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आंकड़ों की बाजीगरी, धरातल पर इलाज के लिए करनी पड़ रही मशक्कत

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आंकड़ों की बाजीगरी, धरातल पर इलाज के लिए करनी पड़ रही मशक्कत
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कितनी सुधरी सेहत- भाग-2
- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना : लोगों को पंजीकरण और गोल्डन कार्ड की नहीं है जानकारी
शोभित शर्मा
गाजियाबाद। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) में केंद्र सरकार ने जितनी शिद्दत से काम शुरू किया धरातल पर उतने अनुकूल परिणाम दिखाई नहीं देते हैं। लाभार्थी परिवारों की संख्या जोड़कर योजना की सफलता के आंकड़े तैयार कर दिए जा रहे हैं। वास्तविक रूप में अभी तक योजना से लाभ उठाने वाले लोगों की संख्या बेहद सीमित है। बीते एक साल में 49 हजार लोगों के पास गोल्डन कार्ड होते हुए भी महज 2100 के आसपास को ही इलाज मिल सका है, क्योंकि भर्ती होने से पहले मरीजों को मशक्कत करनी पड़ती है। इसके पीछे तमाम सारी वजह हैं, जिन पर अभी तक काम नहीं हो सका। उधर, गोल्डन कार्ड धारकों को भी यह जानकारी नहीं कि उन्हें कैसे समुचित इलाज मिलेगा। इसके लिए भी लोगों को भटकना पड़ रहा है।
जिले में आयुष्मान भारत योजना को लागू हुए करीब एक साल पूरा होने जा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना की जानकारी लोगों को पूरी तरह से नहीं दे पाया है। सरकारी अस्पताल में बने काउंटर पर प्रतिदिन दस से 15 लोग योजना के लिए आवेदन और गोल्डन कार्ड बनवाने की जानकारी के लिए पहुंचते हैं। हालांकि अभी किसी तरह के नए आवेदन संबंधी प्रक्रिया नहीं चल रही है और आयुष्मान भारत का रजिस्ट्रेशन पोर्टल भी बंद है। अधिकारी योजना तक लोगों को पहुंचाने में नाकाम रहे हैं और उसी का नतीजा है कि लाभार्थी परिवारों के गोल्डन कार्ड की गति भी बेहद धीमी है। योजना के तहत करीब 2100 मरीज ही लाभ ले सके हैं। बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें योजना में अपना नाम होने का भी अभी पता नहीं है। उधर, पैनल में शामिल अस्पतालों की शर्तें बड़ी सख्त हैं। सारी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही योजना के तहत मरीजों को भर्ती किया जाता है। लोगों को भर्ती होने से पहले की जांच अपने खर्चे पर करानी पड़ती है, जिसमें काफी धनराशि खर्च होती है। आरोप यह भी लगते रहे हैं कि अस्पताल लाभ कमाने के लिए सारी जांच भर्ती होने से पहले ही कराना चाहते हैं। इससे भी मरीज को इलाज कराने में परेशानी हो रही है।
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हर लाभार्थी के लिए गोल्डन कार्ड जरूरी
आयुष्मान भारत योजना में शामिल हर लाभार्थी के परिवार के सदस्यों के पास गोल्डन कार्ड होना जरूरी है। कार्ड की मदद से बिना देरी किए मरीज को एडमिट किया जा सकेगा। इसके अलावा अगर किसी दूसरे शहर में आप गए हैं और बीमार पड़ गए तो उस शहर में भी गोल्डन कार्ड की मदद से पैनल में शामिल किसी भी अस्पताल में तुरंत इलाज मिल सकेगा।
ऐसे कर सकते हैं जानकारी
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आयुष्मान भारत में आपका नाम शामिल है या नहीं इसके लिए आपको वेबसाइट से मदद मिल सकती है। आप द्वद्गह्म्ड्ड.श्चद्वद्भड्ड4.द्दश1.द्बठ्ठ पर जाकर अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज कर जानकारी कर सकते हैं।
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आयुष्मान भारत के लाभार्थियों को जागरूक करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है, जिससे लाभार्थियों और उनके परिवार के लोगों को सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में निशुल्क इलाज मिल सके। कुछ अस्पतालों के स्तर पर भी परेशानी आ रही है उसे भी दूर किया जा रहा है। - आरके यादव, जिला नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना
व्हाट्सएप पर लोगों से बात
1. आयुष्मान भारत योजना में दोबारा से रजिस्ट्रेशन कब से शुरू होंगे। इसको लेकर कहीं से जानकारी नहीं मिल पाती है। - लेखराज ठाकुर, विजयनगर
2. जनगणना 2011 के बाद के लोग जो उस वक्त छूट गए होंगे, उनके लिए इस योजना में कब से पंजीकरण शुरू होगा। - अमित शर्मा, गंगापुरम
3. आयुष्मान भारत योजना के संदर्भ में किसी तरह की जानकारी अस्पतालों से नहीं मिल रही है। योजना के नए आवेदन कब शुरू होंगे। - अमित भारद्वाज, मोदीनगर
आयुष्मान भारत योजना से संबंधित किसी भी सुझाव या जानकारी के लिए व्हाट्सएप करें : 9711635666
. ईमेल करें
gbd-cityreporter@gbd.amarujala.com
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