नौवीं पास महिला बनी कारोबारी, पति को खुलवाई दुकान
गाजियाबाद। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं कई बार हुनर होते हुए भी पिछड़ जाती हैं। मगर भोजपुर ब्लॉक की रहने वालीं ब्रिजेश एक ऐसी महिला हैं जिन्होंने अपने लगन और मेहनत की वजह से महज तीन साल में न सिर्फ अपने लिए कारोबार सेट किया बल्कि पति के लिए दुकान भी खुलवाई।
20 साल पहले जब वह नवमीं में थीं, तभी उनकी शादी हो गई थी। बीच-बीच में पैसों की दिक्कत हुई तो घर पर ही सिलाई और ब्यूटी पार्लर का काम कर लेती थीं लेकिन उसको व्यवस्थित ढंग से नहीं कर पाती थीं। इसके बाद उनको तीन साल पहले गांव के प्रधान से स्वयं सहायता समूह की जानकारी मिली। उससे जुड़कर उन्होंने सिलाई और ब्यूटी पार्लर की अच्छे से ट्रेनिंग ली। फिर अपना स्वयं सहायता समूह बनाया। दो लाख का लोन लेकर उसके बाद कपड़े सिलाई का काम शुरू किया। ब्रिजेश ने बताया कि इसके बाद मैंने गांव की और महिलाओं को भी इसकी जानकारी दी। अभी तक लगभग 20-25 स्वयं सहायता समूह महिलाएं बना चुकी हैं। मेरे साथ 150 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं।
विभाग की तरफ से बिजली मीटर रीडिंग की भी ट्रेनिंग मिली। लॉकडाउन के दौरान मैंने ग्रामीण क्षेत्रों में अभी तक पांच लाख से अधिक रिकवरी कर विभाग में जमा कराए हैं। इसके लिए हमें कमीशन भी मिलता है।
मिठाई की दुकान खुलवाई
पति की कोरोना के दौरान नौकरी छूट गई थी वह घर पर थे। वह एक फैक्टरी में काम करते थे। मैंने अपने पति के लिए मिठाई की दुकान बनवा दी है। हमारे पास अपनी जमीन थी लेकिन दुकान निर्माण के लिए पैसे नहीं थे। दुकान बनने के बाद अब पति भी मेरे काम में मेरी मदद करते हैं। अभी विभाग की तरफ से मशरूम की खेती के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है मैं भी ट्रेनिंग ले रही हूं।
बेटी बीकॉम कर रही है, मां करेंगी दसवीं
ब्रिजेश ने बताया कि वह नवमीं में पढ़ रही थी तभी शादी हो गई थी। उसके बाद एक बेटा, एक बेटी हुए। बेटी अभी बीकॉम कर रही है। साथ ही सीए की भी तैयारी कर रही है। इसी बीच अब मैंने दसवीं का फार्म भरा है। मुझे खुद पढ़ने का शौक था और लोगों और घरवालों ने भी प्रोत्साहित किया है इसलिए 20 साल बाद फिर से पढ़ाई शुरू कर दी है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के तहत जिले में 1079 स्वयं सहायता समूह बने हुए हैं। इन सभी में काफी महिलाएं हैं जो इससे जुड़कर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। इसमें ब्रिजेश का काम भी काफी सराहनीय है।
- अस्मिता लाल, सीडीओ