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कठोर हो न्याय व्यवस्था, तभी मिलेगी निर्भया के गुनहगारों को फांसी

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अपराधी को न मिले समय, दोष सिद्घ होते ही दी जाए फांसी
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गाजियाबाद। जब तक देश में कठोर कानून नहीं होगा, तब तक महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध बढ़ते रहेंगे। दुष्कर्म के मामले में दोष सिद्घ होने पर आरोपी को तत्काल फांसी दे देनी चाहिए। उसे और समय नहीं मिलना चाहिए। अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत संवाद का आयोजन हुआ, जिसमें महानगर के मानव अधिकार संरक्षण संस्था, लायनेस क्लब गाजियाबाद, ईलाक्षी क्लब, सिग्नेचर क्लब, जन मानव उत्थान समिति आदि से जुड़ी महिलाओं ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि जब निर्भया के चार गुनहगार दोषी साबित हो चुके हैं, तो ऐसे दरिंदों को जीने का अधिकार नहीं है। संवाद में शामिल सभी महिलाओं ने एक स्वर से कठोर कानून बनाने पर जोर दिया।
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निर्भया जैसी घटनाओं को रोकने के लिए दोष सिद्घ होते ही सजा देनी चाहिए। यदि आप सजा देने में देरी करते हैं तो उन्हें तमाम मौके मिल जाते हैं। इसलिए छह महीने के अंदर ऐसे दरिंदों को फांसी दी जाए। राधा जौली
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निर्भया कांड के बाद पूरा देश हिल गया था। हर कोई आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द सजा चाहता था, लेकिन सात वर्ष बीतने के बाद भी दोषियों की सजा आगे बढ़ रही है। इससे अपराधियों का मनोबल बढ़ता है। संजू शर्मा
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दोष सिद्घ होने के बाद भी फांसी देने के लिए बार-बार तारीख आती है। ऐसे केसों में देर नहीं होनी चाहिए। सोचना चाहिए निर्भया के मां-बाप पर क्या बीत रही होगी। दोषियों को जल्द फांसी दी जाए। मीना
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दोषियों की याचिका खारिज हो रही है। फिर भी वह सजा से बचने के लिए जानबूझकर कोई न कोई बहाना ढूंढ रहे हैं। जल्द कार्रवाई की जाए, जिससे अपराधियों में दहशत रहे। बिंदू राय
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कानून में संशोधन होना चाहिए। किसी व्यक्ति ने बड़ा कृत्य किया, उस पर दोष सिद्घ हो गया। फिर भी वह जिंदा है। ऐसे दरिंदों को जिंदा रहने का अधिकार नहीं है। हिमांशी शर्मा
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जब कोई नाबालिग इतने बड़े जुर्म कर सकता है, तो उसे सजा से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। क्योंकि वह फिर दरिंदगी कर सकता है। उसके लिए भी सजा का प्रावधान होना चाहिए। बबीता चौधरी
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फांसी का कानून तो बना दिया गया है, लेकिन लगातार फांसी को टाला जा रहा है। न्याय देने के लिए कानून बना है, तो अपराधी को सजा और पीड़ित को न्याय मिलना चाहिए। रेनू शर्मा
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दुष्कर्म जैसी घटनाओं पर तत्काल एक्शन होना चाहिए। कई मामले देखे हैं जिसमें राज्य सरकार केंद्र पर और केंद्र सरकार राज्य पर मामले को टालते रहते हैं।
डा. सरिता शर्मा
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दोषियों को टाइम पर टाइम दिया जा रहा है। पता नहीं कब उनको फांसी देने का समय आएगा। इस मामले में देरी करना बहुत गलत है। उन्हें जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जाए। संध्या श्रीवास्तव
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ऐसी घटना के दोषियों को सजा में देरी करने पर अन्य अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं। उन्हें सह भी मिलती है। जल्द एक्शन हो, जिससे उनके अंदर डर पैदा हो। वह दोबारा दुष्कर्म जैसे कृत्य को अंजाम न दे सकें। सिम्मी बालिया
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मैं भी मां हूं और मां का दर्द अच्छे से समझती हूं। निर्भया कांड के बाद से मेरी बेटी काफी डरी हुई है। वह कहती है कि विदेश में रहें। दोषी को सजा मिलना बहुत जरूरी। नंदिता गुप्ता
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जब कोई घटना होती है तो सड़कों पर कैंडल मार्च और तमाम आयोजन करते हैं। कुछ दिन बाद शांत हो जाता है। हर व्यक्ति को तब तक लड़ाई लड़नी चाहिए जब तक पीड़िता को न्याय न मिल जाए। पुनीता त्यागी
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सजा ऐसी होनी चाहिए कि उसे सुनने के बाद कोई भी व्यक्ति इस तरह के कृत्य को करने से पहले 100 बार सोचे। जब तक कठोर दंड नहीं मिलेगा, तब तक लोगों के अंदर डर पैदा नहीं होगा। सीमा गर्ग
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जब नाबालिग को अपराध के बारे में जानकारी है तो उसे सजा देने में देरी क्यों? सरकार उन्हें हर हाल में सजा दिलाए। सरकार से मांग है कि उन्हें जल्द से जल्द फांसी दिलाई जाए। राखी गर्ग
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दुष्कर्म जैसा जघन्य अपराध करने वाले आरोपियों पर दोष सिद्घ होते ही उनको फांसी की सजा दी जाए। इसके लिए एक ऐसी कमेटी का गठन हो जो कुछ दिन में ही दोषी को सजा दिला सके। अमिता भटनागर
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