गजेंद्र अपनी जान बचाने के लिए थाने चौकी और पुलिस अधिकारियों के चक्कर काटते रहे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। पीड़ित पुलिस से कई बार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुके थे। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि यदि पुलिस समय रहते आरोपियों पर कठोर कार्रवाई करती तो गजेंद्र की जान नहीं जाती।
सीओ द्वितीय अवनीश कुमार ने कहा कि दोनों पक्षों में पिछले काफी दिनों से विवाद चल रहा है। शनिवार को पुलिस ने गजेंद्र की शिकायत पर चतर सिंह और उसके बेटे लवी का शांति भंग में जेल भेज दिया था। रविवार को जमानत पर छूटकर आने के बाद दोनों ने गजेंद्र को लाठी डंडों से पीटा और फिर गोली मारकर हत्या कर दी।