गाजियाबाद में लूट, हत्या और डकैती की अनसुलझी वारदातों के साथ-साथ पुलिस के लिए वह अपराधी भी चुनौती बन गए हैं, जो लापता चल रहे हैं। पुलिस के रिकॉर्ड में ऐसे 660 बदमाश हैं, जिनका कोई अता-पता नहीं है। इनमें 42 इनामी हैं तो साथ ही रजिस्टर्ड गैंग के सदस्य और हिस्ट्रीशीटर भी शामिल हैं। लापता अपराधियों को तलाशने के लिए पूर्व में ऑपरेशन दस्तक चलाया गया, लेकिन कोई खास फायदा नहीं मिला। पुलिस अधिकारी अब ऑपरेशन ऑल आउट चलाने की बात कह रहे हैं।
जिले में लूट, डकैती, वाहन चोरी, चोरी, स्नेचिंग की वारदात करने वाले 190 गैंग रजिस्टर्ड हैं, जिनमें 185 गैंग जिला स्तरीय और 5 मंडल स्तरीय हैं। इन रजिस्टर्ड गैंग में 835 अपराधी शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक रजिस्टर्ड गैंग के 264 बदमाश जेल में हैं तो वहीं 24 की मौत हो चुकी है।
चौंकाने वाली बात यह है कि रजिस्टर्ड गैंग के 292 बदमाश लापता चल रहे हैं। इन बदमाशों ने पुलिस के माथे पर बल ला दिया है। इसके बारे में न तो पुलिस को पता है और न ही अधिकारियों को कोई जानकारी है। इतना ही नहीं, पुलिस के लिए काम करने वाली अभिसूचना इकाई के पास भी इन बदमाशों के बारे में कोई इनपुट नहीं है। पुलिस यह तक नहीं स्पष्ट कर पा रही है कि लापता बदमाश जिंदा भी हैं या नहीं। हालांकि, संगीन घटनाएं होने पर पुलिस और उसका मुखबिर तंत्र आज भी इन्हीं बदमाशों को खंगालता है।
326 हिस्ट्रीशीटर भी पुलिस के चंगुल से फरार
जिले में हिस्ट्रीशीटर बदमाशों की संख्या 1326 है। इनमें से साढ़े 450 से अधिक बदमाशों की हिस्ट्रीशीट पिछले साल ही खुली है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 326 हिस्ट्रीशीटर भी फरार चल रहे हैं। पुलिस ने अभियान चलाकर तस्दीक किया तो 465 हिस्ट्रीशीटर जेल में मिले और 18 की मौत होनी पायी गई। फरार चल रहे हिस्ट्रीशीटरों के बारे में उनके परिजनों ने भी जानकारी होने से इंकार किया है।
42 इनामी बदमाशों को भी तलाश रही पुलिस
फरार चल रहे 660 बदमाशों में 42 इनामी भी शामिल हैं। इनमें 5 हजार से लेकर 50 हजार तक के इनामी बदमाश हैं। पुलिस के मुताबिक 50 हजार के इनामी 2 बदमाश, 25 हजार के इनामी 36 बदमाश, 20 हजार का इनामी एक बदमाश, 15 हजार का इनामी एक बदमाश तथा 5 हजार का इनामी एक बदमाश शामिल है। इनमें वह बदमाश भी शामिल हैं, जिन पर तीन साल पहले से इनाम चला आ रहा है।
ऑपरेशन दस्तक से पता चले लापता बदमाश
अपराधियों को चिन्हित करने करने के लिए पूर्व एसएसपी कलानिधि नैथानी ने ऑपरेशन दस्तक चलाया था। इसके तहत बीट स्तर पर आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की मौजूद स्थिति जांची गई। इस दौरान पता चला कि पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज कई अपराधी लापता हैं। पुलिस ने उन्हें तलाशने की भरसक कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। फरार बदमाशों में हिस्ट्रीशीटर तथा विभिन्न गैंग के बदमाश शामिल निकले।
इस साल चार नए गैंग बने
पिछले साल जिले में रजिस्टर्ड गैंग की संख्या 186 थी, जो इस साल बढ़कर 190 हो गई है। पुलिस ने चार नए गैंग शामिल किए हैं। इनमें ट्रांसफार्मर चोरी कर धन अर्जित करने वाले बदमाशों का गिरोह, वाहन चोरी करने वाले बदमाशों का गैंग, कारों से बैटरी व साइलेंसर चोरी करने वाले बदमाशों का गैंग तथा फ्लैट दिलाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये हड़पने वाले बिल्डरों का गैंग भी शामिल है।
एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि अभियान चलाकर लापता व फरार अपराधियों का सत्यापन कराया जाएगा। बीट स्तर तक सक्रियता बढ़ाई जाएगी। ऑपरेशन ऑल आउट चलाकर बदमाशों की धरपकड़ की जाएगी।