एक दिन में 25 जगहों पर लिए जाएंगे पानी के नमूने
गाजियाबाद। बरसात होने पर जल जनित बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने योजना बनाई है। एक दिन में 25 जगह से पानी के सैंपल लिए जाएंगे। इसके लिए चार टीम बनाई गई हैं। विभाग ने जिले में 320 क्षेत्रो को चयनित किया है, जहां पर दूषित पानी की आपूर्ति होने की संभावना है। इसमें मलिन बस्ती से लेकर इंदिरापुरम, वसुंधरा और वैशाली का पॉश इलाका भी शामिल है। फिलहाल मौजूदा समय में सिर्फ शिकायत के आधार पर पानी की जांच की जा रही है।
डेढ़ साल से नहीं हुई जांच
पिछले डेढ़ साल से जिले में पानी की कोई जांच नहीं की गई। अधिकारियों का कहना है कि सभी कर्मचारी कोरोना संक्रमण नियंत्रण में लगे थे। अब तर्क दिया जा रहा है कि सिर्फ तीन महीने से पानी की जांच बंद थी, क्योंकि पानी की जांच करने वाला कर्मचारी चार महीने पहले सेवानिवृत्त हो गया था। अधिकारियों का कहना है कि अब कोरोन संक्रमण पूरी तरह से नियंत्रण में है और अब टीम भी खाली है, इसलिए जल्द ही पानी की सैंपलिंग शुरू की जाएगी।
पुलिस से लिया जाएगा सहयोग, बड़े स्तर पर की जाएगी कार्रवाई
जिला संक्रामक रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ आरके गुप्ता का कहना है कि पानी की जांच करने के दौरान कई बार लोग विरोध कर देते थे, इस कारण से टीम को वापस लौटना पड़ता था। इस बार कार्य योजना तैयार की जा रही है। जिलाधिकारी से अधिकृत पत्र सभी थानों को जारी कराया गया है। जिससे अगर किसी क्षेत्र या स्थान पर सैंपल लेने के दौरान विरोध होने पर पुलिस की मदद ली जा सके। डॉ. गुप्ता ने बताया कि अब स्कूल व कॉलेज भी खुलने लगे हैं। होटल, ढाबों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सैंपलिंग के लिए अभियान चलाया जाएगा। विशेष तौर पर आइसक्रीम व बर्फ बनाने वाले सेंटर, अवैध व वैध रूप से जिले में संचालित पानी के प्लांट की जांच की जाएगी। डॉ. गुप्ता ने बताया कि हाल ही में कुछ क्षेत्रों में पानी की जांच की गई थी, जहां भी रिपोर्ट फेल आई थी, संबंधित को नोटिस जारी किया गया है। जल्द ही उस क्षेत्र में दोबारा जांच की जाएगी।
अस्पताल में प्रतिदिन बढ़ रहे हैं पीलिया व टॉयफाइड के मरीज
जिला एमएमजी एवं संयुक्त अस्पताल में हो रही खून की जांच में प्रतिदिन पांच से दस टॉयफाइड व पीलिया के मरीजों की पुष्टि हो रही है। संयुक्त अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि दूषित पानी से सिर्फ टॉयफाइड और पीलिया ही नहीं कई अन्य संक्रामक बीमारियां भी होती हैं। सबसे अधिक परेशानी लीवर व पेट संबंधित बीमारियों की होती है।