जज ने ऐसी काउंसिलिंग की कि तीन साल से तलाक मांगने वाले अब रहेंगे साथ-साथ
गाजियाबाद। कहासुनी और मनमुटाव रिश्तों में दरार ला सकता है। तीन साल पहले संदीप और प्रोमिला को एक-दूसरे से तलाक चाहिये था। इसके लिए उनका रिश्ता घर की दहलीज से अदालत की चौखट तक पहुंच गया। समय के साथ दोनों समझे और दोनों के परिवार में फिर से खुशियां लौट आई हैं। संदीप और प्रोमिला ने तलाक की जगह एक-दूसरे का साथ चुना है। एक रिश्ते की जीत हुई है।
अधिवक्ता एसके पुंडीर के मुताबिक आर्यनगर निवासी संदीप कुुमार और प्रोमिला 17 साल पहले शादी के बंधन में बंधे थे। शादी के दो साल बाद बेटे का जन्म हुआ। पति-पत्नी ने आपसी सहमति से बेटे को संदीप की बहन को गोद दे दिया। छह साल बाद 2012 में दूसरा बेटा पैदा हुआ। दूसरा बेटे के जन्म के बाद मामूली कहासुनी और मनमुटाव होने लगे। धीरे-धीरे यह इतने बढ़े दोनों ने अलग-अलग रहने का फैसला किया।
अधिवक्ता पुंडीर ने बताया कि आपसी गलतफहमी के कारण आए दिन घर में कलह बढ़ गई थी। इसलिए दोनों ने अलग रहने का फैसला किया। 2018 से दोनों अलग रहने लगे। तलाक लेने के लिए परिवार न्यायालय में अर्जी दाखिल की। बेटा संदीप के साथ रह रहा था। इससे बच्चे का विकास और प्रभावित रहने लगा।
तलाक का मुकदमा दायर होने के बावजूद पति-पत्नी में प्यार कम नहीं हुआ। अदालत में दोनों ने कहा कि किसी के ऊपर किसी तरह का कोई बकाया या लेन-देन नहीं है। तलाक लेने के दौरान पत्नी ने किसी तरह का गुजारा भत्ता लेने से मना कर दिया। लिखित में दिया कि दोनों पढ़े-लिखे हैं और अपना जीवन निर्वाह कर सकते हैं। प्रोमिला ने कहा न तो गुजारा-भत्ता चाहिए और ना ही किसी तरह की कोई कार्रवाई संदीप के खिलाफ करूंगी। प्रोमिला के इस तर्क को अदालत ने गंभीरता से विचार किया और दोनों की काउंसिलिंग करते हुए कहा कि सामान्य गलतफहमी में दूर रहकर सिर्फ पश्चाताप होगा। क्योंकि दोनों के बीच में प्यार है। अपने प्यार और बच्चे के भविष्य के लिए साथ रहकर जीवन यापन करो। इसके बाद दोनों ने साथ रहने का संकल्प लिया और साथ घर चले गए।