनगर से लेकर गुरुग्राम तक दौड़ लगानी पड़ी थी। प्रशासन भी इंजेक्शन का इंतजाम नहीं कर पा रहा था। डॉक्टरों ने बताया कि 20 अप्रैल से 5 मई तक अलग-अलग अस्पतालों में करीब 11 हजार मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया गया। इनमें सीएमओ कार्यालय द्वारा एक अप्रैल से अब तक मरीजों को 2882 इंजेक्शन दिए गए हैं। उस समय ऐसे मरीजों की संख्या ज्यादा थी जिनमें ऑक्सीजन का स्तर अन्य दवाओं से नहीं सुधर रहा था। इसकी वजह से डॉक्टर भी तीमारदारों से रेमडेसिविर मंगा रहे थे। प्रशासन ने इंजेक्शन की सप्लाई बढ़ाई, लेकिन अब डिमांड घट गई।
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डब्ल्यूएचओ ने भी इस्तेमाल पर जारी की गाइडलाइन
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अरविंद डोगरा का कहना है कि यह इंजेक्शन हेपेटाइटिस सी और इबोला वायरस का इलाज करने के लिए बनाया गया था। अगर संक्रमित को शुरुआत में ही लगा दिया जाता है तो इंजेक्शन से ऑक्सीजन का लेवल बढ़ता है। बाद में यह काम नहीं करता है। अब तो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और डब्ल्यूएचओ ने भी मना कर दिया है। डॉक्टर अपने विवेक के अनुसार इंजेक्शन का प्रयोग कर रहे हैं। इसके अलावा अब मरीजों की स्थिति भी गंभीर नहीं हो रही है।
साइड इफेक्ट भी हैं रेमडेसिविर के
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बीवी जिंदल का कहना है कि इस इंजेक्शन के गंभीर साइड इफेक्ट भी हैं। रेमडेसिविर का दुष्प्रभाव किडनी पर भी पड़ सकता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने व लीवर में एंजाइम की परेशानी हो सकती है इसलिए बहुत सोच समझकर मरीजों को यह दवा देनी चाहिए। इंजेक्शन देने के बाद मरीजों को सर्दी और बुखार की शिकायत भी होती है।
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स्टॉक पर्याप्त, ऐसे लें सकते हैं इंजेक्शन
सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता का कहना है कि कार्यालय में 3500 वायल रेमडेसिविर मौजूद हैं। अगर किसी मरीज को डॉक्टर इंजेक्शन लगवाने की सलाह दे रहे हैं तो तीमारदार रेडक्त्रसॅस सोसायटी के नाम प्रति इंजेक्शन 1800 रुपये की पर्ची कटवाकर जरूरत के अनुसार ले सकते हैं।
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रेमडेशिविर इंजेक्शन लगा - 10966
रिकवर हुए - 10926
रेमडेसिविर की मांग
30 अप्रैल - 375
एक मई - 389
दो मई - 275
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25 मई - 01
26 मई - 00
27 मई - 00
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इंजेक्शन लगवाने वाले मरीजों की उम्र
20 से 30 - 35
31 से 40 - 153
41 से 50 - 1265
51 से 60 - 2650
61 से 70 - 3326
71 से 80 - 1231
81 से 90 - 2306
सक्त्रिस्य मरीज घटे तो अस्पताल खाली हुए
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कुल कोविड अस्पताल - 58
कुल बेड - 3409
मरीज भर्ती - 1111
खाली - 2298
आईसीयू बेड - 785
भरे - 501
खाली - 284
वेंटिलेटर - 229
ऑक्सीजन कन्संट्रेटर - 87