मदद का पैसा आया पर 12 दिन बाद भी अनाथ बच्चों को मिल नहीं पाया
गाजियाबाद। कोरोना से अनाथ हुए बच्चे सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं। शासन ने पैसा भेज दिया गया है, लेकिनमुख्यमंत्री की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। तब तक यह पैसाबच्चों को नहीं मिल पाएगा। उधर, बाल कल्याण विभाग ने जिले में कोरोना काल में अनाथ हुए सभी बच्चों के दस्तावेजों केसत्यापन के साथ सभी प्रक्रिया पूरी कर ली है। कोरोना से अनाथ हुए बच्चों में 28 ने माता-पिता दोनों को खो दिया है।
कोरोना काल में बड़ी संख्या में बच्चे अनाथ हुए हैं, जिसमें से 28 बच्चों ने माता-पिता दोनों को खो दिया है और बाकी बच्चों ने अपने पिता या माता को खोया है। बाल सेवा योजना के तहत जिले में अभी तक अनाथ बच्चों के 150 आवेदन आए हैं, जिसमें से 125 बच्चों का विभागीय सत्यापन जून के अंत तक पूरा कर लिया गया था। इसमें 18 आवेदन अमान्य हो गए हैं, जो इस योजना के मानकों के अनुरूप नहीं हैं। जुलाई के पहले सप्ताह में सभी को अनुदान रशि मिलनी थी, लेकिन जुलाई के 10 दिन बीतने के बाद भी मदद की राशि बच्चों तक पहुंच पाई, क्योंकि जब तक शासन से इसकी घोषणा नहीं हो जाती राशि नहीं दी जाएगी। शासन की तरफ से 27 जून को जिले में 100 आवेदकों के लिए तीन महीने की अनुदान राशि आ चुकी है।
इनको मिलेगा योजना का लाभ
शून्य से 18 वर्ष तक के सभी बच्चे, जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु कोविड से हुई है या फिर वैध संरक्षक की मृत्यु कोविड से हुई है। साथ ही वर्तमान में माता या पिता की आय प्रतिवर्ष तीन लाख से अधिक न हो, उनको लाभ मिलेगा। शून्य से 10 वर्ष तक की आयु के बच्चों के वैध संरक्षक के खाते में चार हजार प्रतिमाह की धनराशि दी जाएगी। 11 से 18 वर्ष के बच्चों को कक्षा 12वीं तक निशुल्क शिक्षा अटल आवासीय या कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में कराई जाएगी। अवकाश के दौरान चार हजार प्रतिमाह की की दर से 12000 की धनराशि वैध संरक्षक के खाते में भेजी जाएगी। ऐसी सभी बालिकाओं की शादी के लिए एक लाख एक हजार की धनराशि भी दी जाएगी।
शासन से निर्देश का इंतजार
योजना के 125 बच्चों का सत्यापन हो गया है। सारी तैयारियां पूरी हो गईं हों। शासन से तिथि तय होने के बाद ही धनराशि आवंटित होगी। शासन के निर्देश का इंतजार है। बाकि सभी परिवारों के साथ लगातार संपर्क बनाया हुआ है और हर प्रकार की सुविधा दी जाएगी।
- अस्मिता लाल, सीडीओ