केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से मिलने वाले फंड का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। नगर निगम ने करीब 2.12 करोड़ रुपये खर्च कर 11 मिनी ट्रक खरीदे, लेकिन एक साल यह वाहन गैराज से बाहर नहीं निकले। जिन डस्टबिन को उठाने के लिए इन वाहनों को खरीदा गया था, वह शहर में है ही नहीं और छोटे डस्टबिन को उठाने में ये वाहन सक्षम नहीं हैं। ऐसे में यह 2.12 करोड़ के यह वाहन निगम के गैराज में धूल फांक रहे हैं।
नगर निगम को 2019 में 14वें वित्त आयोग से करोड़ों रुपये का फंड मिला था। सफाई से जुड़े कार्यों, नाला निर्माण आदि की मद में खर्च किया जाना था। 31 मार्च तक यह फंड खर्च न किया जाए तो निगम को बचा फंड लौटाना होता है। मार्च 2020 में जब वित्तीय वर्ष समाप्त होने को था तब नगर निगम ने 11 वाहन (टाटा-709) के चेसिस खरीदे। इन पर 4.5 क्यूबिक मीटर के डस्टबिन उठाने के लिए सिस्टम भी लगाया गया। प्रत्येक वाहन के लिए नगर निगम ने 19.34 लाख रुपये खर्च किए।
कुल 11 वाहनों के लिए नगर निगम ने 2.12 करोड़ रुपये खर्च किए। एमके टेक इंडस्ट्रीज नाम की फर्म ने करीब एक साल पहले इन 11 वाहनों की आपूर्ति नगर निगम को दे दी। लंबे समय तक वाहन नगर निगम के गोविंदपुरम स्थित एक गैराज में खड़े रहे। अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं मिल पाई। करीब तीन माह पूर्व नगर आयुक्त ने निरीक्षण के दौरान इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद इन वाहनों को प्रत्येक जोन में आवंटित तो कर दिया, लेकिन अभी भी यह वाहन गैराज में खड़े धूल फांक रहे हैं। नगर निगम इन वाहनों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है।
घर-घर से कूड़ा उठाने के दौर में वाहन खरीद सवालों के घेरे में
नगर निगम अब डस्टबिन और खुले में कूड़ा डालने की व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म कर रहा है। निगम अब तक करीब 200 से ज्यादा कूड़ाघरों और सेकेंडरी कूड़ा कलेक्शन सेंटर को खत्म कर चुका है। मानकों के मुताबिक, नगर निगम को अब घरों, दुकानों से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करके सीधे प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाना है। ऐसे में बडे़ डस्टबिन की जरूरत ही नहीं है। इसके बाद भी नगर निगम ने डस्टबिन को उठाने के लिए वाहन खरीद लिए हैं, जबकि इनका इस्तेमाल अब नहीं होना है। सिटी जोन में नगर निगम ने डस्टबिन उठाने के लिए दो वाहनों का आवंटन किया है, जबकि पूरे सिटी जोन क्षेत्र में सिर्फ आठ डस्टबिन मौजूद हैं।
वाहनों की गारंटी अवधि भी हो गई खत्म
नगर निगम ने वाहनों की आपूर्ति देने वाली गाजियाबाद की फर्म मैसर्स एमके टेक इंडस्ट्रीज से यह 11 वाहन खरीदे हैं। फर्म और नगर निगम के बीच हुए खरीद के अनुबंध के मुताबिक, इन वाहनों की एक साल की गारंटी दी गई थी। इस एक साल की अवधि में अगर वाहनों में कोई कमी आती तो फर्म उसे अपने खर्च पर ठीक कराती। गारंटी की इस अवधि में यह वाहन गैराज से बाहर ही नहीं निकले। गैराज में खड़े-खड़े ही वाहनों की गारंटी अवधि पूरी हो गई। ऐसे में अब अगर किसी वाहन में कोई कमी आई तो नगर निगम फर्म के ऊपर उसे ठीक कराने का दबाव नहीं बना पाएगा।
डस्टबिन के लिए खरीदे वाहन पर अब फॉगिंग मशीन लगाई
नगर निगम के यह वाहन डस्टबिन उठाने के काम नहीं आ रहे हैं। निगम के अधिकारियों ने इनमें से एक वाहन पर अब फॉगिंग मशीन रखवा दी है। जबकि फॉगिंग मशीनों के लिए नगर निगम में पहले से कई वाहन रिजर्व हैं। फॉगिंग मशीनों के लिए नए वाहनों का इस्तेमाल करना यूं भी खतरे से खाली नहीं है। करीब दो साल पहले फॉगिंग मशीन में आग लगने से वाहन पूरी तरह जल गया था। ऐसा हादसा दोबारा हुआ तो नया वाहन आग की चपेट में आ सकता है।
डस्टबिन उठाने वाले निगम के कई वाहनों की मियाद पूरी हो गई है। उन्हें नीलाम कर नए वाहनों का इस्तेमाल कराया जाएगा। इन वाहनों के लिए डस्टबिन बनवाए जा रहे हैं। जल्द ही नगर निगम में डस्टबिन की आपूर्ति हो जाएगी।
डॉ. मिथिलेश कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी