श्मशान में हादसा होते ही आसपास मौजूद लोग जाति-धर्म से ऊपर उठकर मलबे मेें दबे लोगों की जिंदगी को बचाने के लिए जुट गए। हादसे की सूचना मिलते ही समीर, शादाब और तनवीर हथौड़ी-छेनी लेकर श्मशान में पहुंच गए और चार लोगों को जिंदा निकाल लिया।
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राहतकर्मी तनवीर
- फोटो : amar ujala
समीर और तनवीर कहते हैं कि उस समय ऊपर वाले ने एक अलग हिम्मत दी थी, जिसके दम पर हथौड़ी चला रहे थे। नीचे सन्नाटा था और ऊपर भगदड़ मच रही थी। हरेक शख्स मलबे में दबे लोगों को बचाने के लिए प्रयास कर रहा था। पुलिस-प्रशासन के आने से पहले कई लोगों को बाहर निकाला जा चुका था।
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राहतकर्मी समीर
- फोटो : amar ujala
बंबा रोड श्मशान के पास चर्च कॉलोनी में रहने वाले मोहम्मद समीर ने बताया कि वह श्मशान के पास ही कुछ काम कर रहे थे, छत गिरने की आवाज आई तो वह उधर दौड़ पड़े। देखा कि लोग मलबे नीचे दबे हुए हैं। उन्होंने शोर मचाया और अन्य लोगों को बुला लिया। वह खुद भी हथौड़ी और छैनी लेकर दौड़े और उनके साथ मोहम्मद तनवीर व शादाब भी आ गए। धीरे-धीरे लोगों की संख्या बढ़ती चली गई। समीर बताते हैं कि जब तक वहां भीड़ एकत्र होती तब तक वह चार लोगों को जिंदा निकाल चुके थे। कई मृत लोगों के शव को भी निकाला। आदर्श कॉलोनी निवासी मोहम्मद तनवीर ने बताया कि पहले समझ में नहीं आ रहा था कि करना क्या है, लेकिन ऊपर वाला हिम्मत देता चला गया और हम लोगों को बाहर निकालते रहे।
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राहतकर्मी शादाब
- फोटो : amar ujala
शादाब बताते हैं कि खून देखकर मन विचलित हो रहा था, दिल रो रहा था। बस उम्मीद थी कि लोगों को बचाकर अस्पताल तक पहुंचा दें। स्थानीय निवासी योगेंद्र सिंह ने बताया कि मौन धारण के वक्त ही हादसा हो गया। चीख-पुकार करते हुए तुरंत मौके पर पहुंचकर उन्होंने चार लोगों को बचाया। फिर पुलिस-प्रशासन के पहुंचने से पहले करीब एक दर्जन लोगों को अन्य लोगों की मदद से बाहर निकाला।
सुशील कुमार ने बताया कि हादसे की सूचना के 15 मिनट के अंदर मौके पर पहुंच गए थे। अन्य लोगों की मदद से तीन लोगों को बाहर निकाला। कई लोग मौके पर ही दम तोड़ चुके थे। उन्हें एंबुलेंस के जरिये अस्पताल भेजने में मदद की।