राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह का गाजियाबाद के लोगों से खास लगाव था। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कई रैली की थी। इसके बाद 2018 में यूपी गेट पर किसान आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे थे। हालांकि उनकी तबियत बिगड़ गई थी, लेकिन इसकी परवाह नहीं की। 2021 में भी 26 जनवरी के ट्रैक्टर मार्च में दिल्ली में हुई हिंसा के बाद उखड़ते किसान आंदोलन को उन्होंने मजबूती थी और यूपी गेट पर आंदोलन कर रहे भाकियू के नेता राकेश टिकैत से फोन पर वार्ता कर समर्थन दिया था। उन्होंने गाजियाबाद के डीएम और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी फोन पर वार्ता की थी।
चौधरी अजित सिंह उम्र के इस पड़ाव पर भी किसानों के लिए सक्रिय रहते थे। किसान और खेती उनके दिल में बसती थी। 26 जनवरी के बाद यूपी गेट पर किसान आंदोलन को जब खत्म कराने की तैयारी चल रही थी और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था, तब चौधरी अजित सिंह ने न सिर्फ राकेश टिकैत को समर्थन दिया बल्कि देर रात में ही उन्होंने रालोद के जिलाध्यक्ष अजयपाल प्रमुख, राष्ट्रीय प्रवक्ता इंद्रजीत सिंह टीटू, प्रदेश प्रवक्ता अजयवीर सिंह समेत कई स्थानीय पदाधिकारियों को धरने पर भेजा था। अगले दिन बेटे व रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी को धरना स्थल पर भेजकर राकेश टिकैत को समर्थन और अपना संदेश भिजवाया। इसके बाद भी वह राकेश टिकैत से बात करते रहे।
------
बीमार होने के बावजूद पहुंचे थे किसान आंदोलन में
वर्ष 2018 में किसानों ने पद यात्रा निकाली और दिल्ली कूच किया। यूपी गेट पर बैरिकेडिंग लगाकर किसानों को रोक दिया गया। किसान भी यहां अड़ गए थे। चौधरी अजित सिंह बीमार होने के बावजूद किसान आंदोलन में यूपी गेट पर समर्थन देने पहुंचे थे। इस दौरान उनकी तबियत बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा था।
------
हाईकोर्ट बेंच की मांग में दिया था वकीलों का साथ
गाजियाबाद में चौधरी अजित सिंह के पिता व पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने वकालत की थी। इसकी वजह से उन्हें गाजियाबाद बार एसोसिएशन से विशेष लगाव था। पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट की अलग बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने आंदोलन किया तो चौधरी अजित सिंह ने गाजियाबाद आकर उन्हें समर्थन दिया था। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य का दर्जा दिलाए जाने की मांग को लेकर भी उन्होंने गाजियाबाद में लंबे समय तक आंदोलन चलवाया था।
-------
त्रिलोक त्यागी को जबरदस्ती लड़वाया था लोकसभा चुनाव
चौधरी अजित सिंह के सबसे करीबी और रालोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी ने बताया कि वर्ष 1999 में वह संगठन का कार्य देखते थे। लोकसभा चुनाव आए तो कांग्रेस और लोकदल का गठबंधन हुआ। चौधरी अजित सिंह ने गाजियाबाद की सीट अपने पास रखी और उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहा। त्रिलोक त्यागी बताते हैं कि उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार किया तो जबरदस्ती कर उन्हें चुनाव लड़वाया और चुनाव खर्च के लिए पैसा भी दिया। उन्होंने बताया कि चौधरी अजित सिंह उन्हें छोटे भाई की तरह मानते और प्रेम करते थे।
-------
जीवन के आखिरी दिनों में रालोद को फिर जिंदा कर गए
किसान आंदोलन के जरिए चौधरी अजित सिंह जीवन के आखिरी दिनों में वेस्ट यूपी में रालोद को फिर जिंदा कर गए। रालोद से छिटककर भाजपा के साथ चले गए जाटों को वह फिर से साध गए। किसानों के मुद्दों को उठाते रहे और किसान आंदोलन को समर्थन करने के बाद से अब जाट मतदाताओं की फिर से रालोद में वापसी हुई है। यही वजह है कि गाजियाबाद में जिला पंचायत चुनाव में रालोद ने 14 में से तीन सीटें जीती हैं।
---------
कोट
चौधरी अजित सिंह के निधन से न सिर्फ राष्ट्रीय लोकदल को बल्कि देश के हर किसान को नुकसान हुआ है। यह ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई करना संभव नहीं होगा। - इंद्रजीत सिंह टीटू, राष्ट्रीय प्रवक्ता, रालोद
--------
भारतीय राजनीति के प्रमुख स्तंभ व किसान नेता चौधरी अजित सिंह का निधन अत्यंत दुखद है। उनका अचानक चले जाना किसानों के संघर्ष और राजनीति में कभी न भरने वाली खाली जगह छोड़ गया है। - बिजेंद्र यादव, कांग्रेस जिलाध्यक्ष
-----
चौधरी अजित सिंह के चले जाने से मुझे व्यक्तिगत और किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है। उनके जैसा निस्वार्स्थ भाव वाले राजनेता अब राजनीति में कम ही बचे हैं। - त्रिलोक त्यागी, राष्ट्रीय महासचिव, रालोद
-----
चौधरी अजित सिंह के निधन से प्रदेश का किसान निर्धन हो गया है। किसान राजनीति का सबसे चमकदार सूर्य अस्त हो गया। इस रिक्तता को भरने में अब बहुत समय लगेगा। - अजयवीर सिंह, प्रदेश प्रवक्ता, रालोद
-----
चौधरी अजित सिंह के चले जाने से किसानों की राजनीति को बड़ा नुकसान पहुंचा है। इसकी भरपाई करना मुश्किल होगा। पूरे देश में किसानों की राजनीति के वह बड़ा केंद्र थे। - सुुरेंद्र कुमार मुन्नी, पूर्व विधायक