मेडिकल कॉलेज के जल्द बनने की जगी आस
गाजियाबाद। नए बजट से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव की उम्मीद है। धरातल पर लागू होने के बाद जिले को मेडिकल कॉलेज भी मिल जाएगा। मेडिकल कॅालेज बनने से निश्चित तौर पर एक बड़ी आबादी को इलाज में सहूलियत मिलेगी। मेडिकल कालेज की मांग पिछले लंबे समय से की जा रही थी। अभी तक कमोवेश स्थिति यह है कि गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली या मेरठ का मुंह ताकना पड़ता है।
वर्तमान में जिले की आबादी 40 लाख से अधिक है। जिले में तीन जिला अस्पताल हैं। एमएमजी अस्पताल में प्रतिदिन ढाई से तीन हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसकेअलावा महिला अस्पताल में भी 500 से 700 महिलाओं का इलाज होने के साथ ही प्रतिदिन 10 से 12 प्रसव भी होते हैं। वहीं, संयुक्त अस्पताल में एक हजार से 1500 मरीजों का इलाज किया जाता है। इसमें करीब 300 से 400 महिलाएं भी शामिल होती हैं। इन अस्पतालों में उन्हीं मरीजों का इलाज हो पाता है, जिसकी इलाज की सुविधा होती है अन्यथा किसी भी बीमारी में गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
आयुष्मान योजना के पात्रों को मिलेगा बेहतर इलाज
जिले में भारत आयुष्मान योजना केंद्र सरकार ने 2018 में लागू किया था। इस योजना के तहत जिले में करीब 95 हजार कार्ड धारकों को 26 प्राइवेट एवं सात सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पात्र हैं। हकीकत के धरातल पर कुछ गिने-चुने अस्पतालों में ही इलाज हो पाता है। अगर मेडिकल कालेज बन जाता है तो निश्चित रूप से इन 95 हजार गोल्डन कार्ड धारकों को इलाज में सहूलियत मिलेगी। हालांकि जिले में कुल 3.50 लाख पात्रों के कार्ड बनाए जाने हैं।
मेडिकल कालेज से मिलेगा हजारों को रोजगार
मरीजों के इलाज केे साथ-साथ डाक्टर से लेकर पैरा मेडिकल स्टाफ सहित अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति होने पर हजारों लोगों को रोजगार मिलने की भी संभावना जगी है। हालंकि मेडिकल कालेज के लिए फैकल्टी डाक्टर की नियुक्ति भी बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि वर्तमान में अधिकांश मेडिकल कालेजों में डॉक्टरों सहित प्रोफेसरों के तमाम पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं। ऐसे में अगर मेडिकल कॉलेज के लिए किसी तरह जमीन मिल भी जाती है तो डाक्टर लाना बड़ी चुनौती होगी।
कोट
बजट में सरकार ने जो घोषणा की है, वह जनहित में है लेकिन अभी जो मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। उनमें भी अभी तक डॉक्टरों की कमी है। उनमें भी प्रोफेसर नहीं मिल रहे हैं। उतने ही मेडिकल कॉलेज खोले जाएं, जितने में बेहतर डाक्टर तैयार हो सकें।
- डा. वाईसी गुप्ता, पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल
अभी बजट में घोषणा की गई है। पहले से भी सरकारी स्तर पर मेडिकल कॉलेज खोले जाने का प्रस्ताव लंबित है। अब सरकार ने पीपीपी मॉडल पर जिला अस्पताल के साथ मेडिकल कॉलेजों को जोड़ने की बात कही है। इससे चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव होगा।
- डा. एनके गुप्ता, सीएमओ
अभी तक दो अस्पतालों में महिलाओं को इलाज के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता है और कई बार डाक्टर सुविधाओं की कमी से रेफर कर देते हैं, मेडिकल कॉलेज बनने से इलाज में सहूलियत मिलेगी।
- पूनम गोयल, गृहणी
जैसे सभी योजनाएं सरकार क्रियान्यवित कर रही है, उसी तरह से मेडिकल कॉलेज के लिए भी संसाधनों की सुविधा मिल जाएगी। ऐसे में पहले ही नकारात्मक छवि बनाना सही नहीं है।
- रश्मि राजपूत, गृहणी
जिले में सिर्फ एक फिजीशियन हैं। अभी शासन स्तर से डाक्टरों की कवायद चल रही है। अब सरकार ने मेडिकल कॉलेज बनाए जाने की कवायद की है। इससे लाखों की आबादी को इलाज में फायदा मिलेगा। - रितु नागर, शिक्षिका
पीपीपी मोड के अस्पताल खोलने से वंचित और दूर के क्षेत्रों के लिए वास्तव में मदद मिलेगी लेकिन अस्पतालों को खोलने पर कुछ उदारता दी जानी चाहिए और उनका शोषण नहीं होना चाहिए। - डा. संजीव त्यागी, वरिष्ठ मनोचिकित्सक