कोरोना के कहर से अनाथ हुए सिर्फ 14 बच्चों को तलाश पाया प्रशासन
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कहर ने कई घरों को उजाड़ दिया। बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिनमें बच्चों के सिर से माता-पिता दोनों का साया उठ चुका है। जिला प्रशासन करीब 47 दिन में महज 14 ऐसे बच्चों को तलाश पाया जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी है।
इन बच्चों की शिक्षा और भरण पोषण के लिए सरकार योजना शुरू करने जा रही है जिसके लिए सभी जिलों से कोरोना की वजह से अनाथ हुए बच्चों की सूची मांगी गई है। जिले में अभी तक ऐसे 14 बच्चों की सूची बनाई गई जिनकी सूचना विभाग को मिली है। इस सूची में क्रॉसिंग रिपब्लिक स्थित पंचशील वेलिंग्टन के दो बच्चे भी शामिल हैं। जिन्होंने अपने दादा-दादी, माता-पिता चारों को खो दिया है। इनमें से 10 बच्चों की सूचना एक साथ 24 मई को विभाग को मिली है। महिला कल्याण अधिकारी नेहा वालिया ने बताया कि अभी तक लगातार विभाग को सूचना मिल रही हैं। आंकड़ा और बढ़ सकता है।
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इनसेट:
कामाक्षी (13 वर्ष), प्रदूषा (सात वर्ष), (माता- पिता निर्मला धर और अश्वनी धर)
मनन गोस्वामी (15 वर्ष) श्रेका गोस्वामी (नौ वर्ष) (माता-पिता- ज्योति गोस्वामी और सुरज गिरि गोस्वामी
एकाग्र कुलश्रेष्ठ 14 वर्ष, माता-पिता मंजूला और सौरभ
आदित्य कुमार- 10 वर्ष, ध्रुव कुमार 12 वर्ष, कनिका 14 वर्ष , माता-पिता सुमन लाला, सोमपाल सिंह
शाहवेज 17 वर्ष सुहैब 12 वर्ष, कहकशां 8 वर्ष, माता-पिता शबनम और शमशाद
जोया हसन 17 वर्ष शमा हसन, शैयद शाफुकुल हसन
अभय 15 वर्ष, खुशी 13 वर्ष , माता ---
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इनसेट:
सोशल मीडिया पर फर्जी मैसेज
बच्चों को गोद लेने संबंधी कई फर्जी मैसेज सोशल मीडिया पर चल रहे हैं। डीपीओ विकास चंद्र ने बताया कि इन मैसेज में लिखा जा रहा है कि कोरोना की वजह से माता-पिता की मृत्यु हो गई है और बच्चे अनाथ हो गए जो भी गोद लेना चाहे वह लिखे हुए नंबर पर संपर्क करे। यह काफी फर्जी मैसेज है। बच्चों की गोद लेने की प्रक्रिया कारा नामक वेबसाइट के जरिए ही पूरी होती है। अन्य किसी प्रकार से बच्चा गोद लेने को गैर कानूनी माना जाता है।
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मांगी गई है सूची
शासन की तरफ से सभी जिलों से ऐसे बच्चों की सूची मांगी गई है जिनके माता-पिता कोरोना की वजह से नहीं रहे या फिर उनका पूरा परिवार खत्म हो गया है। इन बच्चों को शासन की तरफ से सहायता देने सहित शिक्षा आदि की सुविधा भी देने की योजना बन रही है। इसकी घोषणा शासन की तरफ से की जाएगी। जिन बच्चों को कोई सहारा नहीं है उनको अनाथ आश्रम में रखकर उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सभी सुविधाओं का ध्यान भी रखा जाएगा।
अस्मिता लाल, सीडीओ